भारतीय टेलीविजन इतने मूर्ख क्यों दिख रहे हैं? - letsdiskuss
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adhish verma

Sr. SEO Specialist | पोस्ट किया |


भारतीय टेलीविजन इतने मूर्ख क्यों दिख रहे हैं?


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Content writer | पोस्ट किया


यह कहना बिलकुल भी गलत नहीं होगा की जिस प्रकार से भारतीय टेलीविज़न को दर्शाया जा रहा है वह बेहद ही चिंताजनक और गलत ढंग है,एक तरह से यह भी कहा जा सकता है कि ये चिंता का विषय है, मानो ऐसा लगता है एक प्रकार से इंडियन टेलीविज़न का मज़ाक उडाया जा रहा है | इसलिए इस बात में बिलकुल आश्चर्य नहीं होगा की क्यों आज की युवा पीड़ी का सारा झुकाव वेब सीरीज और वेब चैनल्स जैसे अमेज़न ,प्राइम नेटफ्लिक्स की और बढ़ रहा है |


जैसा की आजकल कलर्स के एक शो "ससुराल सिमर का" में सिमर को मक्खी के रूप में दिखया जा रहा है | जो की हसने योग्य है, क्योकि वर्तमान में जहां विज्ञानं इतनी तरक्की कर रहा है वहां धारवाहिकों को ऐसा दिखाना बेवकूफी है |


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यही कारण है कि इंडियन टेलीविज़न मूर्खता के रूप में नज़र आ रहा है,जिससे इंडियन टेलीविज़न का मूल्य कम होता जा रहा है और अगर हम रियलिटी शो के बारे में बात करते हैं, तो, मैं सिर्फ यह कहना चाहूंगी कि वास्तव में काल्पनिक डेली सोप की तुलना में उनके पास एक बेहतर स्क्रिप्ट है। तो यह कहना बिकुल गलत नहीं होगा की अब इंडियन टेलीविज़न द्वारा केवल गुमराह करने वाले शो ही रह गए है जो की किसी भी टारगेट ऑडियंस के लिए नहीं है और यह एक चिंता का भी विषय है |


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Media Practitioner | पोस्ट किया


आज के मौजूदा दौर में भारतीय टेलीविजन पर दिखाए जा रहे कार्यक्रमों का स्तर दिन प्रति दिन गिरता जा रहा है। यह कार्यक्रम मनोरंजन के रूप से भी बाहर जाते नज़र आ रहे हैं। वे अपने दैनिक जीवन में खुद को भुनाते हैं और पात्र हमारे विस्तरित परिवार का हिस्सा बन जाते हैं।


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यहाँ 400 साल से ज्यादा की उम्र में बा की भूमिका हो रही है, वंही मिहिर विरानी 'क्योकि सास भी कभी बहू थी' में अपनी मृत्यु के बाद चमत्कारी रूप से जीवन में वापस आ रहा है। नियमित रूप से प्लास्टिक सर्जरी और स्मृति हानि के लिए कई पीढ़ी के छलांग से, टीवी शो दर्शकों को अपने वस् मे रखने के अवसरों पर कभी हार नहीं मानते हैं। परिवार के सदस्यों कि समय-समय पर जेल की यात्रा लगी रहती है चाहे मौत और अपहरण का मामला हो या धोखाधड़ी और यहां तक ​​कि बलात्कार के अपराधों के लिए भी।
दरसल भारत के दर्शकों को यह सब देखने की अब आदत सी हो गई है। भारतीय न्यूज़ चैनल्स भी इस रेस में पीछे नहीं हैं कुछ चीज़ो को समझाने के लिए पूरा विसुअल ग्राफ़िक्स दिखा डालते हैं जिसमे कूट-कूट कर ऊटपटान बाते की जाती हैं । इन सभी का बढ़ता कारण इन् कार्यक्रमों की TRP है जो की नार्मल कार्यक्रमों के मुताबिक काफी ज़ादा है।
तो आपको को कैसे कार्यक्रम पसंद है - ऊटपटान या नार्मल लौ TRP वाले?


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