सीपीके या क्रिएटिन फॉस्फोकाइनेज टेस्ट को क्रिएटिन काइनेज टेस्ट यानी सीके टेस्ट भी कहते हैं। यह एक खून की जांच यानी कि ब्लड टेस्ट है जिससे शरीर में सीपीके एंजाइम की मात्रा का स्तर पता चलता है।
यह एंजाइम खासतौर पर मस्तिष्क, कार्डियक और स्केलेटल मसल्स में पाया जाता है। जो कि हमारी मांसपेशियों के ठीक तरह से काम करने में मदद पहुंचाता है। आमतौर से खून में सीपीके एंजाइम बहुत थोड़ा ही पाया जाता है। खून में अगर इस एंजाइम की मात्रा बढ़ जाती है तो यह मांसपेशियों के क्षतिग्रस्त होने का संकेत होता है। साथ ही इसकी बढ़ी मात्रा शरीर में ऊर्जा उत्पादन में दिक्कत आने का भी संकेतक हो सकता है। दरअसल कुछ ऐसी परिस्थितियां होती हैं जिनके चलते मांसपेशियां क्षतिग्रस्त होने लगती हैं। जैसे कि सूजन, मायोपैथी, अत्यधिक कसरत करना या फिर मांसपेशियों के टूटने की समस्या।
सीपीके एंजाइम का टेस्ट कुछ मिनटों में पूरा हो जाता है। जिसमें डॉक्टर आपकी बांह में सुई लगाकर आपके खून का नमूना यानी सैंपल ले लेते हैं। और फिर उसे किसी टेस्ट ट्यूब यानी परखनली में डालकर उसे कायदे से बंद करके प्रयोगशाला में परीक्षण के लिये भेज दिया जाता है। इस दौरान आपको सुई लगाने की वज़ह से केवल कुछ हल्का सा दर्द हो सकता है। या फिर हल्का चक्कर आने और कभी-कभार सुई लगने की जगह पर नीलापन आ जाने की समस्या भी हो सकती है। इसके अलावा कभी-कभी सुई लगवाने वाली जगह पर संक्रमण भी हो सकता है। हालांकि ये दिक्कतें ज्यादा समय तक नहीं टिकतीं। पर अगर ऐसा होता है तो आपको एक बार अपने डॉक्टर की सलाह ज़ुरूर ले लेनी चाहिये।
सीपीके एंजाइम टेस्ट के नतीज़ों को माइक्रोग्राम प्रति लीटर (mcg/l) में लिखते हैं। सामान्यतः एक व्यक्ति में इसकी मात्रा का स्तर दस से लेकर एक सौ बीस माइक्रोग्राम प्रति लीटर तक पाया जाता है। पर कुछ कारण से कुछ मामलों में इसका स्तर बढ़ा हुआ हो सकता है। ये कारण अलग-अलग हो सकते हैं। जैसे -- चोट लगना, जल जाना, अत्यधिक कसरत करना, मांसपेशियों का टूटना, लंबे समय तक किसी सर्जरी का चलना, मस्तिष्क में चोट लगना या स्ट्रोक, याददाश्त संबंधी समस्या, थाइराइड की दिक्कत, किडनी फेलियर, आर्थराइटिस या गठिया, रक्त वाहिकाओं में थक्के जमना, संक्रमण, ठंड के साथ बुखार आना या किसी तरह के दौरे पड़ना वगैरह।

जिन लोगों की मांसपेशियों का घनत्व अधिक होता है उनके खून में भी सीपीके एंजाइम की अधिक मात्रा होती है। यही कारण है कि यह महिलाओं से कहीं अधिक पुरुषों में पाया जाता है। गर्भावस्था के शुरुआती समय भी महिलाओं में सीपीके का स्तर घट जाया करता है। पर मांसपेशियों में किसी तरह की चोट आने या सुई लगवाने पर भी इसका स्तर कुछ समय के लिये बढ़ जाता है।
सीपीके एंजाइम टेस्ट को दिल के दौरे का परीक्षण करने में भी उपयुक्त माना जाता रहा है। हालांकि अब ये ट्रोपोनिन आई टेस्ट के ज़रिये किया जाता है। फिर भी बार-बार पड़ने वाले दिल के दौरों में सीपीके टेस्ट किया जा सकता है। और भी दूसरे तमाम टेस्ट के साथ भी सीपीके एंजाइम का टेस्ट किया जाता है। जैसे इलेक्ट्रोलाइट स्तर, क्रिएटिनिन या खून में यूूरिया और नाइट्रोजन की मात्रा की जांच करते समय भी शरीर में सीपीके एंजाइम का स्तर टेस्ट किया जा सकता है।