
उपसर्ग :- उपसर्ग वह होते है जो शब्द के पहले शुरुआत मे जोड़ कर नये शब्द बनाये जाते है उनको उपसर्ग कहते है।
जैसे :- उप +संहार =उपसहार
अनु +प्रिया =अनुप्रिया
गंगा का पर्यायवाची शब्द क्या है?
हिंदी मे कुल मिलाकर 22उपसर्ग होते है।
1.अति
2.अनु
3.अधि
4.अप
5.अभि
6.उप
7.आ
8.उत
9.अव
10.दूर
11.दुस
12. निर
13. नि
14. निश
15.परा
16.परि
17.प्र
18.प्रति
19वि
20.सम्
21.सु
22.
1. अति :-अति शब्द मे सुन्दर जोड़ देते है तो सुंदर पहले ही मूल शब्द होता है और अति शब्द जोड़ देते है तो नया शब्द बन जाता है। ऐसे ही अन्य शब्द भी बना सकते है।
अति +सुंदर =अतिसुंदर
अति +शय =अतिशय
अति +उत्तम =अतिउत्तम
2.अधि:- संस्कृत का दूसरा उपसर्ग अधि होता है,तो यदि हम अधि मे एक मूल शब्द नियम जोड़ देते है तो एक नया शब्द बन जाता है। इसके अलावा अधि मे अन्य शब्द जोड़ सकते है।
अधि+नियम =अधिनियम
अधि+कार =अधिकार
अधि+कतर=अधिकतर
3.अनु :- संस्कृत उपसर्ग का तीसरा अनु उपसर्ग हैँ, अगर हम अनु शब्द मे एक मूल शब्द प्रिया जोड़ देते है तो एक नया शब्द बन जाता है। इसके अलावा अनु मे अन्य मूल शब्द जोड़ सकते है।
अनु +प्रिया =अनुप्रिया
अनु +ष्का =अनुष्का
4.अप :- संस्कृत उपसर्ग का चौथा उपसर्ग अप होता हैँ। यदि हम अप शब्द मे एक मूल शब्द मान जोड़ देते है तो नया शब्द बन जाता है।
अप +मान =अपमान
5.अभि :-संस्कृत उपसर्ग का पांचवा शब्द अभि होता है, यदि हम अभि शब्द मे एक मूल भावक शब्द जोड़ देते हैँ तो नया शब्द बन जाता है।
अभि +भावक =अभिभावक
6.उप :- संस्कृत उपसर्ग का छटवा शब्द उप है, यदि इसमें एक मूल शब्द संहार जोड़ देते है तो एक नया शब्द उपसँहार बन जाता है।
उप +संहार =उपसंहार
7.आ :- यह सातवा उपसर्ग आ होता है यदि इसमें एक मूल शब्द जीत जोड़ देते है तो नया शब्द आजीत बन जाता है।
आ +जीत =आजीत
8.उत :- यदि उत शब्द मे एक मूल शब्द कर्ष जोड़ देते है तो नया शब्द उत्कर्ष बन जाता है।
उत +कर्ष =उत्कर्ष
9.अव :- यह उपसर्ग का नौवा उपसर्ग अव होता है, यदि अव शब्द मे एक मूल शब्द गुण जोड़ दे तो नया शब्द अवगुण बनता है।
अव +गुण =अवगुण
10.दूर :- हिंदी उपसर्ग का दशवा उपसर्ग दूर होता है यदि दूर मे मूल शब्द व्यवहार जोड़ देते है। तो एक नया शब्द दूराव्यवहार बन जाता है।
दूर +व्यव्हार =दूराव्यवहार
11.दुस :- दुस उपसर्ग मे एक मूल शब्द साहस जोड़ देते है तो एक नया शब्द दुस्साहस बन जाता है।
दुस् + साहस = दुस्साहस
12.निर :- निर शब्द मे एक मूल शब्द वारण शब्द जोड़ देने से नया शब्द निवारण बन जाता है।
निर +आवरण =निवारण
13.नि :- नि शब्द मे एक मूल शब्द वास शब्द जोड़ने पर नया शब्द निवास बनता है।
नि +वास =निवास
14.निश :-निश शब्द मे एक मूल शब्द ताल जोड़ने पर नया शब्द निशताल बन जाता है।
निश+ ताल =निशताल
15.परा :- परा शब्द मे एक मूल शब्द जय शब्द जोड़ने पर एक नया शब्द पराजय बन जाता है।
परा +जय =पराजय
16.परि:- परि शब्द मे एक मूल शब्द णाम शब्द जोड़ने पर एक नया शब्द परिणाम बन जाता है।
परि +नाण =परिणाम
