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shweta rajput· 6 साल पहले
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90 के दशक के बच्चों और आज के बच्चों के बीच भारत में क्या अंतर हैं?

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जवाब दिया गया12/04/21

नब्बे के दशक और आज के लड़कों में समय ने बहुत फ़र्क ला दिया है। और अगर भारत की बात करें तो इसमें फ़र्क का सबसे बड़ा कारक रहा सूचना-क्रांति का वह दौर, जिसने बच्चों ही नहीं प्रत्येक के जीवन में आमूल बदलाव ला दिया। उस दौर में अपना बचपना गुज़ार चुके लोग आज भी उन दिनों के बारे में सोचकर अपनी यादें ताज़ा कर सकते हैं।

यह नब्बे के दशक का ही दौर था, जबकि आज की तरह हर हाथ में मोबाइल नहीं हुआ करती थी, और न ही इंटरनेट सेवा तक सबकी पहुंच होती थी। लोगबाग दूर रहने वाले अपने दोस्तों या परिवार के लोगों से संपर्क करने के लिये बेसिक यानी लैंडलाईन फोन की मदद लेते थे, और वह भी सबके यहां नहीं लगा होता था। सो, हममें से बहुतेरे इसके लिये पड़ोस का नंबर देते थे बात करने के लिये, वो भी हिचकते हुये। हालांकि चिठ्ठी-पत्री का चलन भी ख़त्म नहीं हुआ था। और 'प्रेमी-जोड़ों' के लिये तो यह एक मज़बूरी ही हो गई थी। क्योंकि इसमें रंगे हाथ पकड़ जाने का ख़तरा बहुत होता था, और तब बड़ी फ़जीहत भी होती थी। लोग आज की तरह जब चाहे एकदूसरे से संपर्क नहीं कर सकते थे। 'कंप्यूटर युग' भी अपने शैशवावस्था, यानी शुरुआती दौर में ही था। न तो आम लोगों में उसका सामान्य ज्ञान ही था, और उसके साथ समस्यायें भी बहुत थीं।

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यह नब्बे के दशक की ही बात है जब टीवी पर 'दूरदर्शन' के एकाध चैनल ही दिखते थे, और वो भी चौबीसों घंटे नहीं। जब टीवी के साथ ही छत पर भी एक एंटीना लगाना पड़ता था, और छत पर खड़े होकर शहर का नज़ारा देखने पर सारा शहर एंटीना से भरा हुआ सा नज़र आता था। किसी-किसी के यहां बड़ी छतरी वाला 'डिश-एंटीना' लगा होता था, तो वह कई चैनल का आनंद भी ले सकता था। और आसपास के बाल-गोपाल उस डिश से अपने एंटीना को भी चुपके से 'कैच' कराने के लिये भी तरह-तरह के उपाय आज़माया करते थे।

बच्चों के बीच कॉमिक की किताबों का चलन भी तब काफी था। फिर वो चाचा-चौधरी और साबू की हो या कि नागराज या बांकेलाल, बच्चे इन्हें पढ़ते हुये गर्मी की छुट्टी बिता देते। और कभी-कभी तो स्कूल या घर पर इन्हें अपने पाठ्यक्रम की किताबों में छुपाकर पढ़ते हुये पकड़ भी जाते, तब धुनाई भी खूब होती थी। आजकल की तरह बाल-अधिकारों को लेकर न तो इतनी जागरूकता ही थी, और न वैसा कानून। वे गलतियां करने पर अच्छी तरह पीटे जाते, फिर वो घर हो या स्कूल। हां, तब भी 'मां' ज़ुरूर कभी-कभार उन्हें बचाने को चंडी-रूप धर सामने आ जाया करती थी।

