2014 भारत के विकास की यात्रा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जाता है। हालांकि, यह कहना सही नहीं होगा कि भारत की प्रगति केवल 2014 के बाद शुरू हुई। इससे पहले भी देश ने सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, शिक्षा, सड़क, कृषि और अर्थव्यवस्था जैसे कई क्षेत्रों में मजबूत आधार तैयार कर लिया था। 2014 के बाद इन प्रयासों को आगे बढ़ाने के साथ कई नई योजनाएं और सुधार भी लागू किए गए।
डिजिटल क्षेत्र में सबसे बड़ा बदलाव देखने को मिला। आधार और इंटरनेट बैंकिंग पहले से मौजूद थे, लेकिन डिजिटल इंडिया, UPI, DigiLocker, FASTag और DBT जैसी पहलों ने सरकारी सेवाओं और डिजिटल भुगतान को आम लोगों के लिए अधिक आसान बना दिया।

आधारभूत ढांचे के क्षेत्र में भी एक्सप्रेसवे, रेलवे आधुनिकीकरण, नए एयरपोर्ट और 5G नेटवर्क के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया गया। आर्थिक सुधारों के तहत GST, IBC, मेक इन इंडिया, स्टार्टअप इंडिया और PLI जैसी योजनाएं शुरू की गईं। वहीं नोटबंदी और GST के प्रभावों को लेकर अलग-अलग विशेषज्ञों की अलग-अलग राय रही है।
सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में जन धन योजना, उज्ज्वला योजना, आयुष्मान भारत, स्वच्छ भारत मिशन, जल जीवन मिशन और प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी पहलें शुरू की गईं। विदेश नीति में भारत ने G20 की मेजबानी की और कई देशों के साथ रणनीतिक साझेदारी को मजबूत किया। रक्षा क्षेत्र में भी स्वदेशी उत्पादन और सीमा क्षेत्रों के विकास पर अधिक जोर दिया गया।
निष्कर्ष: 2014 से पहले और 2014 के बाद, दोनों अवधियों ने भारत के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। पहले के वर्षों में कई क्षेत्रों की नींव रखी गई, जबकि 2014 के बाद डिजिटल परिवर्तन, आधारभूत ढांचे और कई नई योजनाओं का विस्तार तेज़ी से हुआ। इसलिए दोनों अवधियों का मूल्यांकन संतुलित और तथ्यों के आधार पर करना अधिक उचित है।
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