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Updated on Mar 7, 2026education

कारक कितने प्रकार के होते हैं ?

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Answered on Sep 18, 2021

किसी वाक्य या मुहावरे या वाक्यांशमें संज्ञा या सर्वनाम का उनके क्रिया के अनुसार उनके सम्बन्ध को उनके रूप के अनुरूप बदलना कारक कहलाता है। कारक आठ प्रकार के होते है - कर्ता कारक, कर्म कारक, करण कारक, सम्प्रदान कारक, अपादान कारक, सम्बन्ध कारक, अधिकरण कारक, सम्बोधन कारक।कर्ता से अधिकरण तक विभक्ति चिह्न के अंत में लगाए जाते हैं, किन्तु संबोधन कारक के चिह्न-हे, रे, आदि प्रायः शब्द से पूर्व लगाए जाते हैं।

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Answered on Mar 7, 2026

हिन्दी व्याकरण में संज्ञा या सर्वनाम का वाक्य के अन्य शब्दों (विशेषकर क्रिया) के साथ संबंध बताने वाले रूप को कारक (Case) कहते हैं। हिन्दी में कारक के मुख्य रूप से 8 प्रकार होते हैं, जिन्हें उनके विशिष्ट 'विभक्ति चिन्हों' या 'परसर्ग' से पहचाना जाता है:

  1. कर्ता (ने): क्रिया करने वाला।
  2. कर्म (को): जिस पर क्रिया का फल पड़े।
  3. करण (से, के द्वारा): क्रिया का साधन।
  4. सम्प्रदान (को, के लिए): जिसके लिए क्रिया की जाए।
  5. अपादान (से - अलग होना): अलगाव का भाव।
  6. संबंध (का, की, के): अन्य पदों से संबंध।
  7. अधिकरण (में, पर): क्रिया का आधार या स्थान।
  8. संबोधन (हे! अरे!): किसी को पुकारना।

इन कारकों के बिना वाक्य का अर्थ स्पष्ट नहीं हो पाता। सही कारक चिन्हों का प्रयोग भाषा को शुद्ध और अर्थपूर्ण बनाता है।

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