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बाल विवाह - एक कुप्रथा

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बाल विवाह - एक ऐसी सामजिक कुरीति है जिसका  नाश कोई नही कर सका है। हम  एक एसे समाज में रहते है जहाँ बाल विवाह होना आम बात है। बाल विवाह केवल भारत में ही नही अपितु पूरे सम्पुर्ण विश्व में व्याप्त एक ऐसी प्रथा है जो अंदर ही अंदर हमारे समाज को खा गई है। भारत मे 40% बाल विवाह होते है। वही केरल राज्य जिसे विश्व का सबसे साक्षर राज्य माना जाता हैं वहा भी यह प्रथा आज भी ज़िंदा है। बिहार मे बाल विवाह सबसे ज्यादा होते है वहा 60% तक बाल विवाह होते है। 

क्या है बाल विवाह -

बाल विवाह वह है जिसमे दो अपरिपक्व, इक दूसरे से बिल्कुल अंजान दो व्यक्तियो को एक ऐसे बंधन में बांध दिया जाता हैं जिसका उनको कोई ज्ञान नही होता खेलने कूदने की उम्र मे उन्हे एक ऐसी जिम्मेदारी दे दी जाती है जिसका उनको कोई ज्ञान नही होता है। और अंत में जब वह बड़े होते है तो उन्हबाल विवाह - एक कुप्रथा उस रिश्ते निभाने के लिए जोर दििया जाता है जिसका नतीजा तलाक होता है। 

बाल विवाह के दुष्परिणाम -

 बाल विवाह के केवल दुष्परिणाम ही है क्यू कि इसमे दो ऐसे लोगो को बाँध बाँध दिया जाता हैं जो एक दूसरे से पूरी तरह अंजान होते है कच्ची उम्र मे उन्हे पक्के बंधन में बाँध दिया जाता हैं फिर जब वह धीरें धीरे बढते है तो उनके विचार भी बदलते हैं फिर वह इस अन चाहे रिश्ते में नही रहना चाहते। उसका असर उनके रिश्ते पर पड़ता है फिर घरेलू हिंसा, मार पिट, कम उम्र मे माँ बनना, तलाक जैसे कई मुसीबतो का समना करना पड़ता है। 

बाल विवाह रोकने के प्रयास -

बाल विवाह रोकने के लिए अनेको प्रयास किये गये पर इस प्रथा को रोकना नामुमकिन रहा है। पहले भी केशव चंद्र सेन, और राजा राम मोहन राय जैसे लोग आगे आये जिन्होंने ब्रिटिश सरकार से लड़ कर एक बिल पास करवाया जिसका नाम "स्पेशल मेरिज एक्ट" था जिसके अन्तर गत विवाह के लिए लड़के की उम्र 18 वर्ष तथा लड़की की उम्र 14 वर्ष निर्धारित की गई थी पर यह सफल नहीं हुआ। फिर इसमे थोड़ा सुधार करते हुए एक नया बिल पास किया गया जिसका नाम "चाइड मैरिज रिसट्रेंट " था के अन्तर गत लड़के की उम्र 21वर्ष तथा लड़की की उम्र 18 वर्ष तय की गई। यह भी सफल नहीं हुआ। फिर सरकार द्वारा कुछ कानून बनाए गए बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 जो अभी अस्तित्व में है को कायम रखने का प्रयास सरकार कर रही हैं। 

क्यो होते है बाल विवाह-

1- माँ बाप जब बच्चों को पालने में असमरथ होते है तो वह उनका बाल विवाह कर देते है। 

2- किसी जमींदार से मोटा कर्ज लेने के बाद उसे ना चुका पाना भी एक मजबूरी हो सकती है। 

3- रुढिवादी होना

4- माँ बाप का अनपढ़ होना 

5- बेटियो को बोझ सम्झना। 

बाल विवाह रोकने के लिए अनेको प्रयास किये जा रहे है कई जगह मीडिया वाले इसमे अहम योगदान दे रहे है।  जागरूकता अभीयान चलाए जा रहे है, शिक्षा का प्रसार किया जा रहा है। गरीबी का उनमूलन किया जा रहा है। 

 

बाल विवाह एक ऐसी कुरीति है जिसका नष्ट होना बहोत आवश्यक है। हर उस बालिका के लिए जो अपने जीवन में कुछ करना चाहती अपने सपनो को पुरा करना चाहती है। उन ऐसी बलिकाओ के लिए इसका नाश होना जरूरी है। इसमे जो बाल विवाह करवाये वो भी अपराधी कहलाते है और जो इस विवाह मे सम्मिलित होते है वह भी इस अपराध का हिस्सा माने जाते है। 

चलो अब शुरुवात करे बाल विवाह का नाश करे।