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Setu Kushwaha· 4 साल पहले
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प्लास्टिक प्रदूषण को कैसे कम किया जा सकता है?

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अपडेट किया गया10/21/26

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प्लास्टिक प्रदूषण आज दुनिया की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक है। यह न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचाता है बल्कि जानवरों, समुद्र और हमारी सेहत पर भी बुरा असर डालता है।

प्लास्टिक सैकड़ों साल तक सड़ता नहीं है इसलिए इसे अपने जीवन से दूर करना जरूरी है ।

प्लास्टिक का अधिक इस्तेमाल करने से इसका प्रदूषण भी फैलता है जिस कारण से धरती और समुद्र दोनों प्रदूषित हो रहे हैं।

दरअसल धरती पर यहां-वहां प्लास्टिक सालों साल पड़े रहते हैं। यही प्लास्टिक की जब कचरे के रूप में समुद्र में चला जाता है तो वहां के जीव जंतुओं के लिए सबसे बड़ा खतरा होता।

पहले उपाय प्लास्टिक को करें बाय-बाय

  • रोजमर्रा की जिंदगी में सिंगल यूज प्लास्टिक जैसे थैले, बोतल, स्ट्रॉ और पैकेजिंग से बचें।

  • बाजार जाते समय कपड़े का थैला ले जाएं। पानी पीने के लिए स्टील या कॉपर की बोतल इस्तेमाल करें।

  • खाने-पीने की चीजें पैक कराने के बजाय अपने डिब्बे ले जाएं।

दूसरा तरीका है रिसाइक्लिंग

  • इस्तेमाल किए गए प्लास्टिक को कूड़े में न फेंकें। इसे अलग करके रिसाइकलिंग के लिए दें।

  • कई शहरों में प्लास्टिक कलेक्शन सेंटर होते हैं। घर पर भी प्लास्टिक की बोतलों से गमले, पेन स्टैंड या अन्य उपयोगी चीजें बना सकते हैं। इससे नया प्लास्टिक कम बनेगा। इस वजह से प्लास्टिक की खपत कम हो जाएगी।

तीसरा जरूरी कदम लोगों में जागरूकता फैलाना

प्लास्टिक से होने वाले प्रदूषण के प्रति लोगों में जागरूकता फैलाना बहुत जरूरी है। इसके लिए हम अपने परिवार, दोस्तों और पड़ोसियों को बताएं कि प्लास्टिक कितना नुकसानदायक है।

  • स्कूलों और कॉलेजों में कार्यक्रम आयोजित करें।

  • सोशल मीडिया पर भी सही जानकारी साझा करें। जब ज्यादा लोग समझेंगे तो बदलाव आएगा।

  • सरकार और कंपनियों की भी भूमिका है। सरकार को सख्त कानून बनाने चाहिए ताकि प्लास्टिक का उत्पादन और इस्तेमाल कम हो। कंपनियों को बायोडिग्रेडेबल पैकेजिंग अपनानी चाहिए। हम उपभोक्ता के रूप में उन कंपनियों को चुनें जो पर्यावरण हित वाली इको फ्रेंडली पैकेजिंग के सामान इस्तेमाल करती है।

  • घर और आसपास साफ-सफाई रखें। नाले, नदियों और समुद्र के किनारे प्लास्टिक न फेंकें। समुद्र की सफाई के कैम्पेन में भाग लें। पेड़ लगाएं क्योंकि हरे-भरे जंगल पर्यावरण को स्वस्थ रखते हैं।

  • खाने की बर्बादी भी कम करें क्योंकि खाने की पैकेजिंग में बहुत प्लास्टिक लगता है। लोकल और मौसमी फल-सब्जियां खरीदें। इससे पैकेजिंग कम होती है।

