ऑनिकोफेजिया, यह नाम कुछ अटपटा सा है पर यह समस्या कई लोगों को रहती है। सरल भाषा में इसे नाखून चबाना या नेल-बाइटिंग कह सकते हैं। तनाव या एक्साइटमेंट के समय नाखून काटना या चबाना आम है। कुछ लोग खाली बैठे हुए या बोर होते हुए भी दांतों से नाखून चबाने लगते हैं।
आश्चर्य तो यह है कि लोग इसे बिना महसूस किए करते जाते हैं। कुछ काम करते हुए जैसे किताब पढ़ते, फोन पर बातें करते, टीवी देखते हुए भी नाखून काटने में व्यस्त रहते हैं। नाखून चबाने का मतलब सिर्फ नाखून चबाने से नहीं है बल्कि क्यूटिकल्स और नाखून के इर्द-गिर्द वाले सॉफ्ट टिश्यू को भी दांतों से चबा जाना है।
नाखून चबाने वाले को कई समस्या हो सकती हैं
इससे फिंगरटिप्स लाल हो सकते हैं।
क्यूटिकल्स से खून निकल सकता है, जिससे कभी-कभी बहुत दर्द हो जाता है।
नेलबेड्स के इर्द-गिर्द इंफेक्शन हो जाता है।
मुंह में भी इंफेक्शन हो सकता है।
दांतों की समस्या भी हो जाती है।
लंबे समय तक यदि यह समस्या रहती है तो नाखूनों के बढ़ने में दिक्कत आ जाती है।
नाखून हमेशा के लिए आड़े-तिरछे हो सकते हैं।
आदत से छुटकारा
अपने नाखूनों को नियमित तौर पर काटते रहिए। साथ में फाइलिंग भी जरूरी है। न नाखून बढ़ा रहेगा, न आप चबा पाएंगे। बच्चों के साथ भी ऐसा ही कीजिए।
तनाव को मैनेज करना सीखिए क्योंकि नेल-बाइटिंग का कारण तनाव भी होता है।
एक रिकॉर्ड मेनटेन करें कि पूरे दिन में कितनी बार आप नाखून मुंह में लेते हैं। इससे आपकी आदत में कम आएगी।
यदि आपके बच्चे को यह दिक्कत है तो उससे बातें करें। संभव है कि कोई बात उसको परेशान कर रही हो और उसकी वजह से वह मुंह में नाखून ले रहा हो।