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हालांकि बच्चों को टीवी-फिल्में वगैरह देखने की इतनी आज़ादी भी नहीं थी जैसी कि आज है, क्योंकि यह पढ़ाई-लिखाई में खासतौर पर बाधक माने जाते। फिर भी वे सप्ताह में एक दो फिल्में जो आतीं उसे देखने के लिये येन-केन जतन करके बड़ों को मना लिया करते थे। अक्सर रविवार सुबह को आने वाले टीवी सीरियल जैसे रामायण, महाभारत, चंद्रकांता, मोग्ली, चाणक्य, परमवीरचक्र आदि की लोकप्रियता सर्वाधिक हुआ करती थी। और बीच में आने वाले 'कॉमर्शियल्स' जैसे निरमा, पारले, लाइफ़बॉय, कोलगेट या कम्प्लान के प्रचार भी सबको खूब भाते।

गांवों या दूर-दराज़ के इलाकों में तो उपरोक्त सीरियल लोग झुंडों में बैठकर देखा करते थे, क्योंकि सबके यहां टीवी न थी। गाने सुनने के लिये भी आज की तरह बहुत संसाधन न थे, और अधिकतर 'ऑडियो-कैसेट्स' ही चलन में थे। जिसकी रील बीच में कहीं फंस जाने पर उसमें पेन-पेंसिल डालकर घुमाना होता था। आज की तरह 'ईयरफोन' तो बहुत दूर की बात थी तब। हालांकि तब रेडियो भी खासे चलन में थे। और गांवों में या दूर-दराज़ के इलाकों में कुछ वरिष्ठ लोग समाचार सुनने के लिये एक निश्चित समय पर रेडियो को घेर कर बैठ जाया करते थे। उस समय बच्चों को बीच में बोलने की खास मनाही होती। केवल समाचार-वाचक की एक गंभीर सी आवाज़ ही गूंजती रहती उस दरमियान।

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पर जैसा कि प्रकृति या कहें समय का शाश्वत नियम है, आज वह बदलाव आ चुका है। अब तो रेडियो क्या टीवी भी चलन से बाहर हो रही है। इंटरनेट का युग अपने शबाब पर है। पढ़ाई तक उसी से हो रही है। गूगल-गुरू के आगे सब गुरू जैसे फेल हो गये हैं। बच्चों पर हाथ उठाना भी गैरकानूनी है, फिर वो घर हो या स्कूल। बच्चा-बच्चा मोबाइल से खेल रहा है। उनसे कुछ भी छिपाना आसान नहीं। और अधिकतर तो मोबाइल और इंटरनेट के ऐसे माहिर हैं कि कोई साधारण वयस्क उनका मुकाबला न कर सके। कागजी किताबें 'पीडीएफ' में बदली जा रही हैं।

यानी इन तीन दशकों में वक़्त कई करवट ले चुका है। और सूचना-क्रांति के बाद से वक़्त की रफ़्तार भी बहुत तेज हो चुकी है। विज्ञान ने इस बीच बहुत तरक्की कर ली है। यह बात और है कि हर युग की कुछ खासियतों के साथ ही उसमें कुछ अनिवार्य कमियां भी छिपी होती हैं। पर उम्मीद है कि अपनी आने वाली पीढ़ियों के वास्ते हम समयानुसार वह संतुलन बनाये रखेंगे जिसकी आज दरकार है।

Ramesh Kumar
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जवाब दिया गया12/03/21

90 के दशक के बच्चो और आज के बच्चो के बीच बहुत अधिक फर्क देखने को मिलता है। क्योंकि 90 दशक के बच्चे ऐसे थे कि एक ही कपडे मे दोनों भाई बहन अर्जेस्ट करके पहन लेते थे,और पहले के समय इतना विकास नहीं हुआ था। पहले समय मे मोबाइल फ़ोन इतने ज्यादा नहीं चलते थे और पहले समय मे अच्छे -अच्छे खिलौनो का भी निर्माण नहीं हुआ था। पहले समय मे बच्चे अपने माता -पिता का कहना मानते थे यदि उनके माता पिता बोल दे कि यही बैठना है,तो बच्चे वही बैठते थे और 90दशक के समय के बच्चे के पास इतने खिलौने नहीं होते थे कि वह घर रह कर अकेले खेल सके ऐसे मे बच्चे बाहर जाकर अपने दोस्तों के साथ फुटबॉल, गुल्ली डंडा, बंटी आदि जैसे खेलो को खेलते थे। 90 दशक के बच्चे किसी चीज को लेकर बिल्कुल जिद नहीं करते थे अपनो से बड़ो की बाते सुनते थे और उनका आदर, सम्मान करते थे।

