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मोदी जी ने भारतीय रेल क्या कर दिया काम तमाम

Pravesh Chauhan

@ pravesh chauhan BA(honours) journaliam | | news-current-topics

आरटीआई से हुआ खुलासा

•मोदी सरकार के कार्यकाल में सबसे ज्यादा रेल हादसे हुए

•3591 ट्रेनें रद्द करके सरकार साबित क्या करना चाहती थी?

•ट्रेन रद्द करने की वजह से यात्रा करने वालों में आई भारी गिरावट 

भारतीय रेल भारत की जीवन रेखा है. 81 मिलियन यात्रियों को ढ़ोने वाली भारतीय रेलवे चीन के बाद दुनिया का चौथा सबसे बड़ा नेटवर्क है जाहिर है ,भारतीय रेलवे का यह नेटवर्क कोई 5 साल में नहीं बना है भारतीय रेलवे के विकास की एक सतत प्रक्रिया रही है मोदी सरकार ने रेलवे विकास को लेकर बहुत सारे दावे किए हैं आइए देखते हैं कि उनकी सच्चाई क्या है ?

2014 से 15 के दौरान भारतीय रेल में 135 दुर्घटनाएं हुई. लेकिन धीरे-धीरे 2017 से अब तक यह संख्या घटकर 73 हो गई| जैसा कि मंत्रालय द्वारा 28 नवंबर 2018 को दिए आरटीआई जवाब से पता चलता है तो क्या दुर्घटनाओं की संख्या में कमी आई कि मोदी सरकार ने अपने  प्रयासों से  घटनाओं को रोक दिया, या बेहतर तकनीक का इस्तेमाल हुआ? नहीं| दुर्घटनाओं की संख्या में आई कमी के पीछे अद्भुत बाजीगरी है

ट्रेनों को कैंसिल करो और दुर्घटनाओं में कमी पाओ

26 दिसंबर 2018 को भारतीय रेलवे से मिली सूचना के मुताबिक 2014-15 के दौरान जहां 3591 रेलगाड़ी को रद्द किया गया था वही 2017-18 के दौरान इसमें 6 गुना की बढ़ोतरी हुई. यानी 2017-18 के दौरान कैंसिल ट्रेनों की संख्या 21053 हो गई. इसका मतलब यह है कि यदि आप ट्रेक पर ट्रेन ही नहीं चलाते हैं तो जाहिर है कि कोई दुर्घटना नहीं होगी यह आंकड़े 26 दिसंबर 2018 को लोकसभा में राज्य मंत्री श्री राजेंद्र गोयल के जवाब से भी साबित होता है. एक लिखित जवाब में उन्होंने संसद को बताया कि 2013-14 के दौरान भारतीय रेल में यात्रा करने वाले यात्रियों की संख्या 8317 मिलियन थी . जो 2016-17 तक घटकर 8116 मिलियन हो गई है . यानी केवल 3 साल की अवधि में 201 मिलियन यात्रियों की कमी आई .इतना ही नहीं इकोनामिक टाइम्स की एक खबर के मुताबिक 2017-18 में लगभग 30% ट्रेनें चल रही थी और यह साल दर साल बढ़ती जा रही है.|


नए ट्रेक कितने बिछे

एक अन्य कारक को रेलवे विकास का एक संकेत माना जा सकता है| केवल 2017-18 के दौरान ही लगभग 4087 किलोमीटर रेल ट्रैक का विद्युतीकरण किया गया और सरकार ने अपने कार्यकाल के पहले 3 साल बर्बाद कर दिए| रेल विकास का महत्वपूर्ण बिंदु नई रेल लाइन बिछाना है| भारतीय रेलवे के पास एकल ट्रैक का एक विशाल नेटवर्क है| इसलिए इसका दौहराकरन एक मुख्य काम है| लेकिन मोदी सरकार ने किस दिशा में कोई खास उपलब्धि हासिल नहीं की| 2016-17 में जहां सरकार ने 953 किलोमीटर रेल लाइन बिछाई . वही यह 2017-18 में घटकर 409 किलोमीटर रह गया.अब मोदी शासन में प्रतिदिन औसतन 1.75 किलोमीटर ट्रैक बिछाने का दावा कोई बड़ी उपलब्धि तो नहीं मानी जा सकती है|

एलआईसी का निवेश कहां है

पैसे के बिना कुछ नहीं हो सकता, तो सवाल है कि भारतीय रेल के विकास के लिए मोदी सरकार ने कहां से कितना पैसा जुटाया? 11 मार्च 2015 को प्रेस सूचना ब्यूरो,भारत सरकार द्वारा जारी विज्ञप्ति में कहा गया था कि एलआईसी भारतीय रेलवे में अब तक का उच्चतम निवेश, 1.5 लाख करोड़ रुपए का निवेश करने जा रही है. और यह निवेश 5 वर्षों के भीतर होगा 27 अक्टूबर 2015 को रेल मंत्रालय ने एलआईसी से 2000 करोड़ की पहली किस्त प्राप्त करने की बात स्वीकार की है. इतने महत्वपूर्ण निवेश की वर्तमान स्थिति जानने के लिए एक आरटीआई डाली गई .27 फरवरी2019 को irfc जवाब मिला कि lic से अब तक 16,200 करोड़ मिले हैं यानी तय राशि का अब तक केवल 10.5% ही जारी किया गया है.यहां पर एक बार फिर से मोदी सरकार के दावे की सच्चाई सामने आती है. प्रचार और जमीनी वास्तविकता के बीच एक बड़ा अंतर देखा जा सकता है|
यह सारे आंकड़े आरटीआई से प्राप्त किये गए है.अब आप समझ सकते हैं कि मोदी सरकार द्वारा रेलो को लेकर बड़े-बड़े वादे और किए गए कार्यों में कितना अंतर है आप समझ चुके होंगे|
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