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Educationरेलवे मंत्रालय ने किस वर्ष में विलेज ऑन ...
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| Updated on March 9, 2026 | education

रेलवे मंत्रालय ने किस वर्ष में विलेज ऑन व्हील्स नामक एक परियोजना शुरू करने की घोषणा की?

2 Answers
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@ravisingh9537 | Posted on December 23, 2025

विलेज ऑन व्हील्स भारतीय रेल द्वारा बजट पर्यटकों, विशेष रूप से ग्रामीणों, इसलिए नाम रखने के लिए शुरू की गई विशेष ट्रेन है। ट्रेनें चयनित पर्यटन स्थलों को जोड़ती हैं, आमतौर पर एक परिपत्र अनुसूची। गाड़ियों का प्रबंधन भारतीय रेलवे खानपान और पर्यटन निगम (IRCTC) द्वारा किया जाता है।

रेल मंत्री लालू प्रसाद ने 29 जनवरी 2004 को पटना के राजेंद्र नगर टर्मिनल पर भारतीय रेलवे की पहली विशेष ट्रेन 'विलेज ऑन व्हील्स' को हरी झंडी दिखाई।

मार्ग पटना (शुरू) -मोकामा-जसीडीह-आसनसोल-बर्धमान-हावड़ा-पुरी-हावड़ा-आसनसोल-पटना (खत्म) छह दिनों में है।

हावड़ा - पटना - मनमाड (शिरडी) - पुणे- मुंबई- अहमदाबाद-द्वारका-वेरावल-अजमेर-जयपुर-दिल्ली-पटना-हावड़ा (खत्म) बारह दिनों में है।

पटना (शुरू) -हौरा- पुरी-तिरुपति-मदुरै-रामेश्वरम-कन्याकुमारी-त्रिवेंद्रम-एर्नाकुलम-हावड़ा- पुणे (बारहमासी) बारह दिनों में

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@rajeshyadav9188 | Posted on March 9, 2026

रेलवे मंत्रालय ने 'विलेज ऑन व्हील्स' (Village on Wheels) नामक महत्वाकांक्षी परियोजना की घोषणा वर्ष 2004 में की थी।

इस परियोजना से जुड़ी कुछ मुख्य बातें इस प्रकार हैं:

  • घोषणा और शुरुआत: इस ट्रेन की घोषणा 2004-05 के रेल बजट में तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव द्वारा की गई थी। इसकी पहली यात्रा 29 नवंबर 2004 को पटना के राजेंद्र नगर टर्मिनल से शुरू हुई थी।
  • उद्देश्य: इसे 'आम आदमी की पैलेस ऑन व्हील्स' कहा जाता था। इसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीणों और कम बजट वाले पर्यटकों को किफायती दरों पर देश के धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों (जैसे वाराणसी, आगरा, मथुरा, दिल्ली, हरिद्वार आदि) की यात्रा कराना था।
  • सुविधाएं और किराया: उस समय इसका किराया लगभग 500 रुपये प्रतिदिन तय किया गया था, जिसमें भोजन, ठहरने और दर्शनीय स्थलों की यात्रा का खर्च भी शामिल था। यह ट्रेन पूरी तरह से गैर-वातानुकूलित (Sleeper Class) थी।
  • प्रबंधन: इस परियोजना का प्रबंधन और संचालन IRCTC (भारतीय रेलवे खानपान और पर्यटन निगम) द्वारा किया जाता था।

यह योजना भारतीय पर्यटन को आम जनता तक पहुँचाने की दिशा में एक बड़ा कदम थी, जिसने आगे चलकर 'भारत दर्शन' जैसी कई अन्य किफायती ट्रेन सेवाओं का मार्ग प्रशस्त किया।

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