लेकिन वही बदलते समय के अनुसार आज के बच्चे कहे तो न्यू जनरेशन के बच्चे अपने से बड़े अपने दादा, दादी माता -पिता किसी की इज्जत करना नहीं जानते है। सिर्फ अपनी बात मनवाना जनते है, अपनी जिद के आगे किसी नहीं सुनते है उनको कोई मोबाइल पंसद आ गया तो उनको वो मोबाइल चाहिए ही चाहिए भले ही उनके माँ बाप पास उतने पैसे ना हो मोबाइल खरीदने के लेकिन बच्चो की जिद्द के आगे माँ बाप को झुकना ही पड़ता है। आज के समय के बच्चे ऐसे भी है उनके दोस्त कही बाहर हॉस्टल मे रहकर पढ़ाई कर रहे है तो उनको भी हॉस्टल ही जाना है क्योंकि वह अपनी जिद के आगे किसी की नहीं सुनते है आज कल का समय ही ऐसा है कि जिस उम्र मे बच्चो को पढ़ाई मे ध्यान लगाना चाहिए उस उम्र मे बच्चे दोस्तों साथ घूमना, मोबाइल, लैपटॉप मे अपना समय बर्बाद करते है। वही अपने मन की मनमानी हर एक चीज मे करते है अपने माँ बाप की बात ना मनाने की कसम खा के रखते है आज कल के बच्चे। अब के बच्चे जंक फ़ूड खाना अधिक पसंद करते है रोज -रोज घर खाना बिल्कुल पसंद नहीं आता है।

अत : स्पष्ट है कि हम कह सकते है कि 90 दशक के बच्चे और आज के बच्चो मे सिर्फ इतना फर्क है कि 90 दशक के बच्चे संस्कारी थे क्योंकि वह जो भी फैसला लेते थे अपने माता -पिता के आज्ञा का पालन करते हुए लेकिन आज कल बच्चे जो भी फैसले ले रहे खुद की मर्ज़ी से।

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जवाब दिया गया12/07/21

90 के दशक और आज के बच्चों मैं अंतर

90 के दशक के बच्चे बहुत ही समझदार होते थे। उन्हें खाना खाने, पढ़ने लिखने, खेलकूद, से मतलब रहता था। पहले ना तो मोबाइल का यूज ज्यादा होता था। ना ही ज्यादा टीवी देखते थे। किसी किसी के घर में टीवी रहती थी। आज पड़ोस में जाकर टीवी देखते थे। साथ मिल बैठकर देखते थे। पहले के बच्चे अपने माता-पिता की हर बात मानते थे। जिस से विवाह करने के लिए कहते बिना लड़की को देखे ही विवाह कर लेते थे। टेलीफोन का यूज़ हुआ करता था। वह भी किसी किसी के घर में होता था। यह बच्चे पढ़ाई में अधिक रूचि रखते थे। खेलकूद में भी, सूर्य उदय होने से पहले ही उठ जाते थे। ज्यादा बाजार का सामान नहीं खाते थे। जिस से कम बीमार पड़ते थे। पहले रेडियो में गाने सुनते थे।

