"अपमान"... एक ऐसा शब्द जिसने महाभारत को जन्म दिया | एक ऐसा शब्द जो रिश्तों को खत्म कर देता है | अपमान कहने में बेशक एक छोटा सा शब्द है, परन्तु यह शब्द अपने अंदर कई विवादों को रखने वाला है | अपमान कब होता है ? कौन करता है ? क्यों करता है ? इसका जवाब जितना आसान है, उतना ही मुश्किल है |
सबसे पहले तो हमें इस बात का ज्ञान होना चाहिए कि "अपमान " शब्द का मतलबक्या होता है ? और क्यों ये शब्द इतना बुरा होता है, कि लोग इसके नाम से ही नफरत करते हैं ? हमारे जीवन में क्रोध, घृणा, ईर्ष्या, अहंकार जैसे कई शब्द हैं, परन्तु केवल एक अपमान शब्द ही मनुष्य के चेहरे का रंग बदल देता है |
क्या है अपमान ?
- अगर हमसे कोई ग़लती होती है, जिसके कारण हमें अपने से छोटी उम्र के इंसान से माफ़ी मांगनी पड़ जाएं, तो हमारा अपमान हो जाता है |
- कभी हमें हमारी ग़लती की वजह से हमारे बॉस की डाँट सुनने मिल जाएं, तो हमारा अपमान हो जाता है |
- अगर कोई हमारी ग़लती पर हंस दें, तो हमारा अपमान हो जाता है |
अपमान के कई कारण हो सकते हैं, कुछ अच्छे तो कुछ बुरे, कुछ झूठे तो कुछ सच्चे | बस हमें कुछ कोशिश करना चाहिए
जिससे की हम अपनी ज़िंदगी में हमेशा खुश रहें और गलतियां करने से बचें |
अपमानित होने पर भी आप खुद को संभालें :-
- अपनी ग़लती समझे और सुधारें :-
अगर आपका अपमान आपकी ग़लती के कारण हुआ है, तो इसका मतलब ये नहीं है, कि आप हार मान लो या परेशान रहो | अगर आपको किसी ग़लती के कारण अपमान मिला तो उस ग़लती का सुधार करें, ताकि आपको दोबारा उस ग़लती के लिए अपमान न मिलें |
- खुद को बेहतर समझें :-
अगर आपको लगता है, कोई इंसान आपका बेवजह अपमान कर रहा है, तो यह इस बात का सबूत है, कि आप उस इंसान से बेहतर हैं | वो चिढ़ की वजह से आपका अपमान कर रहा है | इस बात को नकारात्मक न लेते हुए सकारात्मक लें |
- मजाक में लें :-
अगर आपको लगता है, कि आपका बेवजह अपमान हुआ है, तो इस बात को नज़रअंदाज़ करो और उसके अपमान को मजाक में लोग | इससे सामने वाले को इस बात का एहसास होगा कि आपके जीवन में बेकार की बातों के लिए कोई जगह नहीं है | परन्तु अगर आपका अपमान सही कारण की वजह हुआ है, तो आप उस कारण को सुधारने की कोशिश करें |