खास सुझाव

अगर हर व्यक्ति छोटी-छोटी कोशिश करे तो बड़ा बदलाव आ सकता है। प्लास्टिक प्रदूषण कम करने के लिए हमें “रिड्यूस, रियूज और रिसाइकल” के सिद्धांत को अपनाना होगा। यानी इस्तेमाल कम करें, फिर से इस्तेमाल करें और रिसाइकल करें।

प्लास्टिक प्रदूषण कम करना हम सबकी जिम्मेदारी है। अगर आज हम सही कदम उठाएंगे तो आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ और सुरक्षित पर्यावरण मिलेगा। छोटी आदतें बदलने से ही बड़ा फर्क पड़ता है। आइए, मिलकर इस समस्या का समाधान करें।

प्रमुख सोर्स लिंक

https://www.unep.org/en/what-we-do/chemicals-and-pollution-action/plastic-pollution

https://www.oecd.org/en/topics/sub-issues/plastics.html?hl=hi-IN

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Abhishek kant
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Abhishek Kant Educator | Journalist | Writer About Me / परिचय Master of Journalism & Mass Communication (MJMC) degree holder with extensive experience in journalism, teaching, and content writing. Passionate about sharing knowledge, telling impactful stories, and inspiring others through meaningful content. मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री के साथ पत्रकारिता, अध्यापन और कंटेंट राइटिंग का समृद्ध अनुभव। अपने लेखन और शिक्षण के माध्यम से लोगों तक सही जानकारी और विचार साझा करना ही मेरी प्रेरणा है।

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अपडेट किया गया10/23/26

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प्लास्टिक प्रदूषण कम करने का सबसे असरदार क्रम है: पहले इस्तेमाल घटाएँ, फिर दोबारा इस्तेमाल करें, और सबसे आखिर में रीसायकल करें। घर में कचरा अलग-अलग करें, कपड़े का थैला और स्टील की बोतल साथ रखें, और सिंगल-यूज़ प्लास्टिक खरीदना बंद करें। यही तीन आदतें आपके हिस्से का प्लास्टिक कचरा सबसे ज़्यादा घटाती हैं।

समस्या कितनी बड़ी है?

UNEP (संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम) के अनुसार दुनिया में हर साल 40 करोड़ टन से ज़्यादा प्लास्टिक बनता है। इसका बड़ा हिस्सा एक बार इस्तेमाल होकर कचरे में चला जाता है।

OECD के अनुमान में अब तक सिर्फ़ लगभग 9% प्लास्टिक कचरा ही रीसायकल हो पाया है। बाकी लैंडफिल में दबता है, जलाया जाता है, या नदी-नालों से होता हुआ समुद्र तक पहुँच जाता है।

भारत में भी हालात आसान नहीं हैं। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आँकड़ों में देश हर साल लगभग 35 लाख टन प्लास्टिक कचरा पैदा करता है, और असली मात्रा इससे ज़्यादा मानी जाती है।

शुरुआत यहाँ से करें: एक हफ़्ते का "प्लास्टिक ऑडिट"

ज़्यादातर लेख सीधे टिप्स गिनाने लगते हैं। मेरी सलाह है कि पहले यह पता करें कि आपके घर से प्लास्टिक असल में कहाँ से आता है।

सात दिन तक एक डिब्बे में हर प्लास्टिक रैपर, थैली और बोतल जमा करें। हफ़्ते के आख़िर में छाँटें। आप देखेंगे कि ज़्यादातर कचरा 4-5 चीज़ों से आता है: दूध के पैकेट, किराने की थैलियाँ, बिस्किट-नमकीन के रैपर, शैंपू-मसाले के सैशे और पैक्ड पानी।

अब आपको पता है कि कहाँ से शुरू करना है। सबसे बड़े ढेर वाली चीज़ का विकल्प पहले ढूँढें।

घर पर करने लायक आसान बदलाव

  • कपड़े या जूट का थैला बैग, स्कूटर या गाड़ी में हमेशा रखें। आदत यही पक्की करनी है।