अब के बच्चे ना तो टाइम पर सोना ना खाना, देर रात तक जागना फोन चलाना फिर सुबह 8:00 बजे उठना दिन-रात इंटरनेट में घुसे रहना अब पढ़ाई भी ऐसी होती है कि बच्चे 10वीं 12वीं पास हो जाते हैं पर बनता कुछ नहीं पहले ऐसा नहीं था। अब के बच्चे अपने मनपसंद की शादी करते हैं। मां बाप की इज्जत नहीं करते।लेख की तस्वीर

Krishna Patel
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जवाब दिया गया12/03/21

90 वाले दशक पहले तो सिंपल मोबाइल नोकिया के लिए रहते थे आप हर बच्चों को देखो तो एंड्राइड मोबाइल लिए रहते हैं। 90 के दशक पहले लिख लुका छिपाकर गेम खेला करते थे अब तो देखो फ्री फायर के फैन हो गए हैं। 90 के दशक बच्चे पहले दादा दादी नानी आदि से कहानी सुनते सुनते सो जाते थे और अब के बच्चों को देखो तो वेब सीरीज में लगे रहते हैं। 90 के दशक में पहले चूल्हे की रोटी में मैच लेते थे अब और आप के दशक के बच्चों को देखो कि गैस की रोटी खाते हैं.।लेख की तस्वीर

Aanchal Singh
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जवाब दिया गया10/14/24

1950 और 1960 के दशक ने विज्ञान, तकनीकी, और सामाजिक विकास के कई महत्वपूर्ण आविष्कारों को जन्म दिया। ये दशक न केवल तकनीकी नवाचारों के लिए प्रसिद्ध हैं, बल्कि उन्होंने समाज के विभिन्न पहलुओं को भी प्रभावित किया। इस लेख में हम इन दशकों में हुए प्रमुख आविष्कारों की चर्चा करेंगे, जो आज भी हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं।इन दशकों में हुए आविष्कारों ने न केवल व्यक्तिगत जीवन को प्रभावित किया, बल्कि वैश्विक स्तर पर समाज की संरचना और संस्कृति को भी बदल दिया। इसलिए यह आवश्यक है कि हम इन आविष्कारों को समझें और उनके प्रभावों का मूल्यांकन करें।

 

1950 और 1960 के दशक में क्या आविष्कार किया गया था - Letsdiskuss

 

विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आविष्कार

1. कंप्यूटर का विकास

कंप्यूटर विज्ञान का आधार बन गया, और इस दौरान पहले इलेक्ट्रॉनिक कंप्यूटर का निर्माण हुआ। 1940 के अंत में ENIAC (Electronic Numerical Integrator and Computer) का विकास हुआ, लेकिन 1950 के दशक में कंप्यूटरों ने तेजी से लोकप्रियता हासिल की। IBM ने अपने IBM 701 मॉडल को पेश किया, जो पहला व्यावसायिक कंप्यूटर था।कंप्यूटर की क्षमता और गति में वृद्धि ने गणना और डेटा प्रोसेसिंग को आसान बना दिया। इस दौरान प्रोग्रामिंग भाषाओं का विकास हुआ, जैसे FORTRAN और COBOL, जिसने कंप्यूटर विज्ञान को एक नया आयाम दिया।

 

A. ट्रांजिस्टर का आविष्कार

1950 के दशक में ट्रांजिस्टर का विकास हुआ, जो कंप्यूटर की दुनिया में एक महत्वपूर्ण मोड़ था। यह पहले के वैक्यूम ट्यूब्स की जगह ले लिया और इसे अधिक कुशल, छोटा, और विश्वसनीय बना दिया। ट्रांजिस्टर ने इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की लागत कम की और उन्हें अधिक सुलभ बनाया।

 

B. माइक्रोप्रोसेसर का उदय

1960 के दशक के अंत तक माइक्रोप्रोसेसर का विकास हुआ। यह एक एकल चिप पर सभी कंप्यूटिंग कार्यों को करने की क्षमता रखता था। इससे व्यक्तिगत कंप्यूटरों का युग शुरू हुआ, जिसने आम लोगों को कंप्यूटिंग शक्ति प्रदान की।

