Advertisement

Advertisement banner

Advertisement

Advertisement banner

Advertisement

Advertisement banner

UPSC क्या है? परीक्षा, योग्यता और पदों की पूरी जानकारी

A

| Posted on May 13, 2022


जब मैं पहली बार किसी से यूपीएससी के बारे में सुना था तो मेरे दिमाग में बस यही आया था कि ये कोई बहुत बड़ी चीज़ है और इसे पास करने वाले लोग बहुत तेज़ होते हैं। उस वक्त मुझे इसका पूरा नाम भी नहीं पता था। धीरे धीरे जब समझ आया तो लगा कि अरे इसमें इतना डरने वाला क्या है, समझना तो बहुत आसान है।

तो अगर आप भी पहली बार यूपीएससी के बारे में पढ़ रहे हैं, तो बिल्कुल सही जगह आए हैं। यहाँ सब कुछ एकदम सीधे शब्दों में बताया है, कोई घुमाव फिराव नहीं।

Article image

यूपीएससी का मतलब क्या होता है?

यूपीएससी का पूरा नाम है संघ लोक सेवा आयोग। अंग्रेजी में इसे यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन कहते हैं। इसमें संघ का मतलब केंद्र सरकार से है, लोक सेवा का मतलब सरकारी काम से है और आयोग एक ऐसी समिति को कहते हैं जो भर्ती का काम देखे। बस इतना ही। इसे याद रखो क्योंकि परीक्षाओं में भी यही पूछा जाता है और आम बातचीत में भी लोग पूछते हैं।

ये संस्था उन लोगों को चुनती है जो देश के सबसे ऊँचे सरकारी पदों पर काम करते हैं। जब किसी जिले में कोई कलेक्टर होता है, जब कोई बड़ा पुलिस अफसर तैनात होता है, जब भारत का कोई अफसर किसी दूसरे देश में भेजा जाता है तो वो सब यूपीएससी से ही निकले होते हैं।

यूपीएससी कब से है?

यूपीएससी की शुरुआत 1 अक्टूबर 1926 को हुई थी। उस वक्त देश में अंग्रेजों का राज था और उन्हें सरकारी काम के लिए एक भर्ती संस्था चाहिए थी। उन्होंने लोक सेवा आयोग बनाया।

1947 में देश आजाद हुआ। 1950 में हमारा संविधान लागू हुआ। तब इस संस्था को संविधान में जगह दी गई और इसका नाम हुआ संघ लोक सेवा आयोग। इसे संविधान के अनुच्छेद 315-323 के तहत बनाया गया।

इसका दफ्तर नई दिल्ली में है और अगर कभी परीक्षा से जुड़ी कोई जानकारी चाहिए तो upsc.gov.in पर जाओ। वहाँ सब कुछ मिल जाता है। ये संस्था पूरी तरह आज़ाद है।

एक बात जो सबसे पहले जाननी चाहिए वो ये है कि यूपीएससी किसी सरकार या मंत्री के दबाव में नहीं आती। इसके अध्यक्ष और सदस्यों को राष्ट्रपति नियुक्त करते हैं और एक बार नियुक्त होने के बाद उन्हें आसानी से हटाया नहीं जा सकता। यही वजह है कि इस परीक्षा पर लोगों का इतना भरोसा है। यहाँ कोई जुगाड़ काम नहीं आता। बस मेहनत काम आती है। और यही चीज़ लाखों युवाओं को इस परीक्षा की तरफ खींचती है।

यूपीएससी का काम क्या है?

बहुत लोग सोचते हैं कि यूपीएससी बस परीक्षा लेती है, लेकिन इसके काम इससे कहीं ज्यादा हैं।

केंद्र सरकार के ग्रेड A और ग्रेड B के पदों के लिए भर्ती नियम बनाना और उनमें बदलाव करना यूपीएससी का काम है। बड़े अधिकारियों के प्रमोशन और तबादलों के मामलों में सरकार को सलाह देना भी इसी के हाथ में है। अनुशासन के मामलों में भी यूपीएससी की राय ली जाती है। और हर साल एक रिपोर्ट राष्ट्रपति को दी जाती है जो बाद में संसद में भी पेश होती है।

