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Astrologyमनुष्य की आस्था अंधविश्वास बन जाये तो क्...

| Updated on December 23, 2025 | astrology

मनुष्य की आस्था अंधविश्वास बन जाये तो क्या परिणाम हो सकते हैं ?

3 Answers
K

@kanchansharma3716 | Posted on December 23, 2025

मनुष्य की आस्था जब अंधविश्वाश बन जायें तो सिर्फ विनाश होता हैं | भगवान कभी नहीं कहते के मेरे लिए भूखे रहों, मेरे लिए सुबह-सुबह ठन्डे पानी से नहाओ, बिना चप्पल केगर्मियों में मेरे मंदिर तकआओ | भगवान अपने भक्त से सिर्फ आस्था की कामना करते हैं | वतर्मान समय के लोगों ने भगवान को भगवान नहीं, बल्कि शैतान बना दिया हैं | भगवान के नाम पर लोगों ने व्यापार शुरू कर दिया हैं |
 
आस्था :-
जब तक मनुष्य के अंदर आस्था होती हैं, तब तक उसका जीवन बहुत ही आसान होता हैं | जीवन में सिर्फ शांति और ख़ुशी होती हैं | मनुष्य कम से कम चीज़ों में भी अपना सही गुज़ारा कर लेता हैं | मनुष्य के अंदर सिर्फ भगवान के प्रति भक्ति होती हैं , न किसी से ईर्ष्या, न किसी से बैर बस भगवान की भक्ति | हर रोज भगवान का नाम लेकर अपना काम शुरू करना यही हैं, "आस्था"
 
अन्धविश्वाश :-
मनुष्य के अंदर जब अन्धविश्वास आता हैं, तब उसके अंदर भगवान की भक्ति नहीं, बल्कि शैतान की शक्ति जन्म लेने लगती हैं | शिवलिंग पर दूध चढ़ाना,शनि देव की मूर्ति पर सरसों का तेल डालना ये सब भक्ति नहीं हैं |
हम नहीं कहते, कि शिवलिंग पर दूध मत चढ़ाओ, पर सिर्फ उतना जितना अपनी आस्था के बराबर हो, न कि अंधविश्वाश के बराबर,शनिदेव सबसे अधिक गुस्से वाले भगवान माने जाते हैं, पर मुझे नहीं लगता, कि वो अपनी इस तरह से होने वाली पूजा से खुश होते होंगे | कुछ लोग शनिदेव की प्रतिमा पर लीटर से लीटर सरसों तेल डालते हैं |उन पर तेल डालने से अच्छा हैं, उनके नाम से एक ज्योत जला दो, और बाकी तेल किसी जरूरतमंद इंसान को दे दो |
 
अगर साफ़-साफ़ शब्दों में कहा जायें तो आस्था और अन्धविश्वास में बस एक धागे भर का फर्क होता हैं |
 
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@rahulaobaraॉya6964 | Posted on December 23, 2025

 
ये तो साफ़ साफ़ पता हैं सभी को कि जब आस्था अन्धविश्वास बन जाता हैं, तो सिर्फ विनाश होता हैं | जैसा कि अभी सावन का महीना चल रहा हैं, इस महीने लोग शिव जी का पूजन करते हैं | दूध दही शहद चीनी और भी बहुत सी चीज़ों से उनका अभिषेक करते हैं |
 
कहने को तो ये सब आस्था हैं, और ये भगवान की पूजन सामग्री हैं, उनके लिए हैं पर मुझे ऐसा लगता हैं, कि ये सब भगवान पर पूरी डालकर हम सभी लोग चीज़ें बरबाद कर रहे हैं | पूजा में सामग्री का प्रयोग करो पर सिर्फ उतना जितना जरुरी हो |
 
भगवान पर आप दूध डालकर पूजा करें , आप पूजा के लिए थोड़ा दूध का इस्तेमाल करें, बाकी आप किसी ऐसे इंसान को दें जिसको जरूरत हैं | पूजा में प्रयोग की जाने वाली सामग्री का कम प्रयोग करें बाकी आप किसी जरूरतमंद को दें|
 
आस्था बस यही हैं, जो दिन में एक दूसरे के लिए इंसानियत जगा दें, वही दूसरी और अन्धविश्वाश इंसान में हैवानियत बड़ा देती हैं |
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R

@ruchikadutta9160 | Posted on December 23, 2025

बेटे की चाह में बेटी की बलि देना तंत्र मंत्र है या अंधविश्वास, यह जानने से पहले हम यह जान लेते हैं कि तंत्र-मंत्र व अंधविश्वास क्या है | तंत्र का अर्थ होता है शैतान की पूजा अर्थात उस मूर्ति की पूजा जिसे हम भगवान का या इंसान का दर्जा नहीं देते | मंत्रो का अर्थ है वह पूजा व उच्चारण जिनका उपयोग हम भगवान के लिए करते हैं उनकी आराधना के लिए करते हैं | अंधविश्वास इन दोनों से बिलकुल अलग होता है परन्तु प्रायः इन्ही के सन्दर्भ में प्रयोग होता है | अंधविश्वास का अर्थ है किसी चीज़ पर अँधा विशवास करना |

बेटे के लिए बेटी की बलि देना पूर्ण रूप से अंधविश्वास है | मैं इसे अंधविश्वास भी नहीं पागलपन का नाम दूंगी | आजकल लोग तंत्र विद्या के नाम पर पाखंडी बाबा बने घुमते हैं और बेटे कि इच्छा रखने वालों को अपना शिकार बनाते हैं | चाहे धन की हो या जीवन की, बेटे कि चाह में लोग सब न्योछावर करने को तैयार हो जातें हैं और यहीं से अंधविश्वास के द्वार उनके लिए खुल जाते हैं | अँधा विशवास हमेशा नुक्सान दायक होता है, चाहे वह भगवान पर हो या फिर शैतान पर |
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