 

2. अंतरिक्ष अनुसंधान

स्पुतनिक-1 के प्रक्षेपण ने अंतरिक्ष अनुसंधान में एक नई दिशा दी। 1957 में सोवियत संघ द्वारा लॉन्च किया गया यह पहला मानव निर्मित उपग्रह था। इसने न केवल अंतरिक्ष की खोज की शुरुआत की, बल्कि अमेरिका और सोवियत संघ के बीच "स्पेस रेस" का आरंभ भी किया।

 

A. अपोलो कार्यक्रम

NASA ने अपने अपोलो कार्यक्रम की शुरुआत की, जिसमें अपोलो 11 ने 1969 में चंद्रमा पर पहले मानव को भेजा। यह मानवता के लिए एक ऐतिहासिक क्षण था। अपोलो कार्यक्रम ने न केवल वैज्ञानिक ज्ञान को बढ़ाया बल्कि अंतरिक्ष यात्रा की संभावनाओं को भी खोल दिया।

 

B. अंतरिक्ष स्टेशन

1960 के दशक में अंतरिक्ष स्टेशन के विचार पर भी काम शुरू हुआ। यह भविष्य में मानवता के लिए अंतरिक्ष में रहने की संभावनाओं को खोलने वाला था।

 

चिकित्सा विज्ञान में नवाचार

पेनिसिलिन और वैक्सीनेशन ने चिकित्सा क्षेत्र में क्रांति ला दी। पेनिसिलिन का उपयोग एंटीबायोटिक के रूप में हुआ, जिसने कई संक्रामक रोगों का इलाज संभव बनाया। इसके अलावा, पोलियो वैक्सीन का विकास भी इस दौरान हुआ, जिससे पोलियो जैसी बीमारी से सुरक्षा मिली।

 

A. आधुनिक चिकित्सा उपकरण

चिकित्सा उपकरणों में भी सुधार हुआ। एक्स-रे मशीनों और अल्ट्रासाउंड तकनीक ने रोगों की पहचान को सरल बना दिया। इसके अलावा, हृदय गति मॉनिटरिंग उपकरणों का विकास भी हुआ, जिसने सर्जरी और गहन चिकित्सा में मदद की।

 

B. मनोचिकित्सा में प्रगति

मनोचिकित्सा क्षेत्र में भी कई नवाचार हुए। नए मनोवैज्ञानिक उपचार विधियों जैसे कि व्यवहार चिकित्सा ने मानसिक स्वास्थ्य देखभाल को बेहतर बनाया।

 

1950 और 1960 के दशक में क्या आविष्कार किया गया था

 

घरेलू उपकरणों का आविष्कार

1. माइक्रोवेव ओवन

माइक्रोवेव ओवन ने खाना पकाने की प्रक्रिया को तेजी से बदल दिया। 1945 में पहली बार माइक्रोवेव तकनीक का उपयोग किया गया, लेकिन यह 1950 के दशक में आम लोगों के लिए उपलब्ध हुआ।

 

A. खाना पकाने की प्रक्रिया

इसने खाना पकाने की समयावधि को कम कर दिया और लोगों को ताजगी से भरे भोजन का आनंद लेने का अवसर दिया। माइक्रोवेव ओवन ने खाना गर्म करने और पकाने दोनों ही प्रक्रियाओं को सरल बना दिया।

 

2. वाशिंग मशीन

वाशिंग मशीन ने घरेलू कामकाज को आसान बनाया और महिलाओं की जीवनशैली में सुधार किया। पहले हाथ से कपड़े धोना एक कठिन कार्य था, लेकिन वाशिंग मशीन ने इसे सरल बना दिया।

 

