
नवरात्री का सातवां दिन कालरात्रि माता का है,कालरात्रि माता का जन्म किस कारण हुआ ?

जैसे कि आप सभी जानते हैं कि नवरात्रि के सातवें दिन माता कालरात्रि आने की माता काली की पूजा की जाती है माता कालरात्रि का नाम काली माता इसलिए पड़ा क्योंकि इनका रंग काला था। मां काली के इस रूप को वीरता और साहस का रूप माना जाता है। और माता कालरात्रि का जन्म असुरों के राजा रक्तबीज का वध करने के लिए हुआ था। इसलिए देवी कालरात्रि की पूजा करने से हर पाप से मुक्ति मिलती है। जीवन में हमेशा खुशियां बनी रहती है। मां कालरात्रि को गुड से बनी चीजों का भोग लगाया जाता है। क्योंकि मां कालरात्रि को मीठा खाना बहुत पसंद है।
Goddess Kalaratri का प्रकट होना अधर्म और दुष्ट शक्तियों के विनाश के लिए माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार जब राक्षस शुंभ, निशुंभ और रक्तबीज जैसे असुरों ने देवताओं और संसार में आतंक फैलाया, तब Goddess Durga ने अपने उग्र रूप कालरात्रि को धारण किया। उनका रूप अत्यंत भयंकर, काले वर्ण वाला और अग्नि समान तेजस्वी बताया गया है। कालरात्रि माता ने दानवों का संहार कर धर्म की रक्षा की। नवरात्रि के सातवें दिन उनकी पूजा भय, नकारात्मक शक्तियों और बाधाओं को दूर करने के लिए की जाती है। भक्त उन्हें साहस, सुरक्षा और शक्ति प्रदान करने वाली देवी मानते हैं।
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