13 अप्रैल 1919 एक ऐसा दिन था जब मानवता तार-तार हो गई थी । इस दिन ने कई सारी साँसों को एक साथ रोक दिया। ये दिन जलियावाला बाग़ हत्या कांड के लिए जाना जाता है । इस दिन हुए हत्याकांड में कई मासूमों ने अपनी जान गवा दी , कई माँ की कोख उजड़ गई, कई बच्चे अनाथ हो गए , कई सुहागन विधवा हो गई और कई बहनों की राखियां बस उनके भाइयों के इंतज़ार में रह गई।
जलिया वाला बाग़ हत्या कांड के बारें में कुछ अनसुने तथ्य क्या हैं ?
जलियांवाला बाग हत्याकांड 13 अप्रैल 1919 को बैसाखी के दिन हुआ था। उस समय लोग जलियांवाला बाग मैं अंग्रेजी हुकूमत द्वारा पास की गई रोलेट एक्ट के विरोध में शांतिपूर्ण ढंग से बैठे हुए थे तो वहीं एक अंग्रेजी अफसर ने वहां पर उनके ऊपर अंधाधुंध गोलियां चलवा दी जिससे अधिकारिक रिकॉर्ड के हिसाब से 379 लोग मारे गए थे पर वही मदन मोहन मालवीय जी के अनुसार 1300 लोगों मरने की सूचना है।इससे संपूर्ण भारतवर्ष में एक नई क्रांति ने जन्म लिया और पूरे भारत में जगह-जगह जलियांवाला हत्याकांड का विरोध हुआ लोगों ने सत्याग्रह शुरू किया जगह-जगह रैलियां , शांतिपूर्ण ढंग से सभी जगह विरोध हुआ और इसी के साथ हमारे रविंद्र नाथ टैगोर जीने अंग्रेजी हुकूमत द्वारा दिया गया अपना नाइटहुड का टाइटल भी लौटा दिया। अंग्रेजी हुकूमत द्वारा इस मामले में हंटर कमीशन को जांच के लिए विठाला पर वह गांधी जी के शब्दों के अनुसार केवल कागजों में ही सीमित थी उसकी कोई गतिविधि ना हुई ना ही दोषी अफसर जनरल ओ डायर के खिलाफ कोई कार्यवाही हुई बल्कि उसे इंग्लैंड में सम्मान से नवाजा ।
इसी हत्याकांड से लोगोो के दिल में अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ एक ज्वाला धधक गई । जिसकेे बाद गांधी जीी ने असहयोग आंदोलन को शुरू कियाााा और जगह जगह पर अंग्रेजी वस्तुओं का बहिष्कार हुआ और खादीी वस्त्रों कोोो अपनाया ग।या