  • स्टील या काँच की बोतल साथ रखें। रोज़ एक पानी की बोतल खरीदने पर साल में सैकड़ों बोतलें बच जाती हैं।

  • खुला सामान खरीदें। दाल, चावल, मसाले और तेल के लिए अपना डिब्बा ले जाएँ।

  • चाय-कॉफ़ी में ध्यान दें। कई टी-बैग में प्लास्टिक की जाली होती है। खुली पत्ती वाली चाय बेहतर विकल्प है।

  • सैशे की जगह बड़ा पैक लें, या रिफ़िल वाले स्टोर से शैंपू-डिटर्जेंट भरवाएँ।

  • ब्रश, कंघी और बर्तन माँजने के स्क्रब बाँस, लकड़ी या नारियल की जटा वाले चुनें।

गीला और सूखा कचरा अलग करना क्यों ज़रूरी है

प्लास्टिक जब सब्ज़ी के छिलकों और बचे खाने में सना हो, तो उसे रीसायकल करना लगभग नामुमकिन हो जाता है। गीला कचरा अलग रखें और प्लास्टिक को हल्का धोकर सूखा रखें।

सूखा प्लास्टिक अपने कबाड़ी वाले को दें या नगर निगम के संग्रह केंद्र पर जमा करें। कबाड़ी वाले भारत की अनौपचारिक रीसायकलिंग व्यवस्था की रीढ़ हैं, और उन्हें माल देना सीधा काम आता है।

रीसायकलिंग से ज़्यादा "कम करना" क्यों काम करता है

तरीका

असर

ध्यान रखने की बात

कम इस्तेमाल करना

सबसे ज़्यादा

कचरा बनता ही नहीं

दोबारा इस्तेमाल

अच्छा

डिब्बे, बोतलें, थैले बार-बार काम में लें

रीसायकल

सीमित

बहुत-सा प्लास्टिक कई बार रीसायकल नहीं हो पाता, और गुणवत्ता घटती जाती है

जलाना या दबाना

सबसे कमज़ोर

ज़हरीली गैसें और ज़मीन-पानी का प्रदूषण

माइक्रोप्लास्टिक: जो आँखों से दिखता नहीं

प्लास्टिक के पाँच मिलीमीटर से छोटे टुकड़ों को माइक्रोप्लास्टिक कहते हैं। सिंथेटिक कपड़े (पॉलिएस्टर, नायलॉन) हर धुलाई में महीन रेशे छोड़ते हैं, जो नालियों से होकर पानी में पहुँचते हैं।

आप यह कर सकते हैं:

  • कपड़े कम धोएँ और ठंडे पानी में धोएँ।

  • वॉशिंग मशीन में फ़िल्टर बैग या लिंट फ़िल्टर लगाएँ।

  • जहाँ संभव हो, सूती या लिनन जैसे प्राकृतिक कपड़े चुनें।

सरकारी नियम और व्यवस्था में बदलाव

भारत में 1 जुलाई 2022 से कुछ चिन्हित सिंगल-यूज़ प्लास्टिक वस्तुओं पर प्रतिबंध लगा, जैसे प्लास्टिक की डंडी वाले ईयरबड, प्लास्टिक के झंडे और थर्मोकोल की सजावट। प्लास्टिक कचरा प्रबंधन नियमों के तहत EPR (Extended Producer Responsibility) भी लागू है, यानी कंपनियों को अपने पैकेजिंग कचरे के संग्रह और रीसायकलिंग की ज़िम्मेदारी लेनी होती है।

वैश्विक स्तर पर प्लास्टिक संधि की बातचीत अगस्त 2025 में जिनेवा में बिना समझौते के ख़त्म हुई थी। इसकी ताज़ा स्थिति के लिए UNEP की आधिकारिक वेबसाइट देखें।

