दहेज प्रथा- एक सामजिक प्रथा

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दहेज एक सोच है। जो अच्छी भी हो सकती है और बुरी भी। अच्छी इसलिए क्योकि समाज में हर व्यक्ति ऐसी सोच नही रखता की दहेज लेना है। समाज में बहोत सारी प्रथाओ का प्रचलन है। उनमे से एक हैदहेज प्रथा ।

पुराने समय में बाप जो भी अपनी बेटी को उपहार के रूप मे या कह सकते हैं कि अपने आशीर्वाद के रूप में जो भी देता था वर पक्ष उसे खुशी खुशी ले लेता था। परंतु आज इस प्रथा ने एक भयावह रूप धारण कर लिया है। आज बेटी की कीमत लगती है कि वह दहेज लाती है उसके हिसाब से उसकी खुशी होती है।आज वर पक्ष अपनी सुविधा के अनुसार दहेज लेता है। वह यह बिल्कुल नही देखता कि एक बाप की क्या हैसियत है। वह उसकी मांग को पुरा कर भी पाऐगा भी या नही। एक बाप एक बेटी की शादी में अपने जीवन भर की कमाई लगा देता है और हर एक कोशिश करता है की वर पक्ष को शिकायत का एक भी कारण ना मिले। पिता बेटी को हैर एक खुशी देने की कोशिश करता है।

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आकड़ो के अनुसार अधिकतर लड़कियो का विवाह 13 वर्ष की आयु में ही हो जाता है क्योकि वह कम पढ़ी लिखी होती हैं जिससे उनका दहेज उनकी पढ़ाई और आयु के हिसाब से कम होता है। माता पिता गरीब होने के कारण लड़कियो का ब्याह कम उम्र मे कर देते है। वर पक्ष कन्या देख कर विवाह नही करता वह यह देख कर विवाह करता है की पिता कितना दहेज दे रहा है। आज वर पक्ष को कार, ए. सी, फ्रीज, टी. वी, कूलर, मोटर बाइक , सोने के जेवर, या नगद रुपये जेसे बड़े दहेज का लोभ होता है वह चाहता है की हर बाप अपनी बेटी को इतना दहेज दे। जितना दहेज उतनी यनकी बेटी खुश। जितना कम दहेज उतनी कम खुशी। दहेज के अभाव मे योग्य कन्या आयो ग्य वरो को सोप दी जाती है। लोग धन देकर लड़की खरीद लेते हैं ऐसे में पारिवारिक जीवन सुखद नही बन पता है। ऐसे मे गरीब घर के माता पिता अपनी लड़की का विवाह नही कर पाते है क्योकी लड़के वाले उन्ही परिवार मे विवाह करना चाहते हैं जो अच्छा दहेज दे सकता है। फिर इससे एक कुरीति जन्म लेती है कन्या भ्रूण हत्या। गरीब माता पिता जो इस प्रथा से बचाना चाहते हैं वह पहले ही अल्ट्रासाउण्ड करवा कर बेटियो को गर्भ में ही मार देते है। और बेटे को जन्म को बढ़ावा देते है ताकि कोई लड़की से अच्छा दहेज ले कर अपनी हालात में सुधार ला सके।

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प्राचीन काल में सम्पुर्ण सम्पति पुत्रो की होती थी इसलिए पिता अपनी सम्पति मे से कुछ हिस्सा दहेज के रूप मे अपनी बेटी को देता था यह उसके लिए आशीर्वाद स्वरूप होती थीं और पिता उसको अपना धर्म समझता था पर आज यह ना तो धर्म है और ना आशीर्वाद यह एक लोभन है। जो वर पक्ष अपना दहेज की माग कर के दिखाते है। महगाई भी दहेज लेने का बड़ा कारण बनता जा रहा है क्योकी विवाह मे अच्छी खासी मोटी रकम लगती हैं जो वर पक्ष दहेज के रूप में पूरी करता है। वर्तमान में दहेज प्रथा एक कुप्रथा साबीत हुई है जिसमे केवल माता पिता ही पिसते है। दहेज ना देने पर लड़की को मार पिट, घरेलू हिंसा, तलाक, आदि जेसी संसस्याओ का सामना करना पड़ता है। कुछ लड़किया इसी डर से की उनके माता पिता दहेज ना दे पाये तो, वह आत्म हत्या तक को अपना लेती है। और यह प्रथा हर एक जाती, धर्म मे की जाती है।

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" दहेज मांगने वालो को भिख दे, बेटी नही। "

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