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kashish yadav· 3 years ago
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भारतीय शादियों में क्या रस्में हैं?

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Answered on03/16/26

आज हम जानेंगे कि भारतीय शादियों में कौन-कौन सी रस्में होती हैं। भारत में विवाह केवल दो लोगों का मिलन नहीं माना जाता, बल्कि यह दो परिवारों का संबंध भी माना जाता है। अलग-अलग क्षेत्रों और संस्कृतियों के अनुसार रस्मों में थोड़ा अंतर हो सकता है, लेकिन कई परंपराएं लगभग हर जगह देखने को मिलती हैं। भारतीय विवाह में कई धार्मिक और पारंपरिक रस्में निभाई जाती हैं, जो शादी को खास और यादगार बनाती हैं।

भारतीय शादी की प्रमुख रस्में यह हैं:

1. रोका या सगाई: इस रस्म में दोनों परिवार विवाह के रिश्ते को स्वीकार करते हैं।

2. मेहंदी: शादी से पहले दुल्हन के हाथों और पैरों पर मेहंदी लगाई जाती है।

3. हल्दी समारोह: दूल्हा-दुल्हन को हल्दी लगाकर शुभकामनाएं दी जाती हैं।

4. बारात और वरमाला: दूल्हा बारात लेकर आता है और दूल्हा-दुल्हन एक-दूसरे को वरमाला पहनाते हैं।

5. फेरे और विदाई: अग्नि के सामने फेरे लेकर विवाह पूर्ण होता है और फिर विदाई की रस्म होती है।

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Updated on03/16/26

भारतीय शादीयों मे शादी से पहले तिलक की रस्म जरूर की जाती है,यह शादी की सबसे पहली और जरूरी रस्म होती है, जो कि शादी से कुछ दिन पहले हो जाती है,तिलक की रस्म में दुल्हन के पिता या दूल्हे के माथे पर तिलक लगाते है और उसे भेंट में पैसे, नए वस्त्र, फल,मेवे और मिठाइयां दी जाती है। तिलक की रस्म होने के बाद शादी की अन्य तैयारियां शुरू की जाती है,लड़की के इधर लडके वाले आकर ओली डालने की रस्म पूरी करते है।

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Answered on02/11/23

भारतीय शादी में सबसे महत्वपूर्ण रस्मों में से एक सप्तपदी है, जो दूल्हा और दुल्हन द्वारा एक साथ उठाए गए सात कदम हैं। यह एक दूसरे के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का प्रतीक है। अन्य रस्मों में कन्यादान शामिल है, जिसमें दुल्हन का पिता उसे दूल्हे को विदा करता है, और हल्दी समारोह, जिसमें दूल्हा और दुल्हन दोनों को हल्दी के लेप से ढका जाता है।

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Updated on03/16/26

भारती शादी में बहुत सीरियस रसमे में होती है,

भारतीय विवाह समारोहों में सगाई, तिलक, संगीत, हल्दी, मेहंदी, शादी और रिसेप्शन जैसे कुछ सामान्य विवाह समारोह शामिल हैं।

सनातन धर्म में सद्गृहस्थ की, परिवार निर्माण की जिम्मेदारी उठाने के योग्य शारीरिक, मानसिक परिपक्वता आ जाने पर युवक-युवतियों का विवाह संस्कार कराया जाता है। भारतीय संस्कृति के अनुसार विवाह कोई शारीरिक या सामाजिक अनुबन्ध मात्र नहीं हैं, यहाँ दाम्पत्य को एक श्रेष्ठ आध्यात्मिक साधना का भी रूप दिया गया है। इसलिए कहा गया है 'धन्यो गृहस्थाश्रमः'। सद्गृहस्थ ही समाज को अनुकूल व्यवस्था एवं विकास में सहायक होने के साथ श्रेष्ठ नई पीढ़ी बनाने का भी कार्य करते हैं। वहीं अपने संसाधनों से ब्रह्मचर्य, वानप्रस्थ एवं सन्यास आश्रमों के साधकों को वांछित सहयोग देते रहते हैं। ऐसे सद्गृहस्थ बनाने के लिए विवाह को रूढ़ियों-कुरीतियों से मुक्त कराकर श्रेष्ठ संस्कार के रूप में पुनः प्रतिष्ठित करना आवश्यक है।

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Updated on05/20/26

हिन्दू धर्म में सभी ग्रहो को देव माना जाता है और सभी का अपना एक स्थान है | जितने भी ग्रह हिन्दू धर्म मे है उनका अपना अपना प्रकोप व फायदा है | ये ग्रह मानव जीवन मे उनके जन्म के साथ ही जुड़ जाते है | अब वो अच्छे है या बुरे ये उन ग्रहो की स्तिथि पर निर्भर होता है | आपके ग्रह व सितारे ही आपके वर्तमान व भविष्य तय करते है |

