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Sks Jain

| Updated on July 26, 2023 | education

दुख ही जीवन की कथा रही क्या कहूं जो नहीं कही इस पंक्ति का आशय स्पष्ट करें?

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@aanchalsingh1985 | Posted on October 13, 2021

दुख ही जीवन की कथा रही है ये सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला की कहावत है इसमें श्रंगार रस पाया जाता है दुख ही जीवन मे कथा रही है सबसे ज्यादा हमारे जीवन मे संघर्ष का बहुत ही महत्व है हमारा जीवन संघर्षो से भरा होता है और संघर्ष के बिना कुछ हासिल नहीं है ज़ब दुख हमारे जीवन मे आता है तब हमें संघर्ष करना ही पड़ता है। और जिसने संघर्ष छोड़ दिया वह अपने जीवन को आगे नहीं बड़ा सकता है और आगे कुछ हासिल नहीं कर पाएगा.।Article image

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@vandnadahiya7717 | Posted on July 25, 2023

दोस्तों दुख ही जीवन की कथा रही क्या कहूं जो नहीं कही इस पंक्ति का आशय स्पष्ट है हम आपको स्पष्ट करेंगे यह पंडित सूर्यकांत त्रिपाठी द्वारा रचित है और इस पंक्ति का आशय है कि हमारे जीवन में कष्ट आता ही रहता है हमारा सारा जीवन संघर्ष से भरा होता है यदि हम संघर्ष करते हैं तभी हम अपने जीवन में कुछ हासिल कर पाएंगे यदि हम अपने जीवन में संघर्ष नहीं कर रहे थे हम कुछ भी हासिल नहीं कर पाएंगे। ऐसे रसूल खान त्रिपाठी जी ने कहा है कि दुख ही जीवन की कथा रही है।

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@krishnapatel8792 | Posted on July 26, 2023

आज हम आपको एक पंक्ति का आशय बताएंगे कि क्या होता है पंक्ति है कि दुख ही जीवन की कथा रही क्या कहूं जो नहीं कही इस कहावत को श्रीकांत त्रिपाठी निराला जी के द्वारा लिखा गया है इस पंक्ति में श्रृंगार रस पाया जाता है दुख ही जीवन में कथा रही सबसे ज्यादा हमारे जीवन में संघर्ष का बहुत ही ज्यादा महत्व है मनुष्य का जीवन संघर्षों से भरा होता है क्योंकि संघर्ष के बिना कुछ भी हासिल नहीं किया जा सकता और जब मनुष्य के जीवन में दुख आता है तो मनुष्य को संघर्ष करना ही पड़ता है।

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