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Amayra Badoni· 7 years ago
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जीका वायरस संक्रमण क्या है, और इसके क्या लक्षण हैं ?

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आज हम आपको इस आर्टिकल में जीका वायरस संक्रमण के बारे में बताएंगे कि इसके लक्षण क्या है। और यह वायरस किसके द्वारा फैलता है इसकी पूरी जानकारी देंगे।

जीका वायरस मच्छरों द्वारा काटने पर फैलता है यह वायरस बहुत ही खतरनाक होता है यह वायरस एडीज मच्छरों के काटने से फैलता है और यदि कोई व्यक्ति एक बार इसके संपर्क में आ गया तो सीधे मृत्यु के बाद ही इससे छुटकारा मिलता है।

जीका वायरस के कुछ सामान्य लक्षण इस प्रकार के हैं जो हम आपको नीचे बताने जा रहे हैं :-

यदि किसी व्यक्ति को जीका वायरस हो जाता है तो धीरे-धीरे करके उसके सिर में दर्द बढ़ता जाता है और आगे चलकर यह माइग्रेन का रूप ले लेता है।

जो व्यक्ति जीका वायरस के संक्रमण से संक्रमित हो जाता है उसकी आंखें हर वक्त लाल रहती है।

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और पढ़े- किस राज्य मे निपाह वायरस संक्रमण के कारण मौते दर्ज की गई है?

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Krishna Patel
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Answered on05/24/23
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जीका वायरस एक संक्रमित एडीज प्रजाति के मच्छर के काटने के कारण फैलता है,यह मच्छर दिन और रात मे काटते है। जीका वायरस यहां तक एक गर्भवती महिला के गर्भ के भ्रूण तक पहुंच सकता है, जीका वायरस किसी गर्भवती महिला या फिर किसी आम इंसान के बॉडी मे प्रवेश कर सकता है इस वायरस से बचने के लिए कोई दवा नही है।


जीका वायरस संक्रमण होने के लक्षण -
जीका वायरस होने पर कई लक्षण दिखाई देने लगते है -

•आँखों का लाल हो जाना।
•आँखों मे दर्द होना, आंसू आना।
•बुखार आना।
•अचानक से सिरदर्द होना।
•जोड़ो मे दर्द होना।
•मांसपेशियों मे दर्द होना।
•चेहरे मे लाल चकतो का आना।


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S
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Mp

Answered on05/23/23
3

यह बीमारी एक ऐसी बीमारी है जो यदि आपको एक बार लग गयी तो सीधा मृत्यु के साथ ही खत्म होती है | जीका वायरस मच्छरों से होने वाली बीमारी है जो साधारणतया संक्रमित एडीज, एजिप्टी और अन्य मच्छरों से फैलती है | यह बीमारी एक विश्व व्यापी बीमारी है जो आपको कहीं भी कैसे भी लग सकती है | साधारण शब्दों में यदि आपको किसी प्रकार का संक्रमित मच्छर काट ले या संक्रमित व्यक्ति का रक्त आपके शरीर में चले जाए तो यह बीमारी आपको लग सकती है | इस बीमारी की उत्पत्ति 1947 में जीका घाटी में हुई थी जिसके पश्चात् अफ्रीका, अमेरिका और एशिया महाद्वीप में यह बीमारी बड़ी मात्रा में फैली है |



इस बीमारी से मुख्यता दो बड़ी बीमारिया हों सकती हैं - माइक्रोकेफेली और ग्यूलेन-बैरे |

माइक्रोकेफेली - यदि गर्भावस्था में यह बीमारी माँ को हो तो इससे यह बीमारी शिशु को भी हो सकती है | इस बीमारी से शिशु के मस्तिष्क का आकार छोटा हो जाता है जिससे वह मानसिक रूप से निर्बल हो जाता है |

ग्यूलेन-बैरे - यह रोग मनुष्य के शरीर के तंत्रिका तंत्र अर्थात शरीर की सबसे बड़ी कोशिकाओं व तंत्रो को प्रभावित करता है जिससे व्यक्ति उम्र भर के लिए अपाहिज हो सकता है | आसान शब्दों में आप इसे लकवा भी कह सकते हैं |


रोग के लक्षण

बुखार - यदि व्यक्ति जीका वायरस से संक्रमित हो जाए तो वह तेज बुखार से ग्रस्त हो जाता है |

जोड़ो का दर्द - व्यक्ति के जोड़ो में अत्यधिक दर्द बैठ जाता है जिससे उसे सामन्य रूप से उठने बैठने में परेशानी होने लगती है |

शरीर पर लाल चकत्ते - शरीर के विभिन्न अंगो पर लाल चकत्ते निकलने लगते हैं, जैसे चेचक के समय होते हैं |

सिर दर्द - व्यक्ति को अत्यधिक सर दर्द होता है जो माइग्रेन का रूप ले सकता है |

आंखों का लाल होना - व्यक्ति की आँखे हर वक़्त लाल रहती हैं |

यदि आपको इस प्रकार के कोई भी लक्षण नज़र आते हैं तो पहला कार्य आपको यह करना चाहिए की आप जाकर अपनी जांच कराएं व डॉक्टर को दिखाए |


जीका वायरस से बचाव

• इस बीमारी से बचने की अबतक कोई दवाई नहीं बन सकी है,परन्तु इस बीमारी से होने वाले रोगों से बचने के लिए आपको दवाइयां उपलब्ध होती हैं |

• बीमारी से बचने का सबसे सही उपाय है की आप खुदको यह बीमारी लगने ही न दें |

• कीड़े मकोड़ो वाले स्थान पर जाने से बचें |

• पूरे कपड़े पहने और मच्छरों के संपर्क से बचें |

• असुरक्षित यौन सम्बन्धो से दूरी रखें |

• जीका वायरस के संक्रमण को रोकने का सबसे अच्छा उपाय है मच्छरों की रोकथाम |

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