मुझे suicide का बहुत ख्याल आता है, में क्या करूं ? - LetsDiskuss
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मुझे suicide का बहुत ख्याल आता है, में क्या करूं ?

Kanchan Sharma

@ Content Writer | | others

आत्महत्या एक ऐसा शब्द है, जो अपने आप में किसी आतंक से कम नहीं है | इंसान की तकलीफ और उसका दुःख एक इसी शब्द में सिमट कर रह जाता है | अगर आपका कोई अपना इस शब्द का प्रयोग करें, तो आपको जितना दुःख होता है, उससे कहीं ज्यादा गुस्सा आता है |

 वास्तव में आत्महत्या करने का विचार बहुत ही मुश्किल है | कोई भी इंसान अपनी ख़ुशी से कभी भी मरना नहीं चाहता | परन्तु जब वो अपने जीवन से हार जाता है, या उसके सामने भविष्य का कोई रास्ता दिखाई नहीं देता है, तो अक्सर ऐसे विचार मन में आते हैं |

अगर आपको आत्महत्या करने का ख्याल आता है, तो आपको कुछ विशेष कामों में रूचि दिखाना चाहिए, जिससे आपको एहसास हो, कि आपका लिया हुआ फैसला ग़लत है | आपको एहसास करने का समय मिल जाएगा कि आपका एक ग़लत फैसला आपके अपनों को ज़िंदगी भर की तकलीफ़ दे सकता है |


क्या करें जब आत्महत्या का ख्याल आए ?


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- खुद की जिम्मेदारी समझें :-

अगर आपके दिमाग में आत्महत्या जैसा विचार आता है, तो आप सबसे पहले अपनी जिम्मेदारियों को याद करें | इस बात को हमेशा अपने दिमाग में बैठा लें, कि आपकी ज़िंदगी सिर्फ आपकी नहीं आपके अपनों की भी है | आपको इस बात का ख्याल हमेशा होना चाहिए, कि आपकी जरूरत आपके घर वालों को है | अगर आपको कुछ हो गया तो उनका क्या होगा ? अगर आप अपने दिमाग में इस बात को एक निश्चित स्थान देते हैं , तो यक़ीनन आपके दिमाग़ से आत्महत्या का ख्याल चला जाएगा |


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- विचार करें :-

जब भी आपके मन में आत्महत्या का ख्याल आएं तो आप अपने दिल से नहीं बल्कि दिमाग़ से सोचें | अपने परिवार के बारें में विचार करें | अगर आपको घर पर अच्छा नहीं लग रहा तो आप किसी ऐसे सुरक्षित स्थान पर जाएं, जहां पर जाकर आप ये विचार कर सकें, कि आप जो कर रहें हैं, क्या वह वास्तव में सही है ? जिस परेशानी की वजह से आपके मन में आत्महत्या का ख्याल आ रहा है, क्या उस परेशानी का कोई समाधान नहीं है ? इस बारें में आप विचार जरूर करें, और अपने जीवन की कुछ अच्छी बातों को याद करें |


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- अपने आप को प्राथमिकता दें :-

आत्महत्या का ख्याल अक्सर तब आता है, जब आप खुद से ज्यादा दूसरों को प्राथमिकता देते हैं | इंसान को अधिक बुरा तब लगता है, जब वह अपनों को प्राथमिकता देता है, और सामने वाला इंसान आपकी और आपके द्वारा दी गई प्राथमिकता को नहीं समझता, या फिर आपके भावना को ठेश पहुंचता है | आपकी जरूरत पड़ने पर आप सभी का साथ देते हैं, परन्तु जब आपको किसी की जरूरत होती है,तो आपका साथ कोई नहीं देता | इससे स्वाभाविक है कि आपको बहुत बुरा लगता है | परन्तु यदि आप इस बात को नकारात्मक की जगह सकारात्मक देखें तो आपके मन में ये विचार आएगा की आपको किसी भी काम के लिए किसी की जरूरत नहीं है | आप अपने आप में पूरी दुनिया है, और इसके लिए यह जरुरी है, कि आप खुद को प्राथमिकता दें | आप औरों के साथ-साथ खुद के लिए भी योजनाएं बनाएं, अपने लिए जीना शुरू करें |


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- अपने लिए ईमानदार बने :-

आप इस बात पर जरूर विचार करें, कि आप कितने ईमानदार हैं | क्योकि आपकी ईमानदारी ही आपके अच्छे और बुरे विचारों को आपके दिल और दिमाग़ में स्थान देती है | सबसे पहले आपको अपने प्रति ईमानदार बनना होगा | यदि आप अपने प्रति ईमानदार नहीं हैं, तो आप कभी किसी के लिए ईमानदार नहीं हो सकते और न ही आप भरोसा कर सकते हैं | जब आप अपने आप पर भरोसा नहीं कर पाते तो खुद को हारा हुआ महसूस करते हैं | इसके कारण अक्सर लोगों के मन में आत्महत्या की भावना जागृत होती है | आपको खुद के लिए ईमानदार बनना जरुरी है, तभी आप आत्महत्या जैसे बुरे ख्याल से दूर हो सकते हैं |



- बाहर निकलें :-

आत्महत्या के ख्याल से छुटकारा पाने का सबसे अच्छा तरीका का है, बाहर निकलना | यहां बहार निकलने का तात्पर्य सिर्फ घर से बहार निकलना नहीं है | बल्कि यहाँ बहार निकलने का तात्पर्य उन सभी नकारात्मक चीज़ों से बहार निकलने से है, जो आपके मन में आत्महत्या जैसे बुरे विचार लेकर आते हैं | आपको उस दलदल से बाहर निकलना होगा जो आपको अंधेरों में अपनी और खींच रहा है | यदि आप खुद को घर में बंद रखेंगे तो आपको केवल वो चार दीवारें दिखेंगी और घुटन महसूस होगी | बाहर निकलकर ही आप उस विशाल आसमान को देख पायंगे जिसके बाद आपको उसको चुने की चाहत होगी और अपने जीवन का महत्व दिखेगा,फूल पत्तियां,पेड़ पक्षी, बाहर की खुली हवा, आपमें एक बार फिर जीवन जीने की चाह भर जाएगी |


Ghanshyam Sonwani

सुंदर 


Sweety Sharma

बहुत ही सुन्दर जवाब है आपका