यहाँ आपकी भूमिका भी है: जिन कंपनियों की पैकेजिंग कम और रीसायकल योग्य है, उनका सामान खरीदें, और अपनी सोसायटी या मोहल्ले में कचरा अलग करने का नियम बनवाएँ।

विश्वसनीय स्रोत

  1. UNEP / संयुक्त राष्ट्र, “Beat Plastic Pollution”: हर साल 40 करोड़ टन से ज़्यादा प्लास्टिक का उत्पादन, जिसका आधा हिस्सा एक बार इस्तेमाल के लिए बना है। https://www.un.org/en/node/71013

  2. UNEP, “Answering 10 pressing questions about plastic pollution”: प्लास्टिक प्रदूषण की पृष्ठभूमि और समाधान, यानी कम इस्तेमाल और बेहतर डिज़ाइन। यह लेख UNEP की मूल कहानी का पुनर्प्रकाशन है। https://plasticactioncentre.ca/news/unep-questions-plastic-polution/

  3. OECD, Global Plastics Outlook (प्रेस विज्ञप्ति, 22 फ़रवरी 2022): केवल 9% प्लास्टिक कचरा सफलतापूर्वक रीसायकल होता है, और 2019 में कुल प्लास्टिक कचरा 35.3 करोड़ टन था। https://www.oecd.org/en/about/news/press-releases/2022/02/plastic-pollution-is-growing-relentlessly-as-waste-management-and-recycling-fall-short.html

  4. PIB (भारत सरकार), “Ban on Single Use Plastic in India” (1 जुलाई 2022): प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन (संशोधन) नियम 2021, चिन्हित सिंगल-यूज़ प्लास्टिक पर 1 जुलाई 2022 से प्रतिबंध, और EPR दिशानिर्देश (16 फ़रवरी 2022)। https://static.pib.gov.in/WriteReadData/specificdocs/documents/2022/jul/doc20227169001.pdf

  5. पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC), अधिसूचना 12 अगस्त 2021: सिंगल-यूज़ प्लास्टिक पर प्रतिबंध की मूल अधिसूचना। https://moef.gov.in/wp-content/uploads/2021/08/SUP-notification-12082021.pdf

  6. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB): भारत में प्लास्टिक कचरे के वार्षिक आँकड़े और EPR से जुड़ी जानकारी की आधिकारिक वेबसाइट। https://cpcb.nic.in

  7. UNEP की आधिकारिक वेबसाइट: वैश्विक प्लास्टिक संधि की ताज़ा स्थिति के लिए। https://www.unep.org

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अपडेट किया गया07/16/26

प्लास्टिक प्रदूषण को कम करने के लिए सबसे पहले सिंगल-यूज़ प्लास्टिक जैसे पॉलीथीन बैग, प्लास्टिक कप और स्ट्रॉ का उपयोग कम करना चाहिए। इसके स्थान पर कपड़े के बैग, स्टील या कांच की बोतलें और अन्य पर्यावरण-अनुकूल विकल्प अपनाए जा सकते हैं। प्लास्टिक कचरे को अलग करके रीसाइक्लिंग के लिए भेजना भी बहुत महत्वपूर्ण है। इसके साथ ही, लोगों को प्लास्टिक के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक करना और स्वच्छता अभियानों में भाग लेना चाहिए।

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जवाब दिया गया07/04/22

प्लास्टिक प्रदूषण को कम करने के लिए प्लास्टिक पॉलीथिन, प्लास्टिक बैग की जगह कपडे के थैले का उपयोग करे। और प्लास्टिक से बनी वस्तुओ जैसे प्लास्टिक चम्मच, प्लास्टिक कटोरी, प्लास्टिक टिफिन, प्लास्टिक बाल्टी इन सब की जगह आप स्टील कटोरी, चम्मच, स्टील की बाल्टी का इस्तेमाल करके प्लास्टिक प्रदूषण को कम किया जा सकता है। इसके अलावा प्लास्टिक बोतल पानी पीकर कही पर भी फेक देते ही जिस वजह से प्लास्टिक प्रदूषण होता है, प्लास्टिक प्रदूषण को कम करने के लिए प्लास्टिक बोतल की जगह स्टील बोतल का इस्तेमाल करे।लेख की तस्वीर

