क्या आप बता सकते हैं क्यों मानते हैं यूथ डे ? - Letsdiskuss
LOGO
गेलरी
प्रश्न पूछे

Rohit Valiyan

Cashier ( Kotak Mahindra Bank ) | पोस्ट किया 11 Jan, 2019 |

क्या आप बता सकते हैं क्यों मानते हैं यूथ डे ?

pooja mishra

Content writer | पोस्ट किया 12 Jan, 2019

ब्रह्माण्ड की सारी शक्तियां पहले से हमारी हैं , वो हमीं हैं जो अपनी आँखों पर हाँथ रख लेते हैं और फिर रोते हैं कि कितना अन्धकार है! - स्वामी विवेकानंद




हर साल 12 जनवरी के दिन स्वामी विवेकानंद के जन्मदिवस को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता हैं | जिसका कारण हैं की स्वामी विवेकानंद हमेशा से ही अद्भुत अनोखे , और श्रेष्ठ विचारो वाले पुरूष माने जाते थे , और स्वामी विवेकानंद ने हमेशा ही अपने अलौकिक विचार और आदर्शो का पालन किया हैं, और भारत के साथ-साथ अन्य देशों में भी अपने विचार सभी युवा पीढ़ियों में स्थापित किया हैं |  

स्वामी विवेकानंद एक आध्यात्मिक गुरु होने के साथ साथ समाज सुधारक भी थे, वे हमेशा से युवाओं के प्रेरणास्रोत रहे | 12 जनवरी 1863 को कलकत्ता में जन्मे स्वामी विवेकानंद ने भारत की ओर से सनातन धर्म का प्रतिनिधित्व करने के साथ साथ वेदांत दर्शन का प्रसार प्रचार पुरे विश्व में किया तथा समाज के सेवा कार्य के लिए रामकृष्ण मिशन की स्थापना की |

किसी भी देश का कल और सुनहरा भविष्य युवा पीड़ी को माना जाता हैं क्योकि युवा पीड़ी में हमेशा ही एक नयी ताज़गी और कुछ नया करने की काबिलियत होती हैं , यह बात सोच कर स्वामी विवेकानंद जी ने अँग्रेज़ काल शासन के वक़्त से ही युवाओ की सोच को बढ़ावा दिया |
सन् 1897 में मद्रास में युवाओं को संबोधित करते हुए स्वामी विवेकानंद ने कहा था की उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य की प्राप्ति ना हो जाये| स्वामी विवेकानंद ने कहा युवाओं की अहं की भावना को खत्म करना चाहिए और हमेशा यह सोचना चाहिए की यदि सफल होना चाहते हो, तो पहले ‘अहं’ को नाश कर डालो |  

आपको स्वामी विवेकानंद के कुछ सुविचारों से परिचय कराते हैं -

- “जब तक जीना, तब तक सीखना” अनुभव ही जगत में सर्वश्रेष्ठ शिक्षक हैं।

- जब तक आप खुद पर विश्वास नहीं करते तब तक आप भागवान पर विश्वास नहीं कर सकते।
जैसा तुम सोचते हो, वैसे ही बन जाओगे। खुद को निर्बल मानोगे तो निर्बल और सबल मानोगे तो सबल ही बन जाओगे।

- यदि स्वयं में विश्वास करना और अधिक विस्तार से पढ़ाया और अभ्यास कराया गया होता, तो मुझे यकीन है कि बुराइयों और दुःख का एक बहुत बड़ा हिस्सा गायब हो गया होता।

- सत्य को हज़ार तरीकों से बताया जा सकता है, फिर भी हर एक सत्य ही होगा|

- विश्व एक व्यायामशाला है जहाँ हम खुद को मजबूत बनाने के लिए आते हैं|