क्या देश की इकॉनमी का जिम्मा शराबियों के कंधों पर टिक चुका है? - letsdiskuss
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pravesh chuahan,BA journalism & mass comm | पोस्ट किया |


क्या देश की इकॉनमी का जिम्मा शराबियों के कंधों पर टिक चुका है?


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pravesh chuahan,BA journalism & mass comm | पोस्ट किया


एक समय था जब शराबी व्यक्ति को देखकर लोग उससे दूर रहते थे.उससे बात करना नहीं पसंद करते थे.क्योंकि  शराबियों को देखकर ऐसा लगता है कि वह कुछ भी बोल सकते हैं. कुछ भी उठा कर मार सकते हैं.जिस वजह से उनको लोग पागल भी समझते होंगे.  उनके पास जाना भी जान जोखिम में डालना समझते थे. मगर अब हालात बिल्कुल बदल चुके हैं आज उन्ही  घर में शराब पीकर हिंसा करने वाले, सड़कों पर लोटपोट होकर गिरने वाले शराबियों के दम पर देश की तिजोरी भरने का काम हो रहा है़. आज से हर शराबियों के पास लोगों को देने के लिए करारा जवाब है वह कह सकता लाकडाउन के समय में सरकारे हम शराबीयों पर निर्भर थी. हम लोगों की बदौलत ही सरकारी खजाने को भरा गया था.



शराब की बिक्री पर दिल्ली की सरकार ने 70% एमआरपी रेट बढ़ा दिया है मगर ऐसा मत समझना कि शराब की बिक्री में कोई कमी आएगी.मीडिया की तमाम रिपोर्ट्स के मुताबिक शराब लेने के लिए सुबह से ही लोग लाइन में लगे हुए हैं ऐसा लगता है जैसे लोगों को फ्री में शराब मिल रही है शराब का लंगर चल रहा है़.जिस वजह से लोग लाइन में लगे हुए हैं देखकर तो यही लगता है. सबसे अहम बात यह है कि जब ढील देने की बात की गई तो सबसे पहले शराब का नाम आया. बहुत से लोग यह सोच रहे होंगे कि आखिर शराब में ढील देने की वजह से सरकार को किताना  मुनाफा होगा.मगर यहां पर यह बात समझना बहुत जरूरी है कि सरकार को सबसे ज्यादा फायदा शराब से आने वाले टैक्स की वजह से होता है.


दिल्ली सरकार द्वारा शराब बिक्री पर 70 फीसदी टैक्स लगाए जाने पर एक शख्स ने कहा है कि 'टैक्स बढ़ने पर किसी को कोई दुख नहीं है. ये देश के लिए हमारी तरफ से एक तरह का दान है. हर शराबी शराब को खरीदने में देश के लिए दान समझ रहा है. यह बात केवल वही कह सकता है जो पक्का शराबी होगा.


दरअसल राज्यों के लिए शराब से कमाई इसलिए भी बेहद अहम है क्योंकि अन्य टैक्सों में केंद्र सरकार की भी हिस्सेदारी होती है. लेकिन शराब पर लगने वाले स्टेट एक्साइज में उनका अकेले का हक होता है.प्रॉपर्टी टैक्स, स्टांप ड्य़ूटी की बिक्री आदि अन्य ऐसे माध्यम हैं, जिनसे राज्य सरकारें राजस्व जुटाती हैं, लेकिन शराब से होने वाली कमाई सबसे अहम है.

शराब से प्राप्त होने वाले टैक्स से किन राज्यों को प्रतिवर्ष कितना मुनाफा होता है ?

वित्त वर्ष 2018-19 की बात करें तो उत्तर प्रदेश को देश में सबसे ज्यादा कमाई शराब की बिक्री के जरिए हुई थी.यूपी सरकार को शराब की सेल से 25,100 करोड़ रुपये की कमाई हुई थी.

 दूसरे नंबर पर कर्नाटक राज्य था जिसे 19,750 करोड़ रुपये की कमाई इसके जरिए हुई थी.

 महाराष्ट्र को 15,343.08 करोड़ रुपये की कमाई हुई थी.

 पश्चिम बंगाल राज्य को शराब की सेल से 10,554.36 करोड़ रुपये की कमाई हुई थी.

और 5वे नंबर पर तेलंगाना था, जिसे 10,313 करोड़ रुपये की कमाई हुई.

2016 में तमिलनाडु को सबसे ज्यादा 29,672 करोड़ रुपये की कमाई शराब से मिले टैक्स के जरिए हुई थी.

2016 में दूसरे नंबर पर हरियाणा राज्य था, जिसे शराब की बिक्री से 19,703 करोड़ रुपये का राजस्व मिला था.

(2016)आंध्र प्रदेश को 12,739 करोड

(2016) मध्य प्रदेश को 7,926 करोड़ रुपये.

(2016)राजस्थान को 5,585 करोड़ रुपये की रकम मिली थी.

(2016) पंजाब को शराब की सेल से 5,000 करोड़ रुपये की कमाई हुई थी.


हजारों करोड का फायदा होने की वजह से लॉक डाउन में ढील देते ही सबसे पहले शराब के ठेकों को खोलने की अनुमति दी गई थी ताकि राज्य सरकारें अपने खजाने को भर सके और राज्य में मौजूद अपने कर्मचारियों को वेतन देने के सक्षम हो सकें. राज्यों की सरकारों का कहना है कि  अगर ऐसा ही चलता रहा तो हम अपने कर्मचारियों को तनख्वाह कहां से देंगे इसलिए शराब से आने वाले टैक्स की वजह से राज्य की सरकार है काफी हद तक अपनी तिजोरी को भरने में कामयाब हो जाएगी.



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