प्लास्टिक प्रदूषण आज दुनिया की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक है। यह न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचाता है बल्कि जानवरों, समुद्र और हमारी सेहत पर भी बुरा असर डालता है।
प्लास्टिक सैकड़ों साल तक सड़ता नहीं है इसलिए इसे अपने जीवन से दूर करना जरूरी है ।
प्लास्टिक का अधिक इस्तेमाल करने से इसका प्रदूषण भी फैलता है जिस कारण से धरती और समुद्र दोनों प्रदूषित हो रहे हैं।
दरअसल धरती पर यहां-वहां प्लास्टिक सालों साल पड़े रहते हैं। यही प्लास्टिक की जब कचरे के रूप में समुद्र में चला जाता है तो वहां के जीव जंतुओं के लिए सबसे बड़ा खतरा होता।
पहले उपाय प्लास्टिक को करें बाय-बाय
रोजमर्रा की जिंदगी में सिंगल यूज प्लास्टिक जैसे थैले, बोतल, स्ट्रॉ और पैकेजिंग से बचें।
बाजार जाते समय कपड़े का थैला ले जाएं। पानी पीने के लिए स्टील या कॉपर की बोतल इस्तेमाल करें।
खाने-पीने की चीजें पैक कराने के बजाय अपने डिब्बे ले जाएं।
दूसरा तरीका है रिसाइक्लिंग
इस्तेमाल किए गए प्लास्टिक को कूड़े में न फेंकें। इसे अलग करके रिसाइकलिंग के लिए दें।
कई शहरों में प्लास्टिक कलेक्शन सेंटर होते हैं। घर पर भी प्लास्टिक की बोतलों से गमले, पेन स्टैंड या अन्य उपयोगी चीजें बना सकते हैं। इससे नया प्लास्टिक कम बनेगा। इस वजह से प्लास्टिक की खपत कम हो जाएगी।
तीसरा जरूरी कदम लोगों में जागरूकता फैलाना
प्लास्टिक से होने वाले प्रदूषण के प्रति लोगों में जागरूकता फैलाना बहुत जरूरी है। इसके लिए हम अपने परिवार, दोस्तों और पड़ोसियों को बताएं कि प्लास्टिक कितना नुकसानदायक है।
स्कूलों और कॉलेजों में कार्यक्रम आयोजित करें।
सोशल मीडिया पर भी सही जानकारी साझा करें। जब ज्यादा लोग समझेंगे तो बदलाव आएगा।
सरकार और कंपनियों की भी भूमिका है। सरकार को सख्त कानून बनाने चाहिए ताकि प्लास्टिक का उत्पादन और इस्तेमाल कम हो। कंपनियों को बायोडिग्रेडेबल पैकेजिंग अपनानी चाहिए। हम उपभोक्ता के रूप में उन कंपनियों को चुनें जो पर्यावरण हित वाली इको फ्रेंडली पैकेजिंग के सामान इस्तेमाल करती है।
घर और आसपास साफ-सफाई रखें। नाले, नदियों और समुद्र के किनारे प्लास्टिक न फेंकें। समुद्र की सफाई के कैम्पेन में भाग लें। पेड़ लगाएं क्योंकि हरे-भरे जंगल पर्यावरण को स्वस्थ रखते हैं।
खाने की बर्बादी भी कम करें क्योंकि खाने की पैकेजिंग में बहुत प्लास्टिक लगता है। लोकल और मौसमी फल-सब्जियां खरीदें। इससे पैकेजिंग कम होती है।
खास सुझाव
अगर हर व्यक्ति छोटी-छोटी कोशिश करे तो बड़ा बदलाव आ सकता है। प्लास्टिक प्रदूषण कम करने के लिए हमें “रिड्यूस, रियूज और रिसाइकल” के सिद्धांत को अपनाना होगा। यानी इस्तेमाल कम करें, फिर से इस्तेमाल करें और रिसाइकल करें।
प्लास्टिक प्रदूषण कम करना हम सबकी जिम्मेदारी है। अगर आज हम सही कदम उठाएंगे तो आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ और सुरक्षित पर्यावरण मिलेगा। छोटी आदतें बदलने से ही बड़ा फर्क पड़ता है। आइए, मिलकर इस समस्या का समाधान करें।
प्रमुख सोर्स लिंक
https://www.unep.org/en/what-we-do/chemicals-and-pollution-action/plastic-pollution
https://www.oecd.org/en/topics/sub-issues/plastics.html?hl=hi-IN
45@abhinavkumar4574





