इतिहास के पन्नों और पौराणिक कथाओं के अनुसार, दिल्ली के अंतिम हिंदू सम्राट पृथ्वीराज चौहान के पुत्रों के बारे में अलग-अलग मत मिलते हैं। हालांकि, ऐतिहासिक रूप से उनके एक पुत्र का वर्णन सबसे प्रमुखता से मिलता है।
पुत्रों का संक्षिप्त विवरण:
- गोविंदराज चतुर्थ (Govindaraja IV): अधिकांश इतिहासकारों के अनुसार, गोविंदराज ही पृथ्वीराज चौहान के मुख्य उत्तराधिकारी थे। तराइन के दूसरे युद्ध में पृथ्वीराज की हार के बाद, मुहम्मद गोरी ने गोविंदराज को अजमेर का शासक नियुक्त किया था। हालांकि, बाद में उन्हें अपने चाचा हरिराज के विद्रोह के कारण अजमेर छोड़ना पड़ा और उन्होंने रणथंभौर में एक नए चौहान साम्राज्य की नींव रखी।
- चंदबरदाई और 'पृथ्वीराज रासो': महाकाव्य 'पृथ्वीराज रासो' में उल्लेख मिलता है कि पृथ्वीराज के कई पुत्र थे, जिनमें शेखा, भोला और रैणसी के नाम भी आते हैं। कुछ लोककथाओं में कहा गया है कि उनके 8 या उससे अधिक पुत्र थे, लेकिन इतिहास में उन सबके बारे में स्पष्ट प्रमाणों का अभाव है।
अतः, यदि हम प्रामाणिक इतिहास की बात करें, तो गोविंदराज ही उनके सबसे चर्चित और प्रतापी पुत्र माने जाते हैं, जिन्होंने रणथंभौर के गौरवशाली इतिहास की शुरुआत की थी।
Answered By Rajesh Yadav
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