इस पहेली का सही उत्तर छाया (Shadow) है।
अगर पहेली के संकेतों को ध्यान से देखें, तो इसका सबसे बड़ा संकेत है – "मैं चलते हुए किसी चीज़ को नहीं छूता, पर सबको दिखा देता हूँ।" जब कोई व्यक्ति चलता है, तो उसकी छाया भी उसके साथ चलती हुई दिखाई देती है। वह किसी वस्तु को छूती नहीं है, लेकिन उसका आकार साफ़ नज़र आता है। यही वजह है कि यह संकेत सीधे छाया की ओर इशारा करता है।
अब बात करते हैं पहली पंक्ति की – "रात में आता हूँ, दिन में छिप जाता हूँ।" यह पंक्ति पहली नज़र में थोड़ा भ्रम पैदा करती है। दरअसल, पहेलियों में ऐसे संकेत अक्सर जानबूझकर दिए जाते हैं ताकि उत्तर तुरंत समझ में न आए। इस पहेली की असली पहचान दूसरी पंक्ति से होती है, क्योंकि वही छाया की सबसे खास विशेषता बताती है।

अगर रोज़मर्रा की ज़िंदगी की बात करें, तो छाया हमें लगभग हर दिन देखने को मिलती है। सुबह और शाम के समय यह लंबी दिखाई देती है, जबकि दोपहर में छोटी हो जाती है। जब हम चलते या दौड़ते हैं, तो ऐसा लगता है कि छाया भी हमारे साथ चल रही है। जैसे ही हम रुकते हैं, वह भी वहीं रुक जाती है। वास्तव में, छाया प्रकाश के रुकने से बनने वाला एक दृश्य प्रभाव है, इसलिए उसे न छुआ जा सकता है और न ही पकड़ा जा सकता है।
निष्कर्ष: इस पहेली का सही जवाब छाया (Shadow) है। यह किसी वस्तु को छुए बिना उसका आकार दिखाती है और प्रकाश पड़ने पर उसी के अनुसार दिखाई देती है। इसलिए पहेली में दिए गए संकेतों से सबसे सटीक उत्तर छाया ही है।
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