A. स्वचालित वाशिंग मशीन

स्वचालित वाशिंग मशीनों का विकास हुआ, जिससे कपड़े धोने की प्रक्रिया पूरी तरह से स्वचालित हो गई। इससे समय बचा और महिलाओं को अन्य कार्यों पर ध्यान केंद्रित करने का अवसर मिला।

 

3. रेफ्रिजरेटर

रेफ्रिजरेटर ने खाद्य संरक्षण के तरीके को पूरी तरह से बदल दिया। इससे पहले, लोग खाद्य सामग्री को सुरक्षित रखने के लिए विभिन्न पारंपरिक तरीकों का उपयोग करते थे, लेकिन रेफ्रिजरेटर ने ताजगी बनाए रखने की प्रक्रिया को आसान बना दिया।

 

A. फ्रीजर तकनीक

फ्रीजर तकनीक ने खाद्य सामग्री को लंबे समय तक सुरक्षित रखने की क्षमता प्रदान की। इससे खाद्य बर्बादी कम हुई और लोग अधिक विविध आहार अपना सके।

 

परिवहन के क्षेत्र में परिवर्तन

1. हवाई यात्रा का विकास

जेट विमानों के आगमन ने हवाई यात्रा को सुलभ बनाया। पहले हवाई जहाज धीमे होते थे, लेकिन जेट इंजन तकनीक ने उड़ान समय को कम कर दिया।

 

A. अंतरराष्ट्रीय उड़ानें

इससे अंतरराष्ट्रीय यात्रा अधिक सामान्य हो गई और वैश्विक व्यापार एवं पर्यटन में वृद्धि हुई। एयरलाइंस कंपनियों ने नए मार्ग खोले जिससे यात्रियों को विभिन्न देशों तक पहुँचने का अवसर मिला।

 

2. ऑटोमोबाइल उद्योग में नवाचार

ऑटोमोबाइल उद्योग में नए मॉडल और तकनीकी सुधार हुए, जिससे यात्रा अधिक सुविधाजनक हुई। फोर्ड मोटर कंपनी ने अपने मॉडल T की सफलता के बाद कई नए मॉडलों को पेश किया।

 

A. सुरक्षा फीचर्स

इस दौरान सुरक्षा फीचर्स जैसे कि सीट बेल्ट्स और एयरबैग्स का विकास भी हुआ, जिससे सड़क पर यात्रा करना सुरक्षित हुआ। इसके अलावा, कारों में ईंधन दक्षता बढ़ाने वाले उपाय भी अपनाए गए।

 

3. रेलवे परिवहन में सुधार

रेलवे परिवहन प्रणाली में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल हुआ, जिससे यात्रा की गति बढ़ी। उच्च गति वाली ट्रेनें जैसे कि शिंकansen (जापान) ने रेलवे यात्रा को तेज़ और सुविधाजनक बना दिया।

 

A. इलेक्ट्रिफिकेशन

रेलवे नेटवर्क का इलेक्ट्रिफिकेशन हुआ, जिससे ट्रेनों की गति और दक्षता दोनों बढ़ीं। इससे रेलवे परिवहन अधिक पर्यावरण अनुकूल हो गया।

 

संचार के क्षेत्र में आविष्कार

1. टेलीविजन का प्रसार

टेलीविजन ने सूचना और मनोरंजन के नए माध्यम खोले। 1950 के दशक में टेलीविजन सेट्स आम हो गए और परिवारों के लिए एक महत्वपूर्ण मनोरंजन स्रोत बन गए।

 

A. रंगीन टेलीविजन

1960 के दशक तक रंगीन टेलीविजन सेट्स बाजार में आ गए, जिसने देखने का अनुभव पूरी तरह से बदल दिया।

 

2.  ट्रांजिस्टर रेडियो

ट्रांजिस्टर रेडियो ने संगीत और समाचारों को अधिक लोगों तक पहुँचाया। यह छोटा और पोर्टेबल था, जिससे लोग कहीं भी सुन सकते थे।

 

