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Rohit Valiyan

Cashier ( Kotak Mahindra Bank ) | पोस्ट किया |


क्लॉटिंग क्या है,ये किस कारण होती है,और इसको दूर करने के क्या उपाय है?


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Content Writer | पोस्ट किया


क्लॉटिंग का हिंदी मतलब है "थक्का " | खून का थक्का अर्थात ब्लड क्लॉट अपने आप बनता है , और कभी कभी ये क्लॉटिंग क्षति हुए नसों से ब्लड रोकने का काम भी करता है अगर  ऐसा न हो तो चोट लगने पर शरीर में खून का बहाव रोकना बहुत ही मुश्किल हो जायेगा। हमारे प्लाज्मा में मौजूद प्लेटलेट्स और प्रोटीन, चोट की जगह पर रक्त के थक्के का निर्माण करके रक्त के बहाव को रोकते हैं। आमतौर पर चोट के ठीक होने पर खून का थक्का अपने आप घुल जाता है। लेकिन खून के थक्के के न घुलने और लंबे समय तक बने रहने पर सेहत के लिए खतरनाक होता है |

सारा दिन किसी एक स्‍थान या ऑफिस  में लगातार बैठकर काम करने वालों को खून में थक्‍के की समस्‍या होती है। इसके अलावा इसके अलावा मोटापा, धूम्रपान की लत, लंबे समय लेटे रहने पर,तथा हार्मोंन असंतुलन के कारण भी खून में थक्‍के की समस्या हो सकती है। एक नए शोध के अनुसार, जो लोग लगातार 10 घंटे तक काम करते हैं और इस दौरान कोई विराम नहीं लेते तो उनमें खून के थक्के जमने का खतरा दोगुना हो जाता है। यह अध्‍ययन काम के बीच लिए जाने वाले विराम के महत्त्‍व को दिखाता है।

जब ब्लड क्लॉटिंग होती है तो ब्लड को पतला करने के लिए कई प्रकार की दवा का प्रयोग किया जाता है | ब्लड क्लॉट की वजह से हार्ट अटैक जैसी कई स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं होने लगती हैं। कई प्राकृतिक उपायों की मदद से खून को पतला किया जा सकता है। ऐसे फूड्स मौजूद हैं जिनका सेवन करके क्लॉटिंग के खतरे को कम किया जा सकता है। खून का पतला होने की वजह से इसका दिमाग में प्रवाह भी ठीक रहता है |

उपाय :-

-पानी: 
आपको एक दिन में 1-2 लिटर पानी पीना चाहिए। हमारे शरीर में एक तिहाई भाग पानी का है। शरीर से विषैले पदार्थ बाहर निकालने और बॉडी को डिटॉक्स करने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए।

-हल्दी: 
कई औषधीय गुण से भरपूर हल्दी शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करती हैं। हल्दी में कुरकुमिन नामक पदार्थ होता है जो ब्लड क्लॉट को रोकने के लिए प्लेटलेट पर काम करता है।

-मछली का तेल: 
मछली में ओमेगा-3 फैटी एसिड ईपीए और डीएचए होता है जिसमें खून को पतला करने से गुण होते हैं। ईपीए और डीएचए ब्लड को पतला करने में मदद करते हैं। मछली के तेल का सेवन कैप्सूल की तरह किया जा सकता है।

-अदरक :
अदरक में भी सेलिसिलेट होता है जो कई पौधों में पाया जाता है। एसिटाइल सेलिसिलिक एसिड, सेलिसिलेट से उत्पन्न होता है जिसे एस्पिरिन भी कहा जाता है। एवोकाडो, बेरी, चेरी जैसे कुछ पदार्थों में सेलिसिलेट होता है जो खून को पतला करने में मदद करते हैं।

-लहसून: 
लहसुन में कई ऐसे एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जो शरीर में फ्री रेडिकल को नष्ट करने में मदद करते हैं। इसके साथ ही लहसुन ब्लड प्रेशर को सामान्य रखकर खून को पतला करने में मदद करता है जिससे रक्त के प्रवाह में सुधार होता है।

-अंकुरित अनाज :
अंकुरित अनाज फाइबर के भरपूर स्रोत होते हैं। ये रक्त में ऑक्सीजन बढ़ाने के बेहतर होता है |


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