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Ruchika Dutta· 8 साल पहले
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शनि अमावस्या की पूजा कैसे की जाती हैं ?

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जवाब दिया गया10/26/26

जब अमावस्या की गहरी रात और शनिदेव का दिन एक साथ आ जाएँ तो श्रद्धालुओं के लिए यह तिथि विशेष बन जाती है। शनि अमावस्या उस दिन को कहते हैं जब अमावस्या शनिवार के दिन पड़ती है, और मान्यता है कि इस दिन की गई पूजा शनि दोष की शांति तथा जीवन में अनुशासन लाने में सहायक होती है।

शनि अमावस्या का महत्व

हिंदू मान्यता में शनिदेव को कर्मफल दाता और न्याय का देवता कहा जाता है। परंपरा के अनुसार उनकी पूजा से कठिनाइयों में धैर्य, मेहनत का फल और बुरे कर्मों से बचने की प्रेरणा मिलती है। ये धार्मिक मान्यताएँ हैं, और इनका वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।

पूजा की तैयारी

सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें, जिनमें गहरे नीले या काले रंग को शनि की पूजा के लिए उपयुक्त माना जाता है। पूजा स्थान को अच्छी तरह साफ़ करके शनिदेव की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।

पूजा सामग्री

  • सरसों का तेल या तिल का तेल और दीपक।

  • काले तिल, काला कपड़ा और नीले फूल।

  • उड़द की दाल, लौह वस्तु और प्रसाद।

  • धूप, अगरबत्ती और जल।

पूजा विधि

1. शनिदेव की प्रतिमा के सामने तेल का दीपक जलाएँ।

2. पुष्प, काले तिल और प्रसाद अर्पित करें।

3. शनि मंत्र, जैसे "ॐ शं शनैश्चराय नमः", का जप करें।

4. शनि चालीसा या हनुमान चालीसा का पाठ करें, क्योंकि परंपरा में हनुमान जी की उपासना भी शनि से राहत के लिए बताई जाती है।

5. अंत में आरती करके प्रसाद बाँटें।

पीपल और तेल दान

शनिवार को पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना शुभ माना जाता है। कई लोग तेल में अपना चेहरा देखकर उसे दान करते हैं, जिसे छाया दान कहा जाता है।

दान और सेवा

इस दिन ज़रूरतमंदों को काला कंबल, काले तिल, उड़द की दाल या भोजन दान करना पुण्य माना जाता है। परंपरा के अनुसार शनिदेव श्रम करने वालों, सफ़ाई कर्मचारियों और ग़रीबों की सेवा से प्रसन्न होते हैं, इसलिए ऐसे लोगों के प्रति सम्मान सबसे अच्छी पूजा है।

क्या न करें

इस दिन झूठ, छल और किसी का अपमान करने से बचना चाहिए। कई लोग मांसाहार और मदिरा से भी दूरी बनाते हैं।

विवेक का संतुलन

कोई भी पूजा विधि क्षेत्र और परिवार की परंपरा के अनुसार बदलती है, इसलिए अपने कुल के बुज़ुर्गों या जानकार पुरोहित से पूछना उपयोगी रहता है।

शनि की सबसे बड़ी शिक्षा

शनिदेव की कथाएँ सिखाती हैं कि समय पर किए गए अच्छे कर्म ही सबसे बड़ा और स्थायी सहारा हैं। पूजा के साथ अनुशासन, ईमानदारी और परिश्रम अपनाने से जीवन अधिक संतुलित भी बनता है।

Ramesh Kumar
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जवाब दिया गया12/22/22

जैसा कि हम सभी जानते हैं कि शनि भगवान कलयुग के देवता माने जाते हैं और इनकी हर शनिवार को पूजा की जाती है। लेकिन शनि अमावस्या के दिन पूजा करने के लिए हमें सुबह जल्दी उठकर स्नान करके स्वच्छ वस्त्र को धारण करना चाहिए। इसके बाद आप शनि मंदिर जाकर शनि भगवान को सरसों का तेल चढ़ाएं और उनके सामने सरसोंके तेल में काली तिल डालकर दीप जलाएं। शनि भगवान को भोग लगाने के लिए आप काली तिल के लड्डू या उड़द की दाल की खिचड़ी का भोग लगाना बहुत ही अच्छा होता है। शनि अमावस्या के दिन शनि चालीसा का पाठ भी कराना चाहिए।लेख की तस्वीर

preeti  patel
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जवाब दिया गया12/22/22

यदि आप भी शनि अमावस्या के दिन पूजा पाठ करना चाहते हैं तो इसके लिए मैं आपको शनि अमावस्या की पूजा विधि के बारे में बताऊंगी। शनि अमावस्या के दिन शनि देव की पूजा पूरे विधि विधान के साथ की जाती है इस दिन आपको सुबह उठकर स्नान करना होगा साफ-सुथरे वस्त्र पहनने होंगे इसके बाद शनिदेव के मंदिर पर जाकर शनिदेव के समक्ष सरसों के तेल से दीपक जलाना होगा और दीपक में काले तिल अवश्य डालें इसके बाद शनिदेव के मंदिर में बैठकर शनिदेव का जप करें जब करने के बाद शनिवार के दिन पीपल के वृक्ष के नीचे दीपक जलाना भी शुभ माना जाता है।लेख की तस्वीर

Krishna Patel
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जवाब दिया गया12/22/22

