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Updated on May 9, 2026news-current-topics

हिंदी को भारत की राष्ट्रीय भाषा कैसे बनाया गया?

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Answered on Dec 26, 2017

भारत एक लोक तांत्रिक देश है और हिंदी हमारी सबसे पुरातत्व भाषाओ मैं से एक है। हम सब जानते है की देवनागरी लिपि भारत मैं सबसे ज्यादा बोलने और उपयोग मै ली जानेवाली लिपि रही है और हमारे देश मैं इसे कही ना कही सभी भाषाओ मैं पाया जाता है।

हिंदी और अंग्रेजी का उपयोग सरकारी उद्देश्यों जैसे संसदीय कार्यवाही, न्यायपालिका, केंद्र सरकार और एक राज्य सरकार के बीच संचार के लिए किया जाता है।

भारत के भीतर राज्यों को अपनी आधिकारिक भाषा को कानून के माध्यम से नियमित करने की स्वतंत्रता और शक्तियां हैं और इसलिए भारत में २२ आधिकारिक मान्यता प्राप्त भाषाएं हैं। कुल भारतीय आबादी में देशी हिंदी बोलने वालों की संख्या १४.५% और २४.५% के बीच है, हालांकि, हिंदी के रूप में हिंदी जैसी अन्य भाषाएं लगभग ४५% भारतीयों द्वारा बोली जाती हैं।

ब्रिटिश राज के दौरान हिंदी को अंग्रेजी संघीय स्तर पर प्रयोजनों के लिए इस्तेमाल किया गया था। १९५० मै अपनाया गया भारतीय संविधान मैं अनुमान लगाया गया की आने वाले पंद्रह वर्षो मैं इसे अंग्रेजी मैं बदल लेंगे । परन्तु देश की कुछ हिस्सों में विरोध करने के साथ ही गणराज्य की हिंदी भाषा को एकमात्र आधिकारिक भाषा बनाने की योजनाएं बनी। जिसके कारण आज भी हिंदी का उपयोग राज्य के स्तर पर राज्य की सरकारी भाषाओं (मध्य स्तर पर कुछ राज्यों में) के साथ संयोजन में किया जा रहा है।

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Answered on May 9, 2026
 

भारत में हिंदी को लेकर अक्सर यह सवाल पूछा जाता है कि क्या हिंदी देश की “राष्ट्रीय भाषा” है। सच यह है कि भारत के संविधान में किसी भी भाषा को राष्ट्रीय भाषा घोषित नहीं किया गया है। हालांकि India में हिंदी को आधिकारिक भाषा (Official Language) का दर्जा जरूर मिला हुआ है, इसलिए लोग आम बोलचाल में इसे राष्ट्रीय भाषा भी कह देते हैं।

आजादी के बाद जब भारतीय संविधान बनाया जा रहा था, तब सबसे बड़ा सवाल यह था कि इतने अलग-अलग भाषाओं वाले देश में सरकारी कामकाज किस भाषा में होगा। उस समय हिंदी को सबसे ज्यादा बोले जाने वाली भाषाओं में माना गया, इसलिए इसे केंद्र सरकार की आधिकारिक भाषा बनाने का प्रस्ताव रखा गया।

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 343 के अनुसार देवनागरी लिपि में लिखी हिंदी को संघ की राजभाषा घोषित किया गया। साथ ही अंग्रेजी को भी कुछ समय तक सरकारी कामकाज में जारी रखने का फैसला लिया गया। बाद में अंग्रेजी का उपयोग भी लगातार जारी रहा क्योंकि भारत में कई राज्यों की अपनी अलग भाषाएं थीं और सभी लोग हिंदी नहीं बोलते थे।

हिंदी को बढ़ावा देने के पीछे एक बड़ा कारण यह था कि इसे देश के अलग-अलग हिस्सों में समझा जाता था। फिल्मों, साहित्य, रेडियो और बाद में टीवी ने भी हिंदी को पूरे देश में लोकप्रिय बनाने में बड़ी भूमिका निभाई।

लेकिन हिंदी को लेकर विवाद भी हुए। दक्षिण भारत समेत कई राज्यों में लोगों ने यह चिंता जताई कि अगर सिर्फ हिंदी को ज्यादा महत्व दिया गया तो दूसरी भाषाओं की पहचान कमजोर हो सकती है। इसी वजह से भारत ने “बहुभाषी” नीति अपनाई, जिसमें सभी भाषाओं को सम्मान देने की कोशिश की गई।

आज भारत में हिंदी सबसे ज्यादा बोली और समझी जाने वाली भाषाओं में से एक है। सरकारी कार्यालयों, स्कूलों, फिल्मों, समाचार और सोशल मीडिया में इसका उपयोग बहुत ज्यादा होता है। हालांकि तमिल, बंगाली, मराठी, तेलुगु, पंजाबी, गुजराती और दूसरी भारतीय भाषाओं का भी देश की संस्कृति में बहुत बड़ा योगदान है।

अगर आसान शब्दों में कहें तो हिंदी को भारत की राष्ट्रीय भाषा आधिकारिक रूप से घोषित नहीं किया गया, लेकिन इसे संविधान में राजभाषा का दर्जा मिला। इसकी लोकप्रियता, व्यापक उपयोग और लोगों के बीच आसानी से समझे जाने की वजह से यह देश की सबसे प्रभावशाली भाषाओं में शामिल हो गई।

आज हिंदी सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया के कई देशों में भी बोली और समझी जाती है, जिससे इसकी पहचान लगातार और मजबूत होती जा रही है।

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