A. एफएम रेडियो

एफएम रेडियो प्रसारण तकनीक विकसित हुई, जिसने ध्वनि गुणवत्ता को बेहतर बनाया और संगीत श्रोताओं के लिए नए चैनल खोले।

 

3.  सैटेलाइट संचार

सैटेलाइट संचार ने वैश्विक संचार को संभव बनाया। पहले संचार उपग्रहों का प्रयोग 1960 के दशक में शुरू हुआ, जिसने दूरसंचार प्रणाली को पूरी तरह से बदल दिया।

 

A. संचार उपग्रह

संचार उपग्रहों जैसे कि Telstar ने लाइव प्रसारण संभव बनाया, जिससे लोग दुनिया भर से जुड़ पाए।

 

सामाजिक और सांस्कृतिक परिवर्तन

1. युवा संस्कृति का उदय

युवाओं की संस्कृति ने नए विचारों और आंदोलनों को जन्म दिया। यह दशक युवा संस्कृति के लिए महत्वपूर्ण था, जिसमें रॉक एंड रोल संगीत, बूमर जनरेशन, और हिप्पी आंदोलन शामिल थे।

 

A. संगीत आंदोलन

रॉक एंड रोल संगीत ने युवा पीढ़ी को प्रभावित किया; एल्विस प्रेस्ली जैसे कलाकारों ने युवा संस्कृति पर गहरा प्रभाव डाला।

 

2. कला और साहित्य में नवाचार

इस दशक में कला और साहित्य में कई महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए जो आज भी प्रभावी हैं। पॉप आर्ट जैसे नए कला आंदोलन उभरे जिसमें एंडी वारहोल जैसे कलाकार शामिल थे।

 

A. लघु कथा साहित्य

लघु कथा साहित्य भी इस दौरान लोकप्रिय हुआ; लेखक जैसे कि रेमंड कार्वर ने इसे नई ऊँचाइयों पर पहुँचाया।

 

3. महिला अधिकारों की बढ़ती जागरूकता

महिलाओं के अधिकारों पर ध्यान केंद्रित करने वाले कई आंदोलन शुरू हुए। फेमिनिज़्म की लहर ने महिलाओं को समानता के लिए संघर्ष करने हेतु प्रेरित किया।

 

A. महिला संगठन

महिला संगठनों जैसे कि "नेशनल ऑर्गनाइजेशन फॉर वुमन" (NOW) ने महिलाओं के अधिकारों पर ध्यान केंद्रित किया एवं उन्हें संगठित किया ताकि वे अपनी आवाज उठा सकें।

 

निष्कर्ष

1950 और 1960 के दशक में हुए आविष्कारों ने न केवल तकनीकी विकास को बढ़ावा दिया बल्कि सामाजिक संरचना को भी प्रभावित किया। ये नवाचार आज भी हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं; चाहे वह कंप्यूटर हो या घरेलू उपकरण—हर चीज़ हमारे जीवन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।इन दशकों का प्रभाव आज भी महसूस किया जा सकता है; इसलिए यह समझना आवश्यक है कि ये आविष्कार कैसे हमारे भविष्य की दिशा निर्धारित करते हैं।

 

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जवाब दिया गया12/03/21

(1) 1990 के बच्चे अपना जीवन यापन बहुत ही साधारण तरीके से बिताते थे, आज के बच्चों का जीवन बहुत ही अच्छे से गुजरता है!

( 2)अगर पहले के बच्चे बीमार हो जाता थे तो उनके लिए डॉक्टर नहीं होते थे उन्हें घरेलू उपचार से ठीक किया जा सकता था!लेकिन आज के समय में छोटी-छोटी बीमारियों के लिए हमें डॉक्टर पर निर्भर रहना पड़ता है!