17.प्र :- प्र शब्द मे एक मूल शब्द बल शब्द जोड़ने पर नया शब्द प्रबल बनता है।
प्र +बल =प्रबल
18.प्रति :- प्रति शब्द मे एक मूल शब्द दिन जोड़ने पर नया शब्द प्रतिदिन बन जाता है।
प्रति +दिन =प्रतिदिन
19.वि :- वि शब्द मे एक मूल शब्द कार जोड़ने पर नया शब्द विकार बन जाता है।
वि +कार =विकार
20.सम्:- सम् शब्द मे एक मूल शब्द भव जोड़ने पर एक नया शब्द सम्भव बनता है।
सम्+भव= सम्भव
21.सु :- सु शब्द मे मूल शब्द मन जोड़ने पर नया शब्द सुमन बनता है।
सु +मन =सुमन
22.कु :- कु शब्द मे मूल शब्द शल जोड़ने पर नया शब्द कुशल बनता है।
कु +शल =कुशल

हिंदी भाषा में उपसर्ग कितने होते हैं इस प्रश्न का जवाब दिया है कि हिंदी भाषा में कितने तरह से उपसर्ग बन सकते हैं।
हिंदी भाषा में तीन प्रकार के उपसर्ग होते हैं।
जाने आसान भाषा में उपसर्ग उदाहरण के साथ
मूल शब्द के आगे लगने वाले ऐसे शब्दांश के अंत जिनका कोई स्वतंत्र अर्थ नहीं होता है पर उस शब्द के आगे लगने से उसका अर्थ परिवर्तन कर देते हैं ऐसे शब्दांश को उपसर्ग कहा जाता है।
जैसे संस्कृत का एक शब्दांश यानी उपसर्ग अति है।
अति का मतलब या उसका अर्थ अधिक से होता है।
अति शब्दांश है लेकिन जगह संस्कृत के किसी मूल शब्द के साथ जुड़ेगा तो उसके अर्थ को परिवर्तित कर देगा जैसे।
उत्तम मूल शब्द है जिसका मतलब बढ़िया होता है। अब इसमें अति यानी जिसका अर्थ अधिक होता है जोड़ दिया जाए तो एक नया शब्द बनेगा अत्युत्तम शब्द जिसका अर्थ होगा बहुत अच्छा या बहुत बढ़िया।
आप उपरोक्त उदाहरण के समझ गए हैं कि किस तरह से कोई नया शब्द उपसर्ग और प्रत्यय से बनता है।
हिंदी भाषा में 3 तरह से उपसर्ग बनाए जाते हैं।
1. संस्कृत के तत्सम शब्दों से बने उपसर्ग
इसकी संख्या 22 मानी जाती है।
आति, अधि, अनु,आ, उत् इत्यादि
अति शब्सेदांश बना अतिक्रमण
अनु शब्दांश से बना अनुग्रह
2.हिंदी के तद्भव शब्द से उपसर्ग
हिंदी के तद्भव शब्द से बने उपसर्ग
जो हिंदी के मूल शब्दों से ही बनते हैं पुलिस स्टाफ जैसे पढ़े मूल शब्द है इसमें अन उपसर्ग लगा दिया तो बन गया अनपढ़।
पूत शब्द है, जिसका अर्थ बेटा होता है। क उपसर्ग लगाने पर नया शब्द कपूत बनता है।
3. आगत विदेशी उपसर्ग
जैसा जानते कि हिंदी विदेशी भाषाओं के शब्द को ग्रहण करके संवेदनशील बन गई है इस तरह उपसर्ग में भी विदेशी शब्दों का प्रयोग होता है जैसे मास्टर मूल शब्द अंग्रेजी का और उसमें उपसर्ग हेड लग गया बन गया हेड मास्टर।
जैसे अरबी का एक शब्द है खुश या उपसर्ग बू के साथ लग जाए तो बन जाता है खुशबू।
किस तरफ से ढेर सारे उपसर्ग की सूची आप किताबों पुस्तकों से पढ़ सकते हैं। लेकिन इसे समझने का तरीका हमने ऊपर बता दिया है आपको बेहतर तरीके से समझ में आएगा। अगर इस तरह का कोई सवाल है तो इस लिंक पर हम से पूछ सकते हैं, पूरा इसका जवाब दिया जाएगा।
उपसर्ग से संबंधित एक सवाल आपसे पूछ रहे हैं जिसका जवाब आप कमेंट बॉक्स में जरूर दीजिएगा हमें इंतजार है।
उन्नति शब्द में कौन सा उपसर्ग लगा हुआ है?
आप का ऑप्शन है
- उत्
- उन्
इन दोनों में से कौन सा उपसर्ग प्रयोग हुआ है?
