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Ram kumar

Updated on May 30, 2026education

क्रिया के कितने भेद होते हैं?

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Updated on May 30, 2026

हिंदी व्याकरण में क्रिया (Verb) वह शब्द होता है जो किसी कार्य के होने, करने या स्थिति को दर्शाता है। क्रिया के कई प्रकार होते हैं, जिन्हें “क्रिया के भेद” कहा जाता है।

क्रिया के मुख्य रूप से दो प्रमुख भेद माने जाते हैं:

1. सकर्मक क्रिया (Transitive Verb)

जब किसी क्रिया का प्रभाव सीधे कर्म (object) पर पड़ता है, तो उसे सकर्मक क्रिया कहते हैं।
उदाहरण:

  • राम ने खाना खाया।
  • वह किताब पढ़ता है।

इन वाक्यों में “खाना” और “किताब” कर्म हैं, जिन पर क्रिया का प्रभाव पड़ रहा है।


2. अकर्मक क्रिया (Intransitive Verb)

जब किसी क्रिया का प्रभाव किसी कर्म पर नहीं पड़ता और वाक्य में कर्म नहीं होता, तो उसे अकर्मक क्रिया कहते हैं।
उदाहरण:

  • बच्चा सो रहा है।
  • पक्षी उड़ रहा है।

इन वाक्यों में कोई सीधा कर्म नहीं है।


क्रिया के अन्य महत्वपूर्ण भेद (उपभेद):

मुख्य भेदों के अलावा क्रिया के कुछ और प्रकार भी होते हैं:

1. सहायक क्रिया (Auxiliary Verb)

जो मुख्य क्रिया की सहायता करती है।
उदाहरण: है, था, रहे हैं आदि।

2. प्रेरणार्थक क्रिया (Causative Verb)

जब कर्ता स्वयं कार्य न करके किसी और से करवाता है।
उदाहरण:

  • वह काम करवाता है।

3. संयुक्त क्रिया (Compound Verb)

जब दो क्रियाएँ मिलकर एक अर्थ देती हैं।
उदाहरण:

  • वह पढ़ने लगा।

यहां एक और रोमांचक चर्चा पढ़ें: संज्ञा किसे कहते है और इसके भेद कितने है?

React
S
Answered on Mar 8, 2023

क्रिया - वें शब्द जो किसी कार्य को करने या होने का बोध कराते है,वह क्रिया कहलाती है।

दूसरे शब्दो मे हम कह सकते है,किसी भी वाक्य में जिस शब्द से किसी कार्य यानि कि काम के बारे में पता चलता हो वह शब्द क्रिया कहलाता है।

क्रिया के कितने भेद होते है -

क्रिया के दो भेद होते है -

1. सकर्मक क्रिया

2. अकर्मक क्रिया

1. सकर्मक क्रिया -

सकर्मक का शाब्दिक अर्थ कर्म के साथ यानी कि जिसके साथ कर्म हो या जिस कार्य को करने के लिए कर्त्ता को छोड़कर कर्म पर बल पड़ता है, वह सकर्मक क्रिया कहलाता है।

दूसरे शब्दो मे,जिस क्रिया के साथ कर्म का होना आवश्यक है उसे सकर्मक क्रिया कहते हैं।

जैसे -

राहुल फल खा रहा है।

सोनिया गाना गा रही है।

2.अकर्मक क्रिया -

अकर्मक क्रिया वह क्रिया होती है जिसके साथ कर्म नहीं होता है। या फिर जहाँ पर क्रिया के व्यापार का फल कर्ता पर पड़ता है,उसे अकर्मक क्रिया कहा जाता है।

जैसे -

रानी हंसती है।

अमन खाता है।Article image

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A
Answered on Sep 26, 2020

कर्म, जाति और रचना के आधार पर क्रिया के मुख्यतः दो भेद हैं: -

1. अकर्मक क्रिया
2. सकर्मक क्रिया
1. अकर्मक क्रिया: -
अकर्मक क्रिया का अर्थ है बिना कर्म के। जिन क्रियाओं के लिए कर्म की आवश्यकता नहीं होती, उन्हें अकर्मक क्रिया कहते हैं, अर्थात् जिन क्रियाओं का कर्ता को परिणाम मिलता है, उन्हें अकर्मक क्रिया कहते हैं।
जैसे: - रोना, तैरना, सोना, रहना, मरना, चलना, दौड़ना, डरना, बैठना, आदि।
उदाहरण: -
(1) राम खेलता है।
(2) बच्चा रोता है।
उदहारण भिन्न हो सकते है लेकिन अर्थ हमेशा समाना ही रहता है इसलिए उदहारण के अर्थ पर विशेष ध्यान दे.
2. सकर्मक क्रिया: -
सकर्मक क्रिया का अर्थ है - कर्म के साथ। वह क्रिया जो कर्ता पर नहीं बल्कि कर्म को प्रभावित करती है, सकर्मक क्रिया कहलाती है।
जैसे - खाना, पढ़ना, काटना, लिखना आदि।
उदाहरण: -
(१) वह लकड़ी काटता है।
(२) सीता रोटी पकाती है।
(३) रीता खाना खा रही है।
उपयोग के आधार पर क्रिया का अंतर -
1. पूर्वकालिक क्रिया
2. सामान्य क्रिया
3. यौगिक क्रिया
4. तात्कालिक क्रिया
5. सहायक क्रिया
6. सजातीय क्रिया
7. विधि क्रिया
Note:-
ये तो हिंदी के क्रियाएं थी अगर आप अंग्रेजी में क्रिया के भेद एवं परिभाषा पढ़ना चाहते है, तो यहाँ पढ़ सकते है.
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Source:- google

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