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अपडेट किया गया02/26/20

बॉलीवुड में कई ऐसी अभिनेत्रियां हैं जिन्होनें अपनी प्लास्टिक सर्जरी से खूबसूरती बढ़ाने के चक्कर में कई समय तक खुद को सुर्ख़ियों का हिस्सा बनाये रखा।सर्जरी कराकर कुछ अभिनेत्रियाँ तो खूबसूरत बन गईं, लेकिन कुछ हीरोइनों को प्लास्टिक सर्जरी का मनचाहा परिणाम नहीं मिला, जिसकी वजह से वो खूबसूरत से बदसूरत बन गईं।आज हम आपको बॉलीवुड की उन अभिनेत्रियों के बारे में बताएँगे जिन्होनें प्लास्टिक सर्जरी कराई है।

कोयना मित्रा - साल 2011 में कोइना ने नाक की सर्जरी करवाई थी, लेकिन इस सर्जरी के बाद उनकी हड्डियां सूजने लगी, जिसके बाद डॉक्टरों ने भी अपने हाथ खड़े कर दिए।जिसके बाद उनका पूरा लुक बदल गया।
आयशा टाकिया - बॉलीवुड एक्ट्रेस आयशा टाकिया ने अपनी खूबसूरती में चार चांद लगाने के लिए लिप सर्जरी और सिलिकॉन ब्रेस्ट इम्प्लांट सर्जरी कराई है।इसके बाद बहुत दिनों तक सोशल मीडिया पर यूजर्स ने उन्हें जमकर ट्रोल किया।
अनुष्का शर्मा - इस लिस्ट में एक नाम अनुष्का शर्मा कोहली का भी है।एक्ट्रेस अनुष्‍का शर्मा ने फिल्म रब ने बना दी जोड़ी से अपने करियर की शुरुआत की थी और फिल्म सुपरहित रही और वो घर-घर में फेमस हो गई।मगर कुछ समय बाद अनुष्का ने लिप एनहेन्समेंट कराया, जिसके चलते उन्होंने खूब सुर्खियां बटोरी। उनके लिप्स को सोशल मीडिया पर “डक लिप्स” बोलकर ट्रोल भी किया गया।
सोफिया हयात - हयात ने लिप सर्जरी करवाई, लेकिन उनकी सर्जरी धीरे- धीरे ख़राब होने लगी और होठ भद्दे दिखने लगे।अब उनका पूरा चेहरा आर्टिफिशियल लगने लगा है जिससे उनके चेहरे की रंगत पूरी तरह बदल गयी।



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जवाब दिया गया06/25/22

. प्लास्टिक प्रदूषण को कम किया जा सकता है जैसे प्लास्टिक से बने बैग का इस्तेमाल एक से अधिक बार करना चाहिए। बाजार जाते समय कपड़े या कागज का बैग लेकर जाना चाहिए।

. ऐसे प्लास्टिक के इस्तेमाल से बचना चाहिए जिसे एक बार इस्तेमाल करने के बाद फेंकना पड़े जैसे प्लास्टिक के पतले ग्लास इसे एक बार इस्तेमाल करके फेंक दिया जाता है।

. हमें मिट्टी के बर्तनों को इस्तेमाल में लाना चाहिए इससे प्लास्टिक प्रदूषण को कम किया जा सकता है।

. प्लास्टिक की पी ई टी ई(PETE) और एचडीपीई (HDPE) इस तरह के सामान का उपयोग करना चाहिए यह प्लास्टिक आसानी से रीसायकल हो जाता है।लेख की तस्वीर

Krishna Patel
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