सत्ता पाने के लिए हाल के दौर में हर बड़ी पार्टी को भी प्रादेशिक पार्टी का सहारा लेना पड़ता है। इस का उत्तम उदाहरण हाल में त्रिपुरा में कांग्रेस ने इंडिजेनस नेशनलिस्ट पार्टी ऑफ़ त्रिपुरा के साथ किया हुआ गठबंधन है। 2012 में इस पार्टी को विधानसभा चुनाव में सफलता मिली थी पर 2018 में इस के कोई भी प्रत्याशी जीत नहीं पाए थे। यह बात समाज के परे है की आखिर कांग्रेस ने क्या सोच के इस पार्टी के साथ चुनाव लड़ने का फैसला किया। हो सकता है की पहले से वो कांग्रेस के साथ गठबंधन में है तो उसी रिश्ते को निभाते हुए यह फैसला लिया गया हो।
कांग्रेस के लिए अभी जरूरी है की जितना भी हो सके प्रादेशिक पक्षों का सहारा ले और चुनाव में एक बड़े पक्ष के तौर पर उभरकर दीखाये क्यों की पिछले कुछ सालो में उस ने अपनी प्रतिभा के अनुसार चुनाव में प्रदर्शन नहीं किया है। उधर प्रादेशिक पक्षों के लिए भी यह अच्छा मौक़ा है की वो अपना वजूद दिखाए और सत्ता की और अग्रेसर हो। इन सबा बातो को देखते यह गठबंधन कोई बड़ी बात नहीं दीखती। वैसे इस पक्ष ने कुछ खा प्रदर्शन नहीं किया है पिछले चुनाव में तो ऐसी उम्मीद नहीं की जा सकती की कांग्रेस की जीत इस गठबंधन से पक्की हो जाएगी। पर हाँ उसे कुछ सीटों का फ़ायदा जरूर मिल सकता है।
(Courtesy : Tripura Daily )