वैसे तो सभी ग्रह अपने आप मे महत्व रखते है परन्तु सबसे महत्वपूर्ण ग्रह शनि को माना जाता है | शनि का नाम आते ही लोगो के मन मे डर बैठ जाता है | पर उसके बाद भी लोग उसका उपाय नहीं करते वो अपनी लाइफ मे इतना व्यस्त होते है के उनको समय नहीं मिलता | परन्तु अगर उनकी लाइफ मे कुछ बुरा होता है तो वो भगवन को दोषी मानते है | शनि दोष भी कुंडली मिलाप में महत्वपूर्ण माना जाता है। यह जन्म के समय शनि की स्थिति पर निर्भर करता है।

शनि के प्रकोप से कैसे बचे :-

1 . शनि देव को प्रसन्न करने के लिए उनके इस श्लोक का जाप करे जिनमे उनके 10 नाम शामिल हो जाते है |

"कोणस्थ पिंगलो बभ्रु: कृष्णो रौद्रोन्तको यम:।

सौरि: शनैश्चरो मंद: पिप्पलादेन संस्तुत:।।"

2 . सुबह सूर्योदय से पूर्व पीपल के पेड़ पर जल चढ़ाए और सरसो के तेल का दिया लगाए |

3 . शाम सूर्य अस्त होने के बाद पीपल के पेड़ पर सरसो तेल का दिया जलाए |

4 . पुरुष वर्ग शनि देव के मंदिर जाकर उन पर सरसो तेल चढ़ा सकते है | परन्तु महिलाओ को ये अनुमति नहीं है |

5. शनिवार के दिन कुष्ट रोगियों को भोजन करवाए और काली दाल व सरसो तेल दान दे |

6. काले घोड़े की नाल की अंगूठी बना कर पहने |

7. मंगलवार हनुमान जी के सामने तिल के तेल का दिया जलने से भी शनि का प्रकोप काम होता है |

सावधानी :-

" एक बात का विशेष ध्यान दे शनि देव का पूजन केवल सूर्योदय से पहले और सूर्य अस्त के बाद ही करे ,ऐसा करने से शनि देव का प्रकोप आपकी राशि से कम हो जाएगा और आपको लाभ मिलेगा "

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Answered on10/04/23

दोस्तों आप सभी को पता ही है कि हिंदू धर्म में शादी की रस्मो का विशेष महत्व होता है। हिंदू धर्म में कभी भी जब शादी होती है वह पूरे रीति रिवाजों के साथ ही होती है। शादी होने से पहले तिलक की रस्म होती है जिसमें दुल्हन के पिता या भाई के द्वारा दूल्हे का तिलक किया जाता है। और दूल्हे को भेंट के रूप में पैसे और नय वस्त्र भी दिए जाते हैं फिर उसके बाद शादी का मुहूर्त बनता है। हर एक लड़की का सपना होता है कि उसके शादी में होने वाली सारी रस्मे को भी अच्छे से इंजॉय करें। शादी से पहलेमेहंदी, हल्दी और संगीत की रस्म होती है। मेहंदी के रस्म में दुल्हन को मेहंदी लगाई जाती है और इतना ही नहीं परिवार की सारी औरतें भी मेहंदी लगवाती हैं। हल्दी की रस्म में दुल्हन को हल्दी लगाई जाती है। और हल्दी के रस में सब लोग पीले रंग के कपड़े पहनते हैं। संगीत की रस्म में गाना बजाना होता है। परिवार की औरतें मिलकर डांस करती है। यहां तक की दुल्हन भी अपने संगीत में डांस करती है। शादी दो लोगों का रिश्ता नहीं है अपितु दो परिवारों का मेल होता है।

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Answered on10/03/23

भारतीय शादियों मे बहुत सी रस्मे होती है, जैसे कि तिलक, मेंहदी, संगीत और हल्दी की भी रस्म होती है।
शादी के कुछ दिन पहले तिलक की रस्म होती है, तिलक की रस्म मे दुल्हन का भाई, दूल्हे के माथे मे टीका लगाकर पान खिलाता है और फिर दूल्हे को मिठाई, कपड़े और ड्राई फ्रूट्स भेंट मे देता है।

इसके बाद शादी के 2-3 दिन पहले मेंहदी की रस्म होती है, जिसमे दुल्हन के हाथ मे दूल्हे का नाम मेंहदी से लिखते है और परिवार के सभी सदस्य मेंहदी सेरेमनी मे खूब एन्जॉय करते है इस तरह से मेंहदी की रस्म खत्म होती है।

शादी के कुछ दिन पहले संगीत की रस्म की जाती है, जिसमे परिवार वाले, दुल्हन के दोस्त और रिश्तेदार सभी लोग डीजे मे खूब डांस करते है।और दूल्हे को भीउसके परिवार वाले, मेहमान हल्दी लगाते है, जिससे दूल्हे का चेहरा निखर जाता है।Letsdiskuss

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