कैलकुलेटर को हिंदी मे गणक कहते है। प्राचीन काल मे कैलकुलेटर का उपयोग बहुत ज्यादा करते थे, क्योंकि उस समय मोबाइल का अविष्कार नहीं हुआ था। प्राचीन काल लोग कैलकुलेटर का इस्तेमाल गणित के सवालों को हल करने के लिए करते थे, साथ ही स्टूडेंट से टेबल नहीं बनती थी तो कैलकुलेटर की मदद से गणित के अंको को जोड़-जोड़कर टेबल की लाइन पूरी कर लेते थे। और इसी तरह से गणित की टेबल को याद कर लेते थे। इसी तरह जोड़, घटाना और गुणा, भाग कैलुलेटर की मदद से कर लेते है,साथ ही इंजीनिरिंग के इलाके में भी कैलकुलेटर का इस्तेमाल अधिक किया जाता था।
कैलकुलेटर का उपयोग ज्यादातर लोग जोड़ने के लिए करते है, एक संख्या डालते है फिर जोड़ का निशान लगाकर दूसरी संख्या डालकर बराबर करने पर कुल योग आ जाता है यानि जोड़ का टोटल संख्या आ जाता है। इसी तरह से घटाना करते है, तो घटाने की संख्या को कैलुलेटर में ऊपर, नीचे लिखकर घटाने का चिन्ह लगाकर जो टोटल की संख्या आती है वह संख्या लिख देते है। इसी तरह से भाग का चिन्ह लगाकर संख्या कैलुलेटर लिख कर टोटल संख्या लिख कर वही संख्या कॉपी में लिख लेते है।
प्राचीन काल में कैलुलेटर का इस्तेमाल अधिक होता था, लेकिन जैसे -जैसे मोबाइल फोन का अविष्कार हुआ। वैसे -वैसे लोग मोबाइल फोन की मदद से ही कैलकुलेटर करने लगे क्योंकि मोबाइल फोन में ही कैलकुलेटर होता है, इसलिए आज के वर्तमान समय में लोग मोबाइल फ़ोन में जो कैलकुलेटर होता है, उसी कैलकुलेटर का इस्तेमाल करने लगे। क्योंकि मोबाइल फोन हर वक़्त इंसान की जेब होता है और जरूरत पड़ने पर मोबाइल फोन को ओपन करके कैलकुलेटर कर लेते है। जैसे कि बैंक जाते है तो पैसे जमा करने के लिए तो नोट काउंटिंग करने के लिए मोबाइल फोन का कैलकुलेटर ओपन करके नोट काउंट करके नोट की संख्या कैलकुलेटर में डालकर गुणा करके कुल नोटों की संख्या फॉर्म में भरकर बैंक में पैसा आसानी से जमा कर सकते है।



