हिंदी व्याकरण में उपसर्गों (Prefixes) की कोई एक निश्चित या पक्की संख्या नहीं है, क्योंकि हिंदी ने समय के साथ कई अलग-अलग भाषाओं के शब्दों को अपनाया है।
हालांकि, व्याकरण की किताबों के अनुसार मुख्य रूप से उपसर्गों को तीन हिस्सों में बांटा जाता है और इनकी संख्या इस प्रकार मानी गई है:
1. संस्कृत के उपसर्ग (तत्सम उपसर्ग) - 22 हिंदी में मुख्य रूप से संस्कृत के 22 उपसर्गों का इस्तेमाल होता है। परीक्षाओं में भी सबसे ज्यादा इन्हीं के बारे में पूछा जाता है।
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कुछ प्रमुख नाम: प्र, परा, अप, सम्, अनु, अव, निस्, निर्, दुस्, दुर्, वि, आ, नि, अधि, अपि, अति, सु, उत्/उद्, अभि, प्रति, परि, उप।
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उदाहरण: प्र + हार = प्रहार, आ + जीवन = आजीवन।
2. हिंदी के अपने उपसर्ग (तद्भव उपसर्ग) - लगभग 10 से 13 ये उपसर्ग संस्कृत से ही बदलकर हिंदी के अपने बन गए हैं। विद्वान इनकी संख्या 10 से 13 के बीच मानते हैं।
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कुछ प्रमुख नाम: अ, अन, क/कु, दू, नि, औ/अव, भर, सु, अध, उन, पर, बिन।
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उदाहरण: अन + पढ़ = अनपढ़, भर + पेट = भरपेट।
3. विदेशी या आगत उपसर्ग (उर्दू, फ़ारसी, अरबी) - लगभग 19 चूंकि हिंदी पर उर्दू और फ़ारसी का भी काफी प्रभाव है, इसलिए इन भाषाओं के लगभग 19 उपसर्ग हिंदी में धड़ल्ले से इस्तेमाल होते हैं।
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कुछ प्रमुख नाम: कम, खुश, ग़ैर, दर, ना, बा, बद, बे, ला, सर, हम, हर।
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उदाहरण: बे + रोज़गार = बेरोज़गार, खुश + मिज़ाज = खुशमिज़ाज।
4. अंग्रेज़ी के उपसर्ग (English Prefixes) आजकल हिंदी में अंग्रेज़ी के कुछ उपसर्ग भी जुड़ गए हैं, जिनकी कोई गिनती नहीं है लेकिन वे आम बोलचाल का हिस्सा हैं।
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कुछ प्रमुख नाम: सब (Sub), डिप्टी (Deputy), वाइस (Vice), जनरल (General), चीफ (Chief)।
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उदाहरण: सब-इंस्पेक्टर, डिप्टी-कलेक्टर।
संक्षेप में: अगर आपसे किसी परीक्षा में सीधे तौर पर पूछा जाए, तो सबसे सही उत्तर यही माना जाता है कि मूल रूप से संस्कृत के 22 उपसर्ग होते हैं, लेकिन भाषा के विकास के साथ हिंदी और विदेशी उपसर्ग मिलाकर इनकी कुल गिनती बहुत ज्यादा हो जाती है।








