द
दलबीर सिंह · 8 साल पहले
लेखक

क्या रत्न और पत्थर वास्तव में प्रभावशाली होते हैं?

2
1.1K

इस बातचीत में शामिल हों

क्रमबद्ध करें
ऊपर दिए गए सवाल का जवाब
अपडेट किया गया10/24/26

रत्नों का इतिहास प्राचीन काल से ही अविश्वसनीय है | राजा-महाराजा , रानी -महारानीयो सभी को रत्नों का बहुत शौक था | अलग अलग प्रकार के सुंदर रत्नों को धारण करते थे | जो बहुत ही अनमोल होते थे | रत्नों को आध्यातमिक रूप से भी बहुत शुभ माना जाता है | मानव जीवन मे रत्नों का विशेष स्थान ओर महत्व रहा है | लेकिन यह जानना बहुत जरूर है कि रत्न क्या है और ये इतने लोकप्रिय क्यों माने जाते हैं?

रत्न प्राकृतिक खनिज ,या चट्टान होते है , जिन्हे काट कर , पोलिश या उनकी घिसाई कर के सुंदर बनाया जाता है | रत्नों से आभूषण भी बनाए जाते है | ओर इसे आध्यातमिक अनुष्ठानों मे भी प्रयोग मे लाया जाता है | ज्योतिष विध्या मे रत्नों का महत्व अधिक माना जाता है | आज कल रत्नों को धारण करना एक फैशन कि तरह हो गया है इसी के साथ उसके प्रभावों से भी आकर्षित है | मानव अपनी राशि के अनुसार रत्नों का चयन कर उसे धारण करता है|

रत्नों के प्रकार -

  • कीमती रत्न

  • अर्द्ध कीमती रत्न

  • जैविक

कीमती रत्नों मे मुख्यतः -हीरा , पन्ना ,माणिक और नीलम को माना जाता है | यह बहुत ही प्रभावशाली रत्न माने जाते है | माना जाता है रत्नों कि मजबूती को अनुशंसित करने मे इन रत्नों का बहुत महत्व होता है | जो लोग इन रत्नों को धारण करते है उन पर इसका बहुत प्रभाव पड़ता है | इन रत्नों मे ओपल , मूनस्टोन , पेरिडॉट , फ़िरोज़ा , टूमलाइन , गोमेद आदि अनेक तरह के रत्न आते है |

अर्ध कीमती रत्न वह प्राकृतिक खनिज होते है जो आभूषणों और सजावटों मे उपयोग किए जाते है | यह कीमती रत्नों जैसे हीरा ,पन्ना ,माणिक जीतने मूल्यवान नहीं होते है लेकिन सुंदरता इनमे भी होती है | इससे रोजमर्रा मे पहने जाने वाले आभूषण अंगूठी , माला , हाथों के कंगन आदि बनाया जाता है |

यह रत्न उप -रत्न भी कहलाते है यह मूल्यवान रत्नों के विकल्पों के रूप मे भी प्रयोग किए जाते है |

जैविक रत्न - यह वह रत्न होते है जो जीवित प्राणियों या पेड़ पौधों से हमे प्राप्त होते है | जैसे -

मोती -यह हमे नदी या समुद्र मे पाए जाने वाले सीप जीव के अंदर पाया जाता है |

मूंगा - यह रत्न समुद्र मे स्थित शैवाल के कंकाल से प्राप्त होता है |

इसके अलावा तृणमणि , हाथीदांत भी जैविक रत्न कि श्रेणी मे आते है |

ज्योतिषी ओर वैज्ञानिक दोनों कि दृष्टि से इस प्रश्न का उत्तर अलग अलग है | ज्योतिषी के अनुसार रत्न ओर पत्थर मानव जीवन के लिए प्रभावशाली होते है |जो व्यक्ति ज्योतिषी ,ग्रहों मे विश्वास रखता है यह उनके लिए लाभदायक सिद्ध होते है |

