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ravi singh· 5 years ago
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जंतर मंतर (भारत) किस उद्देश्य के लिए बनाया गया था?

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जंतर मंतर का निर्माण समय मापने, सूर्य, चंद्रमा, ग्रहों और तारों की स्थिति का अध्ययन करने तथा खगोलीय घटनाओं का सटीक अनुमान लगाने के लिए किया गया था। यह भारत की एक ऐतिहासिक खगोलीय वेधशाला (Astronomical Observatory) है, जिसे महाराजा सवाई जय सिंह द्वितीय ने 18वीं शताब्दी में बनवाया था।

जंतर मंतर जयपुर की वेधशाला, जिसका निर्माण समय मापने और खगोलीय घटनाओं का अध्ययन करने के लिए किया गया था।

जंतर मंतर में खगोलीय घटनाओं का अध्ययन किया जाता था। यदि आप आकाश में दिखाई देने वाली एक रोचक प्राकृतिक घटना के बारे में जानना चाहते हैं, तो "किस देश में हरा सूर्य दिखाई देता है?" विषय पर हमारा विस्तृत लेख भी पढ़ सकते हैं। इसमें इस दुर्लभ घटना के पीछे का वैज्ञानिक कारण सरल भाषा में समझाया गया है।

जंतर मंतर के मुख्य उद्देश्य

  • समय का सटीक निर्धारण करना।

  • सूर्य, चंद्रमा, ग्रहों और तारों की स्थिति का अध्ययन करना।

  • ग्रहण जैसी खगोलीय घटनाओं का अनुमान लगाना।

  • पंचांग (हिंदू कैलेंडर) तैयार करने में सहायता करना।

  • खगोल विज्ञान (Astronomy) से संबंधित वैज्ञानिक गणनाएँ करना।

जंतर मंतर कहाँ-कहाँ बनाया गया था?

महाराजा सवाई जय सिंह द्वितीय ने भारत के पाँच प्रमुख शहरों में जंतर मंतर का निर्माण कराया था:

  • दिल्ली

  • जयपुर

  • उज्जैन

  • वाराणसी

  • मथुरा

इनमें जयपुर का जंतर मंतर सबसे बड़ा और सबसे अच्छी तरह संरक्षित वेधशाला है। इसकी ऐतिहासिक और वैज्ञानिक महत्ता को देखते हुए इसे यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल (UNESCO World Heritage Site) का दर्जा दिया गया है।

जंतर मंतर में कौन-कौन से यंत्र हैं?

जंतर मंतर में कई खगोलीय यंत्र बनाए गए हैं, जिनका उपयोग अलग-अलग प्रकार की गणनाओं के लिए किया जाता था। इनमें सबसे प्रसिद्ध सम्राट यंत्र है, जिसे दुनिया की सबसे बड़ी पत्थर की सूर्य घड़ियों (Sundials) में से एक माना जाता है। इसकी सहायता से उस समय अत्यंत सटीक समय मापा जाता था।

जंतर मंतर का महत्व

जंतर मंतर केवल एक ऐतिहासिक स्मारक नहीं है, बल्कि यह भारत की प्राचीन वैज्ञानिक सोच, गणित और खगोल विज्ञान की उन्नत समझ का प्रतीक भी है। यह दर्शाता है कि आधुनिक उपकरणों के आने से पहले भी भारतीय वैज्ञानिक आकाशीय पिंडों का अध्ययन अत्यंत सटीक तरीके से करते थे।

आज जंतर मंतर एक प्रमुख पर्यटन स्थल होने के साथ-साथ इतिहास, विज्ञान और वास्तुकला में रुचि रखने वाले लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र है।

निष्कर्ष

जंतर मंतर का निर्माण समय मापने, ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति जानने, खगोलीय घटनाओं का अध्ययन करने और पंचांग तैयार करने के उद्देश्य से किया गया था। यह भारत की वैज्ञानिक विरासत और खगोल विज्ञान में प्राचीन उपलब्धियों का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है, जो आज भी दुनिया भर के लोगों को आकर्षित करता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न: जंतर मंतर किसने बनवाया था?
उत्तर: जंतर मंतर का निर्माण महाराजा सवाई जय सिंह द्वितीय ने 18वीं शताब्दी में कराया था।

प्रश्न: जंतर मंतर का मुख्य उद्देश्य क्या था?
उत्तर: समय मापना, ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति जानना, ग्रहण का अनुमान लगाना और खगोलीय अध्ययन करना।

प्रश्न: भारत में जंतर मंतर कहाँ-कहाँ स्थित हैं?
उत्तर: दिल्ली, जयपुर, उज्जैन, वाराणसी और मथुरा।

प्रश्न: जंतर मंतर का सबसे प्रसिद्ध यंत्र कौन-सा है?
उत्तर: सम्राट यंत्र, जिसका उपयोग सटीक समय मापने के लिए किया जाता था।

प्रश्न: जयपुर का जंतर मंतर क्यों प्रसिद्ध है?
उत्तर: यह सबसे बड़ा जंतर मंतर है और इसे यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल का दर्जा प्राप्त है।

स्रोत & Reference:

Answered by
Tara Verma
Tara Vermaमुझे भारत के इतिहास, संस्कृति और पुरानी धरोहरों के बारे में नई बातें जानना पसंद है।
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Tara Verma is a practising teacher and education content writer with over 10 years of classroom experience across primary and secondary levels. She holds a Master's degree in Education (M.Ed.) from Delhi University and a Bachelor of Education (B.Ed.) from Jamia Millia Islamia — qualifications that ground her writing in both pedagogical theory and the day-to-day realities of teaching in India. Her content covers exam preparation strategies, learning methodologies, curriculum guidance, student mental health, career counselling for students, and the evolving state of school and higher education in India. Her work has appeared on platforms including TeacherVision India, Jagran Josh, and Careers360, where she writes for students, parents, and fellow educators who need content built on actual teaching experience — not theory alone. Over a decade of working directly with students across age groups and learning levels has given Tara a practical understanding of how education content should be written — clearly, accessibly, and with genuine awareness of the challenges students and teachers face on the ground. She has taught 1,000+ students, contributed to school curriculum development initiatives, and published 250+ articles on education across digital platforms. She is an active member of the National Council of Teachers of English (NCTE) India. Across all her writing, every recommendation is classroom-tested, every insight comes from direct teaching experience, and every article is held to the same standard she applies in her own classroom — accuracy, clarity, and genuine usefulness for the reader.

Updated on07/23/26
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जयपुर और दिल्ली का जंतर मंतर दोनों ही खगोलीय वेधशालाएं हैं। वेधशाला का प्राथमिक उद्देश्य खगोलीय तालिकाओं को संकलित करना और सूर्य, चंद्रमा और ग्रहों के समय और चाल की भविष्यवाणी करना था। आजकल इन उद्देश्यों में से कुछ को खगोल विज्ञान के रूप में वर्गीकृत किया जाएगा।



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Updated on02/17/21
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