धनतेरस की चमक सिर्फ़ बाज़ारों और सोने-चाँदी की दुकानों में नहीं होती, बल्कि उन कहानियों में भी होती है जो पीढ़ियों से दादी-नानी सुनाती आई हैं। इस दिन से जुड़ी दो कथाएँ सबसे अधिक प्रसिद्ध हैं, और दोनों ही बताती हैं कि इस पर्व को स्वास्थ्य, धन और सुरक्षा से क्यों जोड़ा जाता है।
धन्वंतरि की कथा
पौराणिक मान्यता के अनुसार समुद्र मंथन के समय भगवान धन्वंतरि हाथ में अमृत कलश लेकर प्रकट हुए। उन्हें आयुर्वेद का देवता और देवताओं का वैद्य माना जाता है, इसलिए धनतेरस को धन्वंतरि जयंती के रूप में भी जाना जाता है। इस कथा के कारण इस दिन स्वास्थ्य को सबसे बड़ा धन मानकर उनकी पूजा की जाती है।
राजकुमार और यमराज की कथा
लोककथा के अनुसार एक राजा के पुत्र की कुंडली में विवाह के चौथे दिन सर्पदंश से मृत्यु का योग लिखा था। उसकी नवविवाहिता पत्नी ने उस रात घर के द्वार पर दीपक, गहने और सोने-चाँदी के सिक्के रख दिए और जागते हुए गीत तथा कहानियाँ सुनाती रही। जब यमराज साँप के रूप में पहुँचे तो उन आभूषणों की चमक से उनकी आँखें चौंधिया गईं, और वे कथा-गीत सुनते हुए ही रात बिताकर लौट गए। इस तरह राजकुमार के प्राण सुरक्षित बच गए।
यमदीपदान की परंपरा
इस कथा के कारण धनतेरस की संध्या पर घर के बाहर यम के नाम का दीपक जलाने की परंपरा चली, जिसे यमदीपदान कहा जाता है। मान्यता है कि इससे परिवार को अकाल मृत्यु के भय से सुरक्षा मिलती है।
लक्ष्मी पूजन से संबंध
धनतेरस का संबंध दिवाली के पाँच दिवसीय उत्सव की शुरुआत से है, और वर्ष 2026 में यह शुक्रवार, 6 नवंबर को है। इस दिन भगवान धन्वंतरि और माता लक्ष्मी दोनों का पूजन किया जाता है, जिससे यह पर्व स्वास्थ्य और समृद्धि दोनों का प्रतीक बन गया है।
खरीदारी की परंपरा
धनतेरस पर नए बर्तन, सोना, चाँदी या कोई नई वस्तु ख़रीदना शुभ माना जाता है। इसका कारण यह विश्वास है कि इस दिन ख़रीदी गई चीज़ घर में समृद्धि लाती है। परिवार के साथ बैठकर यह कथा सुनना इस पर्व की मधुर परंपरा भी है।
कथाओं का संदेश
पहली कथा बताती है कि स्वास्थ्य सबसे बड़ी पूँजी है।
दूसरी कथा सिखाती है कि बुद्धिमानी और सतर्कता संकट को टाल सकती है।
दोनों मिलकर बताती हैं कि दिवाली की रोशनी की शुरुआत सुरक्षा और कल्याण की कामना से होती है।
सरल पूजा की झलक
शाम को घर के द्वार पर दीपक जलाएँ, कलश या बर्तन की पूजा करें और भगवान धन्वंतरि को स्मरण करें। यह सरल पूजा श्रद्धा और परिवार के सुख का भाव देती है।


