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Satindra Chauhan· 5 साल पहले
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मुंशी प्रेमचंद जी का परिचय दीजिए?

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जवाब दिया गया10/13/23

मुंशी प्रेमचंद जी का जीवन परिचय -

मुंशी प्रेमचंद जी का जन्म 31 जुलाई 1880, को बनारस के एक छोटे से गांव लमही में,जहां प्रेमचंद जी का जन्म हुआ था।प्रेमचंद जी एक छोटे और सामान्य परिवार से थे। उनके दादाजी गुरसहाय राय जोकि पटवारी थे। और उनके पिताजी अजायाब राय जोकि पोस्ट मास्टर थे। बचपन से ही उनका जीवन बहुत ही, संघर्षों से गुजरा था।जब प्रेमचंद जी महज आठ वर्ष की उम्र मे थे तब, एक गंभीर बीमारी मे, उनकी माता जी का देहांत हो गया।प्रेमचंद जी को बचपन से ही उनकी माता-पिता का प्यार नहीं मिल पाया था। सरकारी नौकरी के चलते पिताजी का तबादला गोरखपुर में हुआ था।कुछ समय बाद पिताजी ने दूसरा विवाह कर लिया सौतेली माता ने कभी प्रेमचंद जी को पूर्ण रूप से अपनाया नहीं. मुंशी प्रेमचंद जी ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा उर्दू और फारसी में की थी यह पढ़ने मैं बहुत तेज थे 13 वर्ष की उम्र में ही तिलिस्मी होसरूबा पढ़ लिया। मुंशी प्रेमचंद जी ने बचपन में बड़ी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था।लेख की तस्वीर

Poonam Patel
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जवाब दिया गया10/31/22

मुंशी प्रेमचंद जी का जीवन परिचय

मुंशी प्रेमचंद जी का जन्म 31 जुलाई सन 1880 को उत्तर प्रदेश वाराणसी के लमही नामक स्थान में हुआ था मुंशी प्रेमचंद जी का पूरा नाम धनपत राय था। मुंशी प्रेमचंद जी का जीवन बड़ी ही कठिनाइयों से गुजरा था। मुंशी प्रेमचंद जी के माता का नाम आनंदी देवी था इसके अलावा मुंशी प्रेमचंद जी के पिता का नाम अजायबराय था। जो कि एक डाकखाने में क्लर्क थे। मुंशी प्रेमचंद जी का विवाह मात्र 15 वर्ष की उम्र में हो गया था। इनके विवाह के 1 वर्ष बादल के पिताजी का देहांत हो गया। यहां पर हम आपको मुंशी प्रेमचंद द्वारा लिखी गई कुछ कहानियों के नाम बताते हैं।

आत्माराम

दो बैलों की कथा

आल्हा

इज्जत का खून।लेख की तस्वीर

Krishna Patel
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जवाब दिया गया10/14/23

चलिए हम आपको मुंशी प्रेमचंद जी के जीवन परिचय बताते हैं। मुंशी प्रेमचंद जी का जन्म 31 जुलाई 1880, को बनारस के एक छोटे से गांव लमही में,जहां प्रेमचंद जी का जन्म हुआ था। मुंशी प्रेमचंद जी का जीवन बहुत ही ज्यादा कठिनाइयों से व्यतीत हुआ है। लेकिन इन्होंने कभी हार नहीं मानी हमेशा अपने जीवन में कठिनाइयों का डटकर सामना किया है। हम आपको बता दें कि जब मुंशी प्रेमचंद जी 8 वर्ष के थे तो उन्हें एक गंभीर बीमारी में घेर लिया था लेकिन भगवान की कृपा उन पर हमेशा बनी रही और वह ठीक हो गए। बचपन से उन्हें माता-पिता का प्यार नहीं मिला। लेकिन फिर भी वह हमेशा खुश रहते थे। मुंशी प्रेमचंद जी अपनी प्रारंभिक शिक्षा फारसी और उर्दू भाषा में की थी। क्योंकि मुंशी प्रेमचंद जी पढ़ने में बहुत ही ज्यादा होशियार थे।

Letsdiskuss

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जवाब दिया गया11/02/22

प्रेमचंद मुंशी जी हिंदी और उर्दू के एक महान लेखक थे। और प्रेमचंद्र मुंशी जी का जन्म31 जुलाई 1880 को आरसी के निकट लंबी ग्राम में हुआ था। इनका मूल नाम धन पतराय श्रीवास्तव, प्रेमचंद्र जी को नवाब राज के नाम से भी जाना जाता है। इनके पिता का नाम मुंशी अजायबराय जो की लमही में डाकमुंशी थे और उनकी माता का नाम आनंदी देवी है। प्रेमचंद मुंशी जी ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा उर्दू और फारसी में की थी यें पढ़ने में बहुत तेज थे 13 वर्ष की उम्र में ही तिलिस्मे होशरुबा पढ़ लिया था। और इनका उपन्यास के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान है।

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जवाब दिया गया10/08/26

मुंशी प्रेमचंद्र का असली नाम धनपट राय श्रीवास्तव था | इनका जन्म 31 जुलाई 1880 मे लमही गाँव जो वाराणसी के उत्तरप्रदेश मे स्थित है , हुआ था | इनकी माता का नाम आनंदी देवी ओर पिता का नाम अजायबराय था | अजायबराय डाकघर मे मुंशी का कार्य करते थे | प्रेमचंद्र जी जब छोटे थे तभी उनके माता पिता का का देहांत हो गया था पहले 7 वर्ष मे माता का तथा 16 वर्ष कि आयु मे पिता का | प्रेमचंद्र का बचपन बड़ी कठिनाइयों के साथ बीता |

