जर्मनी के एकीकरण (Unification of Germany) का मुख्य वास्तुकार और रणनीतिकार प्रशा (Prussia) के प्रधानमंत्री ओटो वॉन बिस्मार्क (Otto von Bismarck) को माना जाता है। 19वीं शताब्दी के मध्य तक, जर्मनी कोई एक अखंड राष्ट्र नहीं था, बल्कि यह लगभग 39 छोटे-बड़े स्वतंत्र राज्यों का एक राजनीतिक परिसंघ (Confederation) था। बिस्मार्क ने अपने अदम्य कूटनीतिक कौशल, सैन्य आधुनिकीकरण और आक्रामक विदेश नीतियों के माध्यम से इन बिखरे हुए राज्यों को एकजुट करके एक बेहद शक्तिशाली जर्मन साम्राज्य का निर्माण किया।
बिस्मार्क की ऐतिहासिक सफलता का मूल आधार उनका यथार्थवादी राजनीतिक दृष्टिकोण था, जिसे अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में 'रियलपोलिटिक' (Realpolitik) कहा जाता है। उनका अडिग मानना था कि जर्मनी का एकीकरण उदारवादी भाषणों या लोकतांत्रिक संधियों से हासिल नहीं किया जा सकता। वर्ष 1862 में प्रशा की संसद में दिए गए उनके ऐतिहासिक भाषण के अनुसार, "हमारे समय के महान प्रश्नों का निर्णय भाषणों से नहीं, बल्कि 'रक्त और लौह' (Blood and Iron) की नीति से होगा।" इस कठोर नीति का सीधा अर्थ था—सैन्य शक्ति का निरंतर विस्तार और आवश्यकता पड़ने पर कूटनीतिक युद्ध के माध्यम से राष्ट्रीय लक्ष्यों की प्राप्ति।
अपने इस महात्वाकांक्षी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए, बिस्मार्क ने सात वर्षों (1864 से 1871) की अवधि के भीतर तीन अत्यंत सुनियोजित और निर्णायक युद्ध लड़े:
1. डेनमार्क के साथ युद्ध (1864) बिस्मार्क ने ऑस्ट्रिया के साथ एक अल्पकालिक रणनीतिक गठबंधन करके डेनमार्क पर सैन्य हमला किया। इस युद्ध के माध्यम से प्रशा ने श्लेस्विग (Schleswig) और होल्स्टीन (Holstein) के महत्वपूर्ण जर्मन भाषी क्षेत्रों पर सफलतापूर्वक नियंत्रण प्राप्त किया।
2. ऑस्ट्रिया के साथ युद्ध (1866) बिस्मार्क भली-भांति जानता था कि ऑस्ट्रिया को जर्मन परिसंघ से बाहर किए बिना प्रशा का राजनीतिक वर्चस्व स्थापित नहीं हो सकता। उन्होंने अपनी कूटनीतिक चालों से ऑस्ट्रिया को उकसाया और 'सेडोवा के युद्ध' में मात्र सात सप्ताह के भीतर उसे बुरी तरह पराजित कर दिया। इस जीत ने ऑस्ट्रियाई हस्तक्षेप को समाप्त कर 'उत्तरी जर्मन परिसंघ' का निर्माण किया।
3. फ्रांस के साथ युद्ध (1870-1871) दक्षिणी जर्मनी के कुछ राज्य अभी भी प्रशा के सीधे नियंत्रण से बाहर थे और ऐतिहासिक रूप से फ्रांस के प्रभाव में थे। बिस्मार्क ने 'एम्स टेलीग्राम' (Ems Dispatch) नामक एक कूटनीतिक संदेश में चतुराई से फेरबदल करके फ्रांसीसी सम्राट नेपोलियन तृतीय को युद्ध के लिए भड़का दिया। इस भयंकर युद्ध में फ्रांस की करारी हार हुई, जिसने एक साझा विदेशी दुश्मन के खिलाफ पूरे जर्मन राष्ट्रवाद को पूरी तरह से एकजुट कर दिया।
बिस्मार्क की सबसे बड़ी कूटनीतिक जीत यह थी कि उन्होंने युद्ध के दौरान अपने दुश्मनों को हमेशा वैश्विक स्तर पर अकेला (Isolate) रखा। जब उन्होंने ऑस्ट्रिया पर हमला किया, तो फ्रांस और रूस को तटस्थ रखा; और जब फ्रांस पर हमला किया, तो सुनिश्चित किया कि कोई अन्य शक्ति फ्रांस के समर्थन में न आए।
अंततः 18 जनवरी 1871 को फ्रांस के वर्साय महल के प्रसिद्ध 'हॉल ऑफ मिरर्स' में प्रशा के राजा विलियम प्रथम को एकीकृत जर्मन साम्राज्य का प्रथम सम्राट (Kaiser) घोषित किया गया। बिस्मार्क का यह अभियान अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का एक ऐसा बेजोड़ मास्टरक्लास था, जिसने यूरोपीय मानचित्र को हमेशा के लिए बदल दिया।


