हिंदी साहित्य में काव्य की शोभा बढ़ाने वाले शब्दों को अलंकार कहते हैं। जिस प्रकार किसी स्त्री के आभूषण के द्वारा उसकी शोभा बढ़ाई जाती है। ठीक उसी प्रकार ही काव्य की शोभा शब्दों द्वारा बढ़ाई जाती है। काव्य के दो भेद होते हैं :- (शब्दालंकार) - अनुप्रास अलंकार, यमक अलंकार, श्रेष अलंकार।
( अर्थालंकार )- अर्थालंकार में अलंकार