वही वैज्ञानिक दृष्टि से यह बिल्कुल सही नहीं है वह मानते है कि रत्नों ओर पत्थरों का ग्रहों से कोई संबंध नहीं है | वैज्ञानिकों का मानना है कि कोई भी रत्न या पत्थर किसी बीमारी का ठीक नहीं कर सकता है यह बस मानव के मन को दिलासा देने योग्य है |

लेख की तस्वीर

komal Solanki
letsdiskuss ke sath learn bhi or Earn bhi.......
प्रोफ़ाइल देखें

🔍 Seeking answers & sharing perspectives 🌍 Turning thoughts into meaningful blogs

0
ऊपर दिए गए सवाल का जवाब
अपडेट किया गया05/29/26

आज के तकनिकी दौर में जो चल रहा हैं, उसको देखते हुए, यह निर्धारित करना बहुत मुश्किल हैं, कि रत्न और पत्थरों में भरोसा किया जाये या नहीं | जो लोग ज्योतिष को मानते हैं, औरभगवान को मानते हैं, वो रत्न और पत्थर पर भरोसा करते हैं, और प्रभाव कीबात तब आती हैं, जब मनुष्य किसी चीज पर भरोसा करता हैं | जितने भी रत्न और उपरत्न हैं, सभी पत्थर ही होते हैं, परन्तु कुछ रत्न चमकने वाले होते हैं,और कुछ में चमक नहीं होती |

जैसे कि - भगवान की मूरत पत्थर की ही होती हैं, पर वो किसी बड़े मंदिर में विराजमान हो जाये तो वहाँ भक्तों की कतारें लगी होती हैं |
 
यहां बात भरोसे और आस्था की हैं, जहां आस्था वहाँ भरोसा, और जहां भरोसा वहाँ उन चीजों का प्रभाव भी पड़ता हैं | ज्योतिष के अनुसार रत्नो का बहुत महत्व हैं, और मनुष्य पर उसका प्रभाव पड़ता हैं, अच्छा या बुरा ये मनुष्य की राशि और उसकी राशि पर suite करने वाले रत्न पर निर्धारित करता हैं |
 
रत्नों का प्रभाव :-
 
- ज्योतिष के अनुसार रत्न में दिव्या शक्ति होती हैं, जिसे मनुष्य को अपनी राशि के हिसाब से धारण करना होता हैं, और रत्न का प्रभाव मनुष्य को उसकी राशि के अनुसार ही मिलता हैं |
 
- मनुष्य को उसकी राशि के आधार पर ही रत्न धारण करना चाहिए, रत्न का प्रभाव मानव जीवन पर उसके ग्रह के रंग के हिसाब से पड़ता हैं |
 
- प्राचीन समय में ऋषियों ने अपनी योग शक्ति और अपने प्रयोगों के अनुसार ग्रहों के रंग निर्धारित किये थे, जिनके आधार पर रत्नो का चयन किया गया, कि किस ग्रह के लिए कौन सा नग धारण करना चाहिए और उसका क्या प्रभाव हो सकता हैं |
 
- जैसा कहा गया हैं, कि नग में दिव्या शक्ति होती हैं, तो उसको मनुष्य अपनी परेशानी के हिसाब से धारण करता हैं, और निश्चित रूप से मनुष्य की वह परेशानी कम होती हैं |
 
वैसे तो कुछ लोग रत्न को शौकिया तौर पर पहनते हैं, परन्तु रत्न को शौकिया तौर पर नहीं बल्कि अपनी राशि के हिसाब से पहनना चाहिए, क्योकि अगर रत्न मानव जीवन पर अच्छा प्रभाव डाल सकते हैं, तो ग़लत रत्न निर्धारित करने पर यह बुरा प्रभाव भी डाल सकते हैं |
 
क्या सावन के महीने में भगवान शिव की कोई विशेष पूजा होती है, ये जानने के लिए इस Link पर click करें :-

 

K
लेखक
प्रोफ़ाइल देखें

हिंदी लेखक

1