शनि अमावस्या पर अधिकतर लोग शनिदेव की पूजा करते है,शनिदेव का पूजन करने के लिए सबसे पहले नहा धो कर पवित्र हो जाये और तन-मन से पवित्र होने के बाद जल, फूल लेकर शनि मंदिर जाएं और उन्हें वहां पर सरसों का तेल, काली उड़द, ​काला तिल, लोहे की की , शमी पत्र, काला वस्त्र तथा जल आदि चढ़ाए, जिससे आपके जीवन मे जो भी कष्ट होंगे शनिदेव दूर करेंगे तथा शनिदेव मन्दिर जाने परआटे का चौमुखा दीया जलाकर ॐ शं शनैश्चराय नमः मंत्र का अधिक से अधिक जप करें।लेख की तस्वीर

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जवाब दिया गया04/29/20

हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को शिवरात्रि होती है, जिसका व्रत रखा जाता है| इसके व्रत के दिन स्वच्छ वस्त्र धारण करना चाहिए और साफ़ आसन पर बैठकर भगवान शिव का पूजन करना चाहिए| उनकी पूजा और मंत्र का जाप करना चाहिए| इस दिन भगवान शंकर का पूजन करना शुभ फलदायी होता है|


हिंदू शास्त्रों के अनुसार प्रत्येक महीने को शिवरात्रि आती है| धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चतुर्दशी तिथि के स्वामी भगवान शिव को माना जाते हैं| पौराणिक मान्यताओं के अनुसार दिव्य ज्योर्तिलिंग का उदय इसी दिन हुआ था इसलिए महीने की हर चतुर्दशी तिथि शिवरात्रि मनाई जाती है|


इमेज -गूगल


शिव चतुर्दशी में भगवान शिव का पूजन उनके परिवार के सभी सदस्यों के साथ किया जाता है| इस दिन शिवलिंग के अभिषेक में जल, दूध, दही, शुद्ध घी, शहद, चीनी, गंगाजल तथा गन्ने के रस का प्रयोग किया जाता है| जब उन्हें सभी चीज़ों से स्नान करवाया जाता है तो उसके बाद बेलपत्र, समीपत्र, कुशा तथा दूब चढ़ाया जाता है| इसेक बाद भांग, धतूरा तथा श्रीफल चढ़ा कर शिव को भोग लगाया जाता है|


जब तक पूजन चलता है “ॐ नमः शिवाय” का जाप करना चाहिए| उसके बाद पूजन और शिव की कथा और शिव चालीसा करनी चाहिए| इसके बाद 108 बार महाम्रतुन्जय मंत्र का जाप करना चाहिए| “महाम्रतुन्जय मंत्रॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्‌। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्‌॥“ इसके बाद हवन और उसके बाद आरती कर के पूजा संपन्न करना चाहिए|


महामृत्युंजय मंत्र का जाप करते समय कुछ बातों का ध्यान रखें:


- सबसे पहले महामृत्युंजय मंत्र में प्रयोग किये जाने वाले शब्दों का उच्चारण ठीक से और शुद्धता के साथ करें।


- मंत्र का जाप करते समय निश्चित संख्या में ही करें , न कम करें और न ज्यादा करें|


- पूर्व दिशा की तरफ मुख कर के ही जाप करें|


- मंत्र का जाप करने के लिए एक जगह निश्चित कर लें|


- मंत्र करते समय अपने मन को कहीं दूसरी तरफ न भटकने दें|


- बैठ कर जाप करें|


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जवाब दिया गया08/11/18

हिन्दू तिथि के आधार पर अमावस्या अंतिम तिथि होती हैं | जैसा कि पहले बताया गया हैं, कि एक महीने में 30 दिन होते हैं, और 30 दिनों में 15-15 दिनों में तिथि बँटी हुई हैं | अमावस्या तिथि बहुत अधिक महत्व रखती हैं, क्योकि यह कृष्णा पक्ष का आखरी दिन होता हैं | अमावस्या के दिन चन्द्रमा पूर्णतः दिखना बंद हो जाता हैं | ज्योतिष के अनुसार अमावस्या के दिन दान देने से मनुष्य को भरपूर लाभ मिलता हैं |


शनि अमावस्या इसिलए भी महत्वपूर्ण होती हैं, क्योकिं इस अमावस्या के बाद पेड़-पौधों को जीवन दान मिल जाता हैं | गर्मी कम हो जाती हैं, और मानव जीवन पहले से सुरक्षित हो जाता हैं | इस अमावस्या को हरियाली अमावस्या भी कहा जा सकता हैं, क्योकि इस इस हरियाली की पूजा की जाती हैं |

शनि अमावस्या के दिन पीपल के पेड़ की पूजा की जाती है, आटे के मालपुऐ का भोग लगाया जाता हैं, पीपल के पेड़ की 108 परिक्रमा की जाती हैं, साथ फेरे धागे के पीपल के पेड़ के लगाए जाते हैं | यह व्रत साल में एक बार आता हैं, और इस व्रत के आगमन से अब बाकी आने वाले त्योहारों का पता चलता हैं, अर्थात ये पता चलता हैं, कि त्यौहार शुरू हो गए हैं |

सावन अमावस्या पर लग रहा है सूर्य ग्रहण :-

इस वर्ष का आखिरी सूर्य ग्रहण आज अर्थात सावन अमावस्या को पड़ा हैं | आज का सूर्य ग्रहण भारत के समयानुसार दोपहर 1 बजकर 32 मिनट से शुरू होकर 3 बजकर 30 मिनिट तक रहेगा | यह इस वर्ष का आखिरी सूर्य ग्रहण हैं, जिसका असर भारत में बिलकुल नहीं हैं |


(Courtesy : patrika )

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