पेटीएम (Paytm) और बायजूज (Byju's) भारत के दो सबसे बड़े "यूनिकॉर्न" थे, लेकिन आज दोनों गंभीर संकट में हैं। दोनों की कहानियाँ अलग हैं, पर उनकी गलतियों में कुछ समानताएँ भी हैं।
यहाँ विस्तार से बताया गया है कि इनसे कहाँ चूक हुई:
1. पेटीएम (Paytm): रेगुलेटरी नियमों की अनदेखी
पेटीएम की मुसीबत का मुख्य कारण RBI (रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया) के कड़े नियमों का पालन न करना रहा है।
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KYC में बड़ी लापरवाही: जांच में पाया गया कि पेटीएम पेमेंट्स बैंक में हजारों खाते एक ही 'पैन कार्ड' से जुड़े थे। इससे मनी लॉन्ड्रिंग (पैसों की हेराफेरी) का खतरा बढ़ गया।
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लगातार चेतावनी को नजरअंदाज करना: RBI ने पेटीएम को 2018 से ही कई बार चेतावनी दी थी, लेकिन बैंक ने अपनी कार्यप्रणाली में सुधार नहीं किया। अंततः 2024-25 में RBI को इसके बैंकिंग लाइसेंस पर सख्त कदम उठाना पड़ा।
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कॉरपोरेट गवर्नेंस: कंपनी और उसके पेमेंट्स बैंक के बीच "चाइनीज वॉल" (साफ अंतर) नहीं थी, जिससे डेटा और कामकाज आपस में मिल रहे थे, जो बैंकिंग नियमों के खिलाफ है।
2. बायजूज (Byju's): अंधाधुंध विस्तार और कर्ज का जाल
बायजूज की कहानी "जरूरत से ज्यादा और बहुत जल्दी" (Too much, too fast) हासिल करने की कोशिश की है।
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महंगे अधिग्रहण (Acquisitions): बायजूज ने दुनिया की बड़ी कंपनियों (जैसे Aakash, Great Learning, Epic) को खरीदने के लिए अरबों डॉलर खर्च कर दिए। जब बाजार बदला, तो ये खरीदारी बोझ बन गई।
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कर्ज का भारी दबाव: विस्तार के लिए बायजूज ने भारी विदेशी कर्ज (लगभग $1.2 बिलियन) लिया। ब्याज दरें बढ़ने और इनकम कम होने से वे कर्ज चुकाने में नाकाम रहे और मामला कोर्ट (Insolvency) तक पहुँच गया।
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बिक्री का आक्रामक तरीका (Toxic Sales Culture): कंपनी पर आरोप लगे कि उनके सेल्स एजेंट गरीब मां-बाप को डराकर या गुमराह करके महंगे कोर्सेज बेचते थे। इससे कंपनी की साख (Brand Value) गिर गई।
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अकाउंटिंग में देरी: बायजूज ने कई सालों तक अपना ऑडिटेड फाइनेंशियल रिजल्ट पेश नहीं किया, जिससे निवेशकों का भरोसा पूरी तरह उठ गया।
दोनों में क्या 'कॉमन' गलतियाँ थीं?
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मुनाफे से ज्यादा वैल्यूएशन पर ध्यान: दोनों कंपनियों ने असल मुनाफा कमाने के बजाय अपनी कंपनी की 'कीमत' (Valuation) बढ़ाने और फंडिंग जुटाने पर ज्यादा जोर दिया।
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फाउंडर्स का अति-आत्मविश्वास: दोनों के संस्थापकों (विजय शेखर शर्मा और बायजू रवींद्रन) ने रेगुलेटर्स और मार्केट के बदलते संकेतों को समय रहते नहीं समझा।
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सस्टेनेबल मॉडल की कमी: विज्ञापन और मार्केटिंग पर करोड़ों खर्च किए गए, लेकिन बिजनेस का आधार इतना मजबूत नहीं रखा गया जो मुश्किल वक्त में कंपनी को संभाल सके।
आज पेटीएम का बैंकिंग बिजनेस लगभग खत्म हो चुका है और बायजूज अपनी अस्तित्व की लड़ाई (Insolvency) लड़ रहा है। यह भारतीय स्टार्टअप जगत के लिए एक बड़ा सबक है कि "बिना नियमों के पालन और बिना मुनाफे के, रफ्तार जानलेवा हो सकती है।"