इदाते आयोग (Idate Commission) क्या है?
हमारे देश में जातिगत भेदभाव मिटाने के लिए आरक्षण दिया जाता है। लेकिन कई ऐसी जातियां हैं जो शैक्षिक और सामाजिक रूप से पिछड़ी हुई है लेकिन उन्हें अभी तक आरक्षण नहीं मिला है। समय-समय पर कमीशन यानी आयोग इन जातियों का सर्वेक्षण करके इन्हें आरक्षित श्रेणी में रखती है ताकि इन्हें आरक्षण का लाभ मिल सके और उनके समाज का कल्याण हो सके।
इसी को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने इदाते आयोग (Idate Commission) आयोग बनाया था जिसकी रिपोर्ट 2026 में सामने आ चुकी है।
इदाते आयोग भारत सरकार द्वारा बनाया गया एक बहुत ही खास आयोग है। इदाते आयोग भारत सरकार द्वारा गठित एक महत्वपूर्ण आयोग है, जिसे आधिकारिक रूप से राष्ट्रीय विमुक्त, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू जनजाति आयोग (National Commission for Denotified, Nomadic and Semi-Nomadic Tribes) कहा जाता है।
ईदातें आयोग कब बना
आपकी जानकारी के लिए बता दे की फरवरी 2014 में इस आयोग की स्थापना की गई। इस आयोग के अध्यक्ष श्री भीकू रामजी इदाते आते हैं। आयोग ने जनवरी 2018 में अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है और इसमें चौंकाने वाले सर्वे और fact सामने आए हैं।
दरअसल आपको बता दे कि इस अध्ययन में बात का जिक्र हुआ जब ब्रिटिश काल में आपराधिक जनजाति अधिनियम 1871 अंग्रेजों ने बनाया था।
अंग्रेजों ने उसे समय कुछ जनजातियों को अपराधी जन्मजात घोषित कर दिया था। लेकिन आजादी के बाद इस काले कानून को भारत सरकार ने 1952 में इस कानून को रद्द कर दिया।
इन जाति को विमुक्त जनजाति कहा गया जिसे अंग्रेजी में Denotified Tribes - DNT) कहा जाता है। यही नहीं इनके साथ घुमंतू (Nomadic Tribes - NT) और अर्ध-घुमंतू (Semi-Nomadic Tribes - SNT) समुदाय भी शामिल हैं।
आपको जानकार आश्चर्य होगा इन समुदायों की संख्या भारत में 10 से 12 करोड़ हैं और किसी भी आरक्षण की श्रेणी में नहीं आते हैं जबकि सामाजिक और शैक्षिक रूप से बहुत पिछड़े हुए हैं।
ईदातें कमीशन की क्या है रिपोर्ट जानना आपके लिए है जरूरी
दोस्तों आरक्षण को लेकर ईद आते कमिश्नर ने कुछ खास महत्वपूर्ण सिफारिशें से भी की हैं। उनकी स्थिति में सुधार करने के लिए आरक्षण लागू करने की बात तो कही है इसके साथ ही कुछ और बातें भी कही है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि SC/ST/OBC सूची में शामिल न होने वालों को OBC श्रेणी में शामिल किया जाए। ताकि उनके साथ न्याय हो सके और इन्हें आरक्षण दिया जा सके।
आयोग ने एक बहुत ही खास बात कही है। उनके लिए अलग अनुसूची बनाई जाए। इस अलग संवैधानिक अनुसूची में यह बात कही गई है कि इन्हें शिक्षा नौकरी और दूसरी सरकारी योजनाओं में आरक्षण का सीधा लाभ दिया जाए।
अत्याचार निवारण अधिनियम में सुरक्षाअनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 में तीसरी अनुसूची जोड़कर इन समुदायों को कानूनी सुरक्षा देने का सुझाव दिया दिया जाए और पुलिस उत्पीड़न से बचाया जाए।
इसके साथ ही अलग से उनके लिए स्थाई आयोग और विभाग बनाने की बात भी कही गई है।
निष्कर्ष
आज भी यह समुदाय शिक्षा, स्वास्थ्य रोजगार और सामाजिक सम्मान से वंचित है। ब्रिटिश काल के काले कानून की वजह से उनकी सामाजिक उन्नति नहीं हो पाई है इसलिए उनके लिए कल्याणकारी कार्यक्रम सरकार को शुरू करने के लिए भी आयोग ने कहा है। समाज के मुख्य धारा में लाने के लिए आयोग ने अपनी सिफारिशें से दी है।
इदाते कमीशन की पूरी रिपोर्ट पढ़ने के लिए लिंक-
https://www.dosje.gov.in/documents/idate-commission-report-2017/