उपसर्ग -उपसर्ग वह शब्दांश या अव्यय होते है , जो किसी शब्द के आरम्भ में जोड़कर नये शब्द बनाये जाते है, वह उपसर्ग कहलाते है। हिंदी मे कुल मिलाकर 22 उपसर्ग होते है।
उदाहरण - अति +प्रिय =अतिप्रिय
अधि +कार =अधिकार
अधि +कतर =अधिकतर
अभि +मान =अभिमान
अ +सत्य =असत्य
प्र +बल =प्रबल
अप +यश =अपयश
प्र +चार =प्रचार
अनु +शासन =अनुशासन
उप +हार =उपहार
आ +हार =आहार
उप +गृह =उपगृह
वि +मान =विमान
प्रति +दिन =प्रतिदिन

चलिए हम आपको बताते हैं कि हिंदी में कुल कितने उपसर्ग होते हैं दोस्तों हिंदी में कुल 22 उपसर्ग होते हैं जो हम आपको नीचे बताने जा रहे हैं।
अति, अधि, अनु,अभी, अप,आ, अव, दूर, उत्,उप,नि, परा, परि ,प्र, प्रति, वि,सम, सु, निर, दुस,अपि, निस, इस प्रकार हमने आपको यहां पर 22 उपसर्ग के नाम बता दिए हैं अब नीचे कुछ उदाहरण बताते हैं।
उदाहरण:-
उप+ धन हार = उपहार
अनु + शासन = अनुशासन
प्रति + दिन = प्रतिदिन
अप +यश = अपयश
आ +हार = आहार
अधि +कतर = अधिकतर
अ +सत्य = असत्य ।

हिंदी व्याकरण में उपसर्गों (Prefixes) की कोई एक निश्चित कुल संख्या नहीं है, क्योंकि हिंदी भाषा में तीन अलग-अलग स्रोतों से उपसर्ग आए हैं।
उपसर्गों के मुख्य प्रकार और उनकी संख्या:
- संस्कृत के उपसर्ग (तत्सम): व्याकरण के अनुसार इनकी निश्चित संख्या 22 मानी जाती है (जैसे- प्र, अप, सम, अनु, वि)।
- हिंदी के अपने उपसर्ग (तद्भव): इनकी संख्या मुख्य रूप से 10 से 13 के बीच मानी जाती है (जैसे- अ, अध, अन, कु, नी)।
- विदेशी/आगत उपसर्ग (उर्दू, फ़ारसी, अंग्रेज़ी): इनकी संख्या लगभग 19 मानी जाती है (जैसे- कम, खुश, गैर, ना, बे)।
अतः, कुल मिलाकर देखा जाए, तो हिंदी भाषा में लगभग 50 से अधिक उपसर्गों का प्रयोग आम बोलचाल और साहित्य में प्रमुखता से किया जाता है।
हिंदी व्याकरण में उपसर्गों (Prefixes) की कोई एक निश्चित या पक्की संख्या नहीं है, क्योंकि हिंदी ने समय के साथ कई अलग-अलग भाषाओं के शब्दों को अपनाया है।
हालांकि, व्याकरण की किताबों के अनुसार मुख्य रूप से उपसर्गों को तीन हिस्सों में बांटा जाता है और इनकी संख्या इस प्रकार मानी गई है:
1. संस्कृत के उपसर्ग (तत्सम उपसर्ग) - 22 हिंदी में मुख्य रूप से संस्कृत के 22 उपसर्गों का इस्तेमाल होता है। परीक्षाओं में भी सबसे ज्यादा इन्हीं के बारे में पूछा जाता है।
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कुछ प्रमुख नाम: प्र, परा, अप, सम्, अनु, अव, निस्, निर्, दुस्, दुर्, वि, आ, नि, अधि, अपि, अति, सु, उत्/उद्, अभि, प्रति, परि, उप।
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उदाहरण: प्र + हार = प्रहार, आ + जीवन = आजीवन।
2. हिंदी के अपने उपसर्ग (तद्भव उपसर्ग) - लगभग 10 से 13 ये उपसर्ग संस्कृत से ही बदलकर हिंदी के अपने बन गए हैं। विद्वान इनकी संख्या 10 से 13 के बीच मानते हैं।
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कुछ प्रमुख नाम: अ, अन, क/कु, दू, नि, औ/अव, भर, सु, अध, उन, पर, बिन।
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उदाहरण: अन + पढ़ = अनपढ़, भर + पेट = भरपेट।
3. विदेशी या आगत उपसर्ग (उर्दू, फ़ारसी, अरबी) - लगभग 19 चूंकि हिंदी पर उर्दू और फ़ारसी का भी काफी प्रभाव है, इसलिए इन भाषाओं के लगभग 19 उपसर्ग हिंदी में धड़ल्ले से इस्तेमाल होते हैं।
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कुछ प्रमुख नाम: कम, खुश, ग़ैर, दर, ना, बा, बद, बे, ला, सर, हम, हर।
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उदाहरण: बे + रोज़गार = बेरोज़गार, खुश + मिज़ाज = खुशमिज़ाज।
4. अंग्रेज़ी के उपसर्ग (English Prefixes) आजकल हिंदी में अंग्रेज़ी के कुछ उपसर्ग भी जुड़ गए हैं, जिनकी कोई गिनती नहीं है लेकिन वे आम बोलचाल का हिस्सा हैं।
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कुछ प्रमुख नाम: सब (Sub), डिप्टी (Deputy), वाइस (Vice), जनरल (General), चीफ (Chief)।
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उदाहरण: सब-इंस्पेक्टर, डिप्टी-कलेक्टर।
संक्षेप में: अगर आपसे किसी परीक्षा में सीधे तौर पर पूछा जाए, तो सबसे सही उत्तर यही माना जाता है कि मूल रूप से संस्कृत के 22 उपसर्ग होते हैं, लेकिन भाषा के विकास के साथ हिंदी और विदेशी उपसर्ग मिलाकर इनकी कुल गिनती बहुत ज्यादा हो जाती है।





