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Updated on May 22, 2026others

आनंदी बाई जोशी कौन है ?

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Updated on May 22, 2026
आनंदीबाई जोशी का जन्म 31 मार्च 1865 पुणे में हुआ | ये ऐसी पहली भारतीय महिला थीं, जिन्‍होंने डॉक्‍टरी की डिग्री ली थी। वो भी उस समय जिस दौर में महिलाओं की शिक्षा भी दूभर थी उनको शिक्षा देना पाप समझा समझा जाता था | ऐसे समय में विदेश जाकर डॉक्‍टरी की डिग्री हासिल करना अपने-आप में एक मिसाल है। उनका विवाह नौ साल की आयु में उनसे करीब 20 साल बड़े गोपालराव से हो गया था। और जब वह 14 साल की थी तब उस उम्र में वे माँ बनीं और उनकी एक मात्र संतान हुए जिसकी मृत्‍यु 10 दिनों में ही गई तो उन्‍हें बहुत बड़ा आघात लगा। अपनी संतान को खो देने के बाद उन्‍होंने यह प्रण किया कि वह एक दिन डॉक्‍टर बनेंगी और ऐसी असमय मौत को रोकने का प्रयास करेंगी। उनके पति गोपालराव ने भी उनको भरपूर सहयोग दिया |
 
आनंदीबाई जोशी का व्‍यक्तित्‍व महिलाओं के लिए प्रेरणास्‍त्रोत है। उन्‍होंने सन् 1886 में अपने सपने को साकार किया और वह डॉक्टर बन गई । जब उन्‍होंने यह निर्णय लिया था, उनकी समाज में काफी आलोचना हुई थी काफी लोगो की कड़वी बातो का उन्होंने सामना किया कि एक शादीशुदा हिंदू स्‍त्री विदेश डॉक्‍टरी की पढ़ाई करे ये सही नहीं है हमारे धर्म के खिलाफ है । लेकिन आनंदीबाई एक दृढ़निश्‍चयी महिला थीं और उन्‍होंने आलोचनाओं की बिलकुल भी परवाह नहीं की और अपने काम पर ध्यान दिया । और यही वजह और उनका हौसला था कि उन्‍हें पहली भारतीय महिला डॉक्‍टर होने का गौरव प्राप्‍त हुआ।
 
डिग्री पूरी करने के बाद जब आनंदीबाई भारत वापस लौटीं तो उनका स्‍वास्‍थ्‍य बिगढने लगा और बाईस वर्ष की आयु में ही 26 फ़रवरी 1887 को उनकी मृत्‍यु हो गई। यह सच है कि आनंदीबाई ने जिस उद्देश्‍य से डॉक्‍टरी की डिग्री ली थी, उसमें वे पूरी तरह सफल नहीं हो पाईंं, परन्तु उन्‍होंने समाज में वह स्थान प्राप्त किया, जो आज भी एक मिसाल है | ऐसी देश में जहा महिलाओ को पढाई करने से रोका जाता हो,वैसे देश में अगर कोई महिला डॉक्टर की उपाधि प्राप्त कर ले तो वो पुरे देश के लिए सम्मान की बात है |
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Answered on Dec 11, 2022

दोस्तों इस पोस्ट में आनंदी बाई जोशी के बारे में जानेंगे कि आनंदी बाई जोशी कौन थी आनंदीबाई जोशी का जन्म 31 मार्च 1865 में पुणे में हुआ था यह इस शहर में जन्मी पहली महिला थी जिन्होंने डॉक्टरी की डिग्री प्राप्त की थी जिस समय महिलाओं को शिक्षा से दूर रखा जाता था उस समय आनंदी जोशी विदेश में जाकर डॉक्टरी की डिग्री प्राप्त की थी उनका विवाह 9 वर्ष की आयु में ही हो गया था और उनका पति उनसे लगभग 20 साल बड़ा था और वह 14 वर्ष की उम्र में मां बन गई। उनकी संतान की मृत्यु 10 दिनों में हो गई थी इससे उन्हें बहुत बड़ा सदमा लगा। अपनी संतान को खो देने के बाद ही आनंदी बाई जोशी डॉक्टर बनी।
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Answered on Dec 12, 2022

