5 जून, यह दिन विश्व के सभी देशों व देशवासियों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण दिन होता है क्योंकि इस दिन संपूर्ण विश्व में वर्ल्ड एनवायरमेंट डे या विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है। इस दिवस को मनाने की शुरुआत संयुक्त राष्ट्र ने सन 1972 में की थी। इस दिवस को 5 जून से 16 जून तक संयुक्त राष्ट्र महासभा के द्वारा विश्व पर्यावरण सम्मेलन में की गई चर्चा के बाद शुरू किया गया था। और 5 जून 1974 को विश्व में पहला पर्यावरण दिवस मनाया गया। यानी आज से 47 वर्ष पूर्व। उस वक्त संयुक्त राष्ट्र ने पर्यावरण दिवस को पर्यावरण के प्रति सामाजिक व राजनीतिक स्तर पर जागरूकता लाने के लिए शुरू किया था।
पर्यावरण के बिना जीवन की कल्पना करना संभव नहीं है। परंतु मानव द्वारा प्रकृति का दोहन किया जा रहा है जिसका दुष्परिणाम मानव को ही भुगतना पड़ रहा है। इस दुनिया में सबसे ज्यादा ताकतवर व बुद्धिमान कोई प्राणी है तो वह है मानव। ऐसा इसलिए क्योंकि मानव ने लगभग दुनिया की हर चीज पर अपना काबू कर लिया हैपरंतु तकनीक व आधुनिक उपकरणों के द्वारा मानव ने प्रकृति का इतना ज्यादा दोहन कर दिया है कि वह प्रकृति का भक्षक बन गया है। और इसका दुष्परिणाम सभी प्राणी भुगत रहे हैं। आज पृथ्वी पर प्रदूषण का स्तर बढ़ चुका है साथ ही साथ ओजोन परत क्षतिग्रस्त हो गई है। आज यदि बात प्रदूषण की करे तो भारत प्रदूषण से ग्रस्त देशों में से एक है। विश्व में कई हजार पेड़ रोज काटे जा रहे हैं और उनकी तुलना में लगाए बहुत कम जा रहे हैं। पेड़ों की कमी के कारण वायुमंडल में ऑक्सीजन व कार्बन डाइऑक्साइड के स्तर में असंतुलन देखने को मिल रहा है। जो मानव स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है। प्रकृति के साथ छेड़छाड़ के दुष्परिणाम अक्सर मानव ही भुगतते हैं इसे हम कोरोनावायरस के उदाहरण से समझ सकते हैं। कि कैसे मानव ने चमगादड़ पर एक रासायनिक प्रयोग किया और उसका दुष्परिणामअभी तक मानव जाति भुगत रही है।
पर्यावरण मानव के द्वारा किए गए कार्यों से ही क्षतिग्रस्त हुआ है। परंतु सभी मानव साथ में मिलकर यदि सहयोग करें तो हम अपना पर्यावरण दोबारा सुरक्षित कर सकते है। और अगर इसी प्रकार धरती का दोहन होता रहा तो आने वाले 100 सालों में प्रकृति का सूरत-ए -हाल बहुत ही दयनीय हो जाएगा। जिस कारण मानव कष्टकारी जीवन जी रहे होंगे।
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