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अगर आपकी राशि में मंगल है तो इसका अर्थ

पंडित दयाराम शर्मा

@ Astrologer,Shiv shakti Jyotish Kendra | | Astrology

अगर कोई मांगलिक होता है ,तो उसको इस बात को लेकर काफी वहम होता है | जिसकी राशि में मंगल होता होता उसको लगता है,कही उसके विवाह में विलंब न हो जाए,अगर शादी हो भी गए तो कही वैवाहिक जीवन में कोई परेशानी न आ जाए,सम्बन्ध ठीक नहीं हुए तो कही कही रिश्ता टूट न जाए | वैसे मांगलिक होने के इतने प्रभाव नहीं होते जितने लोग परेशान होते है | ऐसा कहा जाता है कि अगर किसी की कुंडली में मंगल है अर्थात जिसको हम मांगलिक कहते है,तो उसकी शादी मांगलिक से ही होगी |


मंगल ग्रह के प्रभाव :-

मंगल ग्रह कुंडली में प्रथम भाव लग्न में हो तो मंगली योग बनता है | लग्न से चतुर्थ स्थान पर,फिर सातवे स्थान पर,आठवे और बारहवे भाव में मंगल हो तो मंगली योग बनता है | मगर सातवे स्थान के अलावा अन्य स्थानों से मंगल की सिर्फ दृष्टि होती है |


दृष्टि क्या है :-

सप्तम भाव पति या पत्नी का है | दृष्टि चार प्रकार से होती है एक चरण अर्थात - 25% दृष्टि,दो चरण अर्थात 50% दृष्टि,तीन चरण अर्थात 75% और पूरी दृष्टि अर्थात 100%, अगर मंगल सप्तम में ही विराजमान हो तो दृष्टि की जरुरत ही नहीं रह जाएगी |


यदि कोई मंगली है तो भी इसके प्रभाव ख़तम हो सकते है | जैसे सप्तम मंगल हो,दूसरी कुंडली में राहु या शनि सप्तम हो,तो भी दोष खत्म हो जाता है | अगर मंगल शुक्र ग्रह के साथ हो या शुक्र की राशि वर्ष या तुला में हो या उसका अंश कम हो तो भी मंगल दोष खतम हो जाता है | मंगल उच्च राशि अगर मकर राशि का हो तो भी अधिक प्रभावी रहेगा |


यदि राशि मेष या वृश्चिक हो तो कम प्रभाव युक्त रहेगा | शत्रु राशी,मित्र राशी,मार्गी वक्र इत्यादि के विचार के पश्चात् ही निर्णय हो सकता है |अर्थात जिससे शादी करो दोनों की कुंडली का मिलान एवं ग्रहो की स्थिति के पश्चात विवाह किया जा सकता है | जरुरी नहीं की दोनों ही मांगलिक हो | मांगलिक दोष निवारण के लिए जप-दान-पूजन का विधान भी है | साथ ही मंगल के कुप्रभाव एक पक्षीय अर्ताथ दूसरे की कुंडली में मंगल दोष को समाप्त करने वाला कोई भी ग्रह न हो,तो परिणाम कष्टदायक हो सकते है | जैसे बिना मंगली को कष्टकारक,स्वस्थ ख़राब,आपसी कलह,जनहानि,सम्बन्ध विच्छेद तक के योग बन सकते है |


ये सभी मंगल की स्थिति के औसर हो सकते है | मंगल ग्रह के कुप्रभाव स्वयं के लिए भी हूँ | कुंडली में 3-6-11 वे भाव में मंगल होने से सभी अरिष्ठ दूर करता है | मगर शुभराशी में न हो तो भाई बंधुओं से विहीन,रोग ग्रस्त,धन हमेशा चल रहेगा | अचल संपत्ति इत्यादि में बाधक रहेगा | ग्रहो में मंगल ग्रह भी शुभाशुभ फल प्रदान करता है,परन्तु स्थिति के अनुसार |