इस कहानी की प्रमुख पात्र आनंदी है जो एक बहुत ही सुंदर और सुशील कन्या है। आनंदी जी का जन्म 31 मार्च 1865 मैं हुआ था। आनंदी के पिता का नाम भूपसिंह था। आनंदी के पिता भूरसिंह एक रियासत के ताल्लुकेदार थे। जिन्होंने अपनी बेटी आनंदी का विवाह गौरीपुर के जमींदार बेनी माधव सिंह के बड़े बेटे श्रीकंठ से संपन्न किया था। हमारे भारत की यही वह महिला हैं जिन्होंने प्रथम डॉक्टर की डिग्री प्राप्त की थी।Article image

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Answered on Dec 13, 2022

आनंदीबाई जोशी का नाम तो आप सभी सुना ही होगा क्योंकि आनंदीबाई जोशी पुणे में जन्म लेने वाली एक ऐसी महिला थी जिन्होंने अपने शहर में पहली बार डॉक्टर की डिग्री प्राप्त की थी। जी हां दोस्तों आनंदीबाई जोशी का जन्म पुणे शहर में हुआ था। आनंदीबाई जोशी का जन्म 31 मार्च सन 1865 में हुआ था। आपको यह बात जानकर हैरानी होगी कि आनंदीबाई जोशी का विवाह 9 वर्ष की आयु में हो गया था। इसके अलावा आनंदीबाई जोशी का पति उनसे 20 वर्ष अधिक उम्र में बड़ा था। आनंदीबाई जोशी 14 वर्ष की उम्र में मां बन चुकी थी।Article image

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Answered on Dec 21, 2022

आनंदीबाई जोशी जिन्हें लोग आनंदी गोपाल जोशी के नाम से भी जाना जाता है, आनंदीबाई जोशी जी का जन्म 31मार्च 1865 क़ो पुणे मे हुआ था। उस समय की बात है जब महिलाओं क़ो उच्च शिक्षा नही मिल पाती थी ,लेकिन ऐसे समय मे भी आनंदी बाई का डॉक्टर की पढाई करना एक बहुत ही बड़ी उपलब्धि थी, आनंदी बाई जोशी प्रथम भारतीय महिला थी जिन्होंने अपने ग्रेजुएशन के बाद यूनाइटेड स्टेट से 2 साल की मेडिकल में डिग्री हासिल की थी. इसी के साथ आनंदीबाई अमेरिका की धरती पर जाने वाली प्रथम भारतीय महिला भी थी, हमारे भारत की प्रथम महिला डॉक्टर आनंदीबाई जोशी थी, जिन्होंने डॉक्टर बनकर अपने देश का नाम रोशन किया है।Article image

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Updated on May 22, 2026

Anandi Gopal Joshi भारत की पहली महिला डॉक्टरों में से एक थीं। उनका जन्म 1865 में महाराष्ट्र में हुआ था। उन्होंने उस समय महिलाओं के लिए कठिन परिस्थितियों के बावजूद चिकित्सा शिक्षा प्राप्त करने का निर्णय लिया। वे अमेरिका के पेंसिल्वेनिया में स्थित Women’s Medical College of Pennsylvania से 1886 में डॉक्टर बनीं, और यह उपलब्धि हासिल करने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। उनका अध्ययन मुख्य रूप से प्रसूति और महिलाओं के स्वास्थ्य पर केंद्रित था। दुर्भाग्य से, बहुत कम उम्र में 21 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया, लेकिन उन्होंने भारतीय महिलाओं के लिए शिक्षा और चिकित्सा क्षेत्र में प्रेरणा का मार्ग खोला। 

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