अभिमान और स्वाभिमान में अगर दोनों को देखा जाए तो कोई फर्क नहीं परन्तु इन दोनों को इनके अर्थ की तरफ से देखा जायें तो बहुत फर्क है | अभिमान और स्वाभिमान में अगर फर्क करना है, तो इसके लिए सबसे पहले इन दोनों के बारें में जानना जरुरी है, इनको समझना जरुरी है |
| Updated on December 20, 2025 | others
अभिमान और स्वाभिमान में क्या फर्क है ?
@kanchansharma3716 | Posted on December 20, 2025
आज मैं आपको पोस्ट के माध्यम से अभिमान और स्वाभिमान में फर्क के बारे में बताती हूं -
अभियान में व्यक्ति को केवल मैं दिखा देता है। जबकि स्वाभिमान में दूसरों के हितों के प्रति सतर्कता विद्यमान रहती है।
यदि महत्व दिया जाए तो अभिमानी दूसरों को लघु समझने लगता है। और स्वाभिमानी अपने कार्य को महत्वता को समझ कर उसकी उपयोगिता का मूल्य जानता है।
अभिमानी सदैव अपनी कार्यों की सफलता को गिनता है।वह अधिकतर भूतकाल में जीता है जबकि स्वाभिमानी सीख लेकर अधिक उत्साही होकर नई योजनाओं को क्रियान्वित करता है।
स्वाभिमानी एक व्यक्ति को स्वावलंबी बनता है, जबकि अभिमानी व्यक्ति दूसरों पर अधिकार ही जमाता है।
अभिमानी व्यक्ति अपने स्वार्थपूर्ति हितों, के लिए दूसरे की आहत होने की परवाह नहीं करता जबकि स्वाभिमानी व्यक्ति दूसरों के हितों को ध्यान में रखकर अपने अस्तित्व को बचाए रखता है।

अभिमान और स्वाभिमान में बहुत बड़ा फर्क होता है चलिए हम आपको दोनों में फर्क बताते हैं:-
- आपने देखा होगा कि जो व्यक्ति अभिमानी होता है वह हमेशा हेकड़ी भाषा का प्रयोग करता है जबकि स्वाभिमानी व्यक्ति हमेशा विनम्र भाषा का प्रयोग करता है।
- स्वाभिमानी अपनी सफलता का श्रेय अपनी साथियों को देते हैं जबकि अभिमानी उसका श्रेय खुद पूरा लेना चाहते हैं।
- स्वाभिमानी दूसरे लोगों को प्रभावित करने की चेष्टा नहीं करते जबकि अभिमानी लगातार दूसरे लोगों को प्रभावित करने की चेष्टा करते हैं।
- स्वाभिमानी किसी के भी साथ काम करने को तैयार रहते हैं जबकि अभिमानी सिर्फ वही काम करते हैं जहाँ उनको प्रमुखता मिलती हो।
- अभिमानी व्यक्ति हमेशा दूसरों को शिक्षा देते रहते हैं जबकि स्वाभिमानी व्यक्ति दूसरों के अच्छे गुणों की प्रशंसा करतें हैं।
इस प्रकार अभिमानी व्यक्ति और स्वाभिमानी व्यक्ति में आप फर्क कर सकते है।

आज हम आर्टिकल के माध्यम से बताएंगे कि अभिमान और स्वाभिमान में क्या फर्क है।आपने देखा होगा कि जो व्यक्ति अभिमानी होता है वह हमेशा हेकड़ी भाषा का प्रयोग करता है जबकि स्वाभिमानी व्यक्ति हमेशा विनम्र भाषा का प्रयोग करता है।यदि महत्व दिया जाए तो अभिमानी दूसरों को लघु समझने लगता है। और स्वाभिमानी अपने कार्य को महत्वता को समझ कर उसकी उपयोगिता का मूल्य जानता है।स्वाभिमान हमारे अपने विश्वास को जाग्रत करता है। हमें जीवन मूल्यों के प्रति, अपने देश के प्रति, अपनी संस्कृति, अपने समाज और अपने कुल के प्रति स्वाभिमानी बनने की प्रेरणा देता है।अभिमानी व्यक्ति हमेशा दूसरों को शिक्षा देते रहते हैं जबकि स्वाभिमानी व्यक्ति दूसरों के अच्छे गुणों की प्रशंसा करतें हैं।अभिमानी सदैव अपनी कार्यों की सफलता को गिनता है।वह अधिकतर भूतकाल में जीता है जबकि स्वाभिमानी सीख लेकर अधिक उत्साही होकर नई योजनाओं को क्रियान्वित करता है।स्वाभिमानी दूसरे लोगों को प्रभावित करने की चेष्टा नहीं करते जबकि अभिमानी लगातार दूसरे लोगों को प्रभावित करने की चेष्टा करते हैं।

