स्तूप (Stupa) एक अर्ध-गोलाकार टीले जैसी संरचना होती है, जिसका उपयोग मुख्य रूप से बौद्ध धर्म में पवित्र अवशेषों को रखने के लिए किया जाता है। संस्कृत में 'स्तूप' का शाब्दिक अर्थ 'ढेर' या 'थूहा' होता है।
स्तूप की मुख्य विशेषताएँ:
- अवशेष: इसमें भगवान बुद्ध या उनके शिष्यों के अवशेष (जैसे दांत, अस्थियां या बाल) या उनके द्वारा उपयोग की गई वस्तुएं रखी जाती हैं।
- वास्तुकला: स्तूप के मुख्य हिस्सों में 'अण्ड' (अर्ध-गोलाकार हिस्सा), 'हर्र्मिका' (ऊपर की बालकनी) और 'छत्र' शामिल होते हैं। इसके चारों ओर एक 'प्रदक्षिणा पथ' होता है जहाँ भक्त परिक्रमा करते हैं।
- प्रतीक: यह शांति, ज्ञान और बुद्ध के महापरिनिर्वाण का प्रतीक माना जाता है।
सांची का स्तूप और सारनाथ का धमेख स्तूप भारत के सबसे प्रसिद्ध उदाहरण हैं। प्राचीन काल में सम्राट अशोक ने बौद्ध धर्म के प्रचार के लिए हजारों स्तूपों का निर्माण करवाया था।