यूपीएससी के अंदर कौन कौन से पद आते हैं

यूपीएससी में सिर्फ आईएएस नहीं आती, इसके दायरे में कई सेवाएँ हैं।

  • भारतीय प्रशासनिक सेवा यानी आईएएस वाले जिले के कलेक्टर और डीएम बनते हैं। ये सबसे चर्चित सेवा है।
  • भारतीय पुलिस सेवा यानी आईपीएस वाले बड़े पुलिस अधिकारी बनते हैं जैसे एसपी, डीआईजी।
  • भारतीय विदेश सेवा यानी आईएफएस वाले दूसरे देशों में भारत का दूतावास संभालते हैं।
  • भारतीय राजस्व सेवा यानी आईआरएस वाले आयकर और सीमा शुल्क से जुड़े बड़े पद संभालते हैं।
  • भारतीय वन सेवा वाले जंगल और पर्यावरण की देखरेख करते हैं।

इनके अलावा भी दर्जनों सेवाएँ हैं जिनमें सिविल सेवा परीक्षा के जरिए जाया जा सकता है।

यूपीएससी की परीक्षाएँ कौन-कौन सी हैं?

  • सिविल सेवा परीक्षा सबसे बड़ी और सबसे मशहूर है। इसी से आईएएस, आईपीएस, आईएफएस मिलते हैं।
  • भारतीय वन सेवा परीक्षा वन विभाग के अधिकारियों के लिए होती है।
  • केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल परीक्षा सीआरपीएफ और बीएसएफ जैसे बलों में सहायक कमांडेंट के लिए होती है।
  • राष्ट्रीय रक्षा अकादमी परीक्षा उन युवाओं के लिए है जो सेना, नौसेना या वायुसेना में जाना चाहते हैं।
  • इंजीनियरिंग सेवा परीक्षा और संयुक्त चिकित्सा सेवा परीक्षा भी यूपीएससी ही लेती है।

सिविल सेवा परीक्षा के तीन हिस्से:

चूँकि सिविल सेवा परीक्षा सबसे ज्यादा पूछी जाती है, तो इसे थोड़ा और समझते हैं।

  1. पहला हिस्सा है प्रारंभिक परीक्षा। इसमें दो पर्चे होते हैं, दोनों बहुविकल्पीय हैं। पहला सामान्य अध्ययन का और दूसरा सिविल सेवा अभिरुचि का। ये बस छँटाई के लिए होता है, इसके नंबर अंतिम मेरिट में नहीं जुड़ते।
  2. दूसरा हिस्सा है मुख्य परीक्षा। इसमें नौ पर्चे होते हैं और सब लिखित। यहाँ लंबे उत्तर लिखने होते हैं। यही असली मैदान है।
  3. तीसरा हिस्सा है साक्षात्कार। इसे व्यक्तित्व परीक्षण भी कहते हैं। करीब 45 मिनट की बातचीत होती है जिसमें आपकी सोच और समझ परखी जाती है।

तीनों के नंबर मिलाकर अंतिम मेरिट बनती है और उसी से तय होता है कि कौन सी सेवा मिलेगी।

परीक्षा के लिए क्या चाहिए:

  • शिक्षा की बात करें तो किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक होना काफी है। कला हो, विज्ञान हो या वाणिज्य, कोई भी विषय चलता है।
  • उम्र की बात करें तो सामान्य वर्ग के लिए 21 से 32 साल होनी चाहिए। पिछड़े वर्ग को 3 साल की छूट मिलती है और अनुसूचित जाति व जनजाति को 5 साल की।
  • प्रयासों की बात करें तो सामान्य वर्ग 6 बार दे सकता है, पिछड़ा वर्ग 9 बार और अनुसूचित जाति व जनजाति उम्र सीमा तक।

यूपीएससी और राज्य आयोग में फर्क:

उत्तर प्रदेश में रहते हो तो यूपीपीएससी का नाम जरूर सुना होगा। बिहार में बीपीएससी और राजस्थान में आरपीएससी। ये सब राज्य के अपने आयोग हैं।

यूपीएससी केंद्र सरकार की नौकरियाँ देती है जो पूरे देश के लिए होती हैं। राज्य आयोग सिर्फ अपने राज्य की नौकरियाँ देते हैं। डिप्टी कलेक्टर बनना हो तो राज्य आयोग की परीक्षा देनी होगी। आईएएस यानी जिला कलेक्टर बनना हो तो यूपीएससी ही एकमात्र रास्ता है।

एक सच जो जानना जरूरी है:

हर साल करीब 10 लाख लोग यूपीएससी की प्रारंभिक परीक्षा देते हैं। और चुने जाते हैं एक हजार के आसपास लोग। ये सुनकर डर लगता है, लेकिन सोचो तो ये उतना अजीब भी नहीं है। जो लोग निकलते हैं, वे कोई अलग जाति के नहीं होते। वो भी हमारी आपकी तरह ही पढ़ते हैं, खाते पीते हैं, थकते हैं। फर्क बस इतना होता है कि उन्होंने हार मानने से मना कर दिया। तैयारी लंबी है, मुश्किल है। कुछ लोग 3 साल लगाते हैं, कुछ 5 साल। लेकिन जो सही रास्ते पर चलते हैं वो एक न एक दिन पहुँचते जरूर हैं।

Faqs

Q1 यूपीएससी का हिंदी में पूरा नाम क्या है?
यूपीएससी का हिंदी में पूरा नाम संघ लोक सेवा आयोग है। ये भारत की एक संवैधानिक संस्था है जो केंद्र सरकार के ऊँचे पदों पर भर्ती का काम करती है।
Q2यूपीएससी की स्थापना कब हुई?
यूपीएससी की स्थापना 1 अक्टूबर 1926 को हुई थी। उस वक्त इसका नाम लोक सेवा आयोग था। 1950 में संविधान लागू होने के बाद इसे संघ लोक सेवा आयोग कहा जाने लगा।
Q3यूपीएससी की परीक्षा कितनी बार दे सकते हैं?
ये आपकी वर्ग पर निर्भर है। सामान्य वर्ग 6 बार, पिछड़ा वर्ग 9 बार और अनुसूचित जाति व जनजाति उम्र सीमा तक परीक्षा दे सकते हैं।
Q4यूपीएससी और यूपीपीएससी में क्या अंतर है?
यूपीएससी केंद्र सरकार के पदों के लिए है और यूपीपीएससी उत्तर प्रदेश राज्य के पदों के लिए। आईएएस बनना है तो यूपीएससी, और राज्य सेवा में जाना है तो यूपीपीएससी।
Q5क्या बिना कोचिंग के यूपीएससी पास हो सकती है?
हाँ, बिल्कुल हो सकती है। हर साल कई उम्मीदवार बिना कोचिंग के भी परीक्षा पास करते हैं। सही किताबें, अखबार पढ़ने की आदत और पुराने प्रश्न पत्रों का अभ्यास ये सब मिलाकर काफी हैं।
Q6यूपीएससी के लिए न्यूनतम शिक्षा क्या होनी चाहिए?
किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक यानी ग्रेजुएशन की डिग्री होनी चाहिए। विषय कोई भी हो सकता है।
Q7यूपीएससी और पीएससी में क्या फर्क होता है?
यूपीएससी केंद्र सरकार के लिए भर्ती करता है जैसे आईएएस आईपीएस आईएफएस वगैरह। वहीं पीएससी यानी लोक सेवा आयोग हर राज्य का अपना होता है जो राज्य स्तर के अधिकारियों की भर्ती करता है। जैसे उत्तर प्रदेश में यूपीपीएससी है, मध्य प्रदेश में एमपीपीएससी है।
Q8क्या यूपीएससी की परीक्षा हिंदी माध्यम से दे सकते हैं?
हाँ बिल्कुल दे सकते हैं। यूपीएससी की मुख्य परीक्षा में उम्मीदवार हिंदी या अंग्रेजी या फिर संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किसी भी भारतीय भाषा में उत्तर लिख सकते हैं। हिंदी माध्यम से भी हर साल बहुत से उम्मीदवार सफल होते हैं इसलिए भाषा को लेकर कोई घबराहट नहीं होनी चाहिए।

निष्कर्ष:

तो दोस्तों, यूपीएससी कोई सामान्य परीक्षा नहीं है। यह देश की सबसे कठिन और सबसे प्रतिष्ठित परीक्षाओं में से एक है। हर साल दस लाख से ज़्यादा उम्मीदवार इसमें बैठते हैं और बमुश्किल एक हज़ार के आसपास लोग सफल होते हैं। इसलिए अगर आप इसकी तैयारी कर रहे हैं तो दिल लगाकर करें। मेहनत का कोई विकल्प नहीं है। एक बार यूपीएससी पास हो गए तो ज़िंदगी बदल जाती है यह बात तो तय है। 

उम्मीद है यह जानकारी आपके काम आई होगी। अपने दोस्तों के साथ भी शेयर करें जो यूपीएससी की तैयारी कर रहे हों।

0 Comments