(3) पहले बच्चों को मक्का की रोटी ,चना आदि खिलाया जाता था!जिससे वह मजबूत रहते थे और वह चूल्हे का बना खाना खाते थे!लेकिन आज हम गैस लाइट के चूल्हे आदि से खाना पकाते हैं,जिसके कारण हमें कई सारी बीमारियों का सामना करना पड़ता है!

(4) पहले के बच्चे साधारण भोजन दाल चावल, रोटी सब्जी खाते थे!लेकिन आजकल के बच्चे पिज़्ज़ा बर्गर,चॉकलेट आदि खाते हैंलेख की तस्वीर

(5) पहले के बच्चों को गाना सुनने के लिए रेडियो का सहारा लेना पड़ता था! लेकिन आज के बच्चों के लिए अनेक प्रकार की न्यू टेक्नोलॉजी का उपयोग किया जाने लगा है जैसे म्यूजिक वीडियो टेलीविजन आदि!लेख की तस्वीर

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जवाब दिया गया12/03/21

(1) 1990 के दशक में बच्चों को झोपड़ी मैं रहना पड़ता था, लेकिन आज के बच्चों को रहने के लिए अच्छे खासे मकान और घर होते हैं!लेख की तस्वीर

(2) पहले के बच्चों के पास गिल्ली डंडा खेलने के अलावा और कोई गेम नहीं होते थे, लेकिन आज की जनरेशन के लिए अनेक प्रकार के खिलौने, वीडियो गेम्स इत्यादि होते हैं.
(3) पहले बच्चों को पढ़ने के लिए पास में स्कूल नहीं होती थी, उन्हें कई किलोमीटर पैदल स्कूल जाना पड़ता था! लेकिन आज के बच्चों के लिए वैन,बस और साइकिल इत्यादि की सुविधा मिलती है.

(4) पहले बच्चों को पढ़ाई करने के लिए स्मार्टफोन आईपैड आदि सुविधा नहीं होती थी!लेकिन आज की जनरेशन के बच्चों के लिए मोबाइल लैपटॉप कंप्यूटर इंटरनेट की सुविधा दी जाती है.

(5) अगर पहले के बच्चे बीमार हो जाता थे तो उनके लिए डॉक्टर नहीं होते थे उन्हें घरेलू उपचार से ठीक किया जा सकता था!लेकिन आज के समय में छोटी-छोटी बीमारियों के लिए हमें डॉक्टर पर निर्भर रहना पड़ता है.

(6) पहले बच्चों को मक्का की रोटी ,चना आदि खिलाया जाता था!जिससे वह मजबूत रहते थे और वह चूल्हे का बना खाना खाते थे!लेकिन आज हम गैस लाइट के चूल्हे आदि से खाना पकाते हैं,जिसके कारण हमें कई सारी बीमारियों का सामना करना पड़ता है.

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preeti  patel
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जवाब दिया गया12/03/21

90 के दशक और आज मे टेकनॉलाजी ने बहोत बड़ी जगह बनाई है । पहले के बच्चों के पास साधन कम थे तो वह खुश भी ज्यदा रहते थे सीमित खिलोने, सीमित जगह, होने की वजह से वह माँ, बाप जो बोलते थे वह उसे आज्ञा मानते थे लेकिन आज के बच्चे माँ बाप की बात नही सुनते वह उनसे बहस करते है। नई चीजों की मांग करते है। अपने खिलोने, और चीजों की तुलना दुसरो के खिलोने से करते है। इसका सबसे बड़ा कारण मोबाइल फोन भी है। 90 के दशक मे केवल सीमित लोगो के पास फोन था काम के हिसाब से मोबाइल का उपयोग होता था और आज हर घर मे हर व्यक्ति के पास खुद का मोबाइल फोन है यहा तक की बच्चों के भी अपने फोन है। ऐसे मे बच्चे मोबाइल मे क्या करते रहते है यह माँ बाप को पता भी नही होता। और बच्चे गलत संगत का शिकार होते रहते है। लेख की तस्वीर

komal Solanki
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