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दोस्तों इस पोस्ट में हम आपको बताएंगे कि स्तूप किसे कहते हैं स्तूप का अर्थ होता है ढेर या थूहा। पदार्थों का ढेर या फिर एकत्र किए गए समूह को स्तूप कहा जाता है स्तूप शब्द को संस्कृत में स्तूप: बोला जाता है जिसका अर्थ एकत्रित करना या ढेर लगाना होता है। मिट्टी से ढकेलने की वजह से इस क्रिया को स्तूप नाम दिया गया। भारत में अनेकोंं प्रकार के स्तूप बने हुए हैं । स्तूूूूूूूप शब्द का संबंध बौद्ध धर्म से होता हैै।

दोस्तों क्या आप जानते हैं कि स्तूप किसे कहते हैं। यदि आप जानते हैं तो अच्छी बात है और यदि जो लोग नहीं जानते हैं तो आज मैं उन लोगों को इस पोस्ट के माध्यम से स्तूप के बारे में जानकारी दूंगी। स्तूप शब्द को संस्कृत भाषा से लिया गया है। दोस्तों मैं आपको बता दूं कि स्तूप का शाब्दिक अर्थ होता है ढेर या थूहा उदाहरण के लिए हम आपको बता दें कि जैसे मिट्टी का ढेर एकत्रित करके रखा गया हो उसे ही स्तूप कहते हैं। हम आपकी जानकारी के लिए बता दें की स्तूप शब्द धर्म से संबंधित है। हमारे भारत देश में एक नहीं अनेक स्तूप पाए जाते हैं तो चलिए हम आपको कुछ स्तूपों के नाम बताते हैं। हमारे सतना जिले के पास एक चेहरा स्टेशन है उसके 6 किलोमीटर आगे पर एक स्तूप बना है। दूसरा मध्य प्रदेश के सांची मे भी एक स्तूप बना है।

स्तूप किसे कहते हैं आज हम आपको इस आर्टिकल में बताएंगे स्तूप शब्द सुनने में थोड़ा अजीब लगता है। दोस्तों स्तूप शब्द का शाब्दिक अर्थ होता है ढेर अथवा थूहा। जैसे कि मिट्टी व अन्य पदार्थों को का ढेर या एकत्र किए गए समूह को स्तूप कहते हैं। स्तूप शब्द का संबंध बौद्ध धर्म से है। हमारे भारत देश में अनेक प्रकार के स्तूप पाए गए हैं। जो यहां पर हम आपको बताने जा रहे हैं।
भरहुत स्तूप जोकि मध्य प्रदेश के सतना जिले के उचेहरा स्टेशन के 6 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इसके अलावा दूसरा स्तूप सांची का स्तूप। जो कि मध्य प्रदेश के विदिशा शहर में स्थित है।
एक स्टूपा (संस्कृत: स्तूप, "हीप") एक टीला जैसी या अर्धगोल संरचना है जिसमें अवशेष (जैसे raarīra - आमतौर पर बौद्ध भिक्षुओं या ननों के अवशेष) होते हैं जिन्हें ध्यान की जगह के रूप में उपयोग किया जाता है। संबंधित वास्तुकला शब्द एक चैत्य है, जो एक प्रार्थना कक्ष या मंदिर है जिसमें एक स्तूप है।
स्तूप (Stupa) एक अर्ध-गोलाकार टीले जैसी संरचना होती है, जिसका उपयोग मुख्य रूप से बौद्ध धर्म में पवित्र अवशेषों को रखने के लिए किया जाता है। संस्कृत में 'स्तूप' का शाब्दिक अर्थ 'ढेर' या 'थूहा' होता है।
स्तूप की मुख्य विशेषताएँ:
सांची का स्तूप और सारनाथ का धमेख स्तूप भारत के सबसे प्रसिद्ध उदाहरण हैं। प्राचीन काल में सम्राट अशोक ने बौद्ध धर्म के प्रचार के लिए हजारों स्तूपों का निर्माण करवाया था।