मुंशी प्रेमचंद्र को हिन्दी ओर उर्दू भाषा का अच्छा ज्ञान था | उन्होंने सबसे पहले उर्दू ओर फारसी भाषा का चयन कर अपनी शिक्षा कि शुरुआत कि | धीरे धीरे वह आगे बढ़े ओर बी . ए कि डिग्री हासिल कि | पढ़ाई के साथ साथ उन्होंने नौकरी भी कि जिससे उनका खर्चा भी चल सके | वह एक शिक्षक के रूप मे कार्यरत रहे | इसके बाद उन्होंने स्कूल इंस्पेक्टर कि नौकरी करी |

प्रेमचंद जी का पहला विवाह 15 वर्ष कि आयु मे उनके पिता ने कर दिया था परंतु उम्र मे बड़ी ओर स्वभाव मे कटु होने के कारण उनके परिवार के साथ उसका तालमेल ना बना जिसकी वजह से वह घर छोड़कर अपने मायके चली गई ओर वापस प्रेमचंद्र के पास नहीं लौटी |

शिवरानी नाम कि लड़की से प्रेमचंद्र जी ने दूसरा विवाह किया | शिवरानी बाल विधवा लड़की थी | उस समय विधवा से विवाह करना समाज से विद्रोह समान था | मुंशी प्रेमचंद्र जी ने उनके पिता को पत्र भेज कर शादी का प्रस्ताव भेजा ओर विवाह किया | उन्होंने समाज को एक नयी दिशा प्रदान कि |

प्रेमचंद्र ने 13 वर्ष कि उम्र मे अपना पहला नाटक लिखा था | उन्होंने शुरुवात मे नाबाबराय नाम से लिखना शुरू किया | फिर उनके दोस्त के कहने पर उन्होंने अपना नाम प्रेमचंद किया | 1914 से 1915 के बीच से उन्होंने हिन्दी भाषा का प्रयोग करना शुरू किया इसके पहले के उनके सारे लेख उर्दू भाषा मे ही थे |

उन्होंने अपनी पूरे जीवनकाल मे 350 से भी ज्यादा कहानियाँ ओर रचनाएँ लिखी | जिसमे सबसे ज्यादा प्रसिद्ध कफ़न , पुस कि रात , ईदगाह , दो बैलों कि कथा , नमक का दरोगा है |

इसमे मेरे हिसाब से सबसे प्रसिद्ध ईदगाह लगती है | इसमे दादी अमीना ओर उसके पोते हामिद कि कहानी का व्याख्यान किया गया है | हामिद का अपनी दादी अमीना कि चिंता ,उनकी परवाह कि कहानी है |

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जवाब दिया गया10/14/23

मुंशी प्रेमचंद की जीवन परिचय -

मुंशी प्रेमचंद जी का जन्म 31 जुलाई 1880, को बनारस के एक छोटे से गांव लमही में,जहां प्रेमचंद जी का जन्म हुआ था।प्रेमचंद जी एक छोटे और सामान्य परिवार से थे।प्रेमचंद को हिंदी और उर्दू के महानतम लेखकों में शुमार किया जाता है। हम आपको बता दें कि जब मुंशी प्रेमचंद जी 8 वर्ष के थे तो उन्हें एक गंभीर बीमारी में घेर लिया था लेकिन भगवान की कृपा उन पर हमेशा बनी रही और वह ठीक हो गए। बचपन से उन्हें माता-पिता का प्यार नहीं मिला। लेकिन फिर भी वह हमेशा खुश रहते थे।उपन्यासः सेवासदन, प्रेमाश्रम, रंगभूमि, निर्मला, कायाकल्प, गबन, कर्मभूमि, गोदान आदि है।

कहानियां व कहानी संग्रहः नमक का दरोगा, ईदगाह,पूस की रात, कफन, बूढ़ी काकी, मानसरोवर नाटकः कर्बल, प्रेम की बेदी आदि।बचपन से उन्हें माता-पिता का प्यार नहीं मिला। लेकिन फिर भी वह हमेशा खुश रहते थे। मुंशी प्रेमचंद जी अपनी प्रारंभिक शिक्षा फारसी और उर्दू भाषा में की थी।लेख की तस्वीर

Kanchan  Patel
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जवाब दिया गया07/31/21

मुंशी प्रेमचंद कथा सम्राट, उपन्यास सम्राट, मुंशी प्रेमचंद हिंदी कथा साहित्य के मूर्धन्य कहानीकार है। आपका जन्म 31 जुलाई सन 1880 ई. में हुआ था। आपका असली नाम धनपत राय था। बचपन में बड़ी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

पहले उर्दू में नवाबराय के नाम से कहानियां लिखते थे। आप की कथा-कृतियों में ग्रामीण जीवन का चित्रण हुआ है। सदा से उपेक्षित और पीड़ित-किसान मजदूरों की व्यथा-कथा और उनकी समस्याओं के हल सुलझाए।

आप कहानीकार, उपन्यासकार, निबंध लेखक और संपादक थे। 8 अक्टूबर सन 1936 ई. में एक महान साहित्यकार सम्राट को खोदिए।

प्रमुख कृतियाः-

उपन्यासः सेवासदन, प्रेमाश्रम, रंगभूमि, निर्मला, कायाकल्प, गबन, कर्मभूमि, गोदान आदि है।

कहानियां व कहानी संग्रहः नमक का दरोगा, ईदगाह,पूस की रात, कफन, बूढ़ी काकी, मानसरोवर नाटकः कर्बल, प्रेम की बेदी आदि।

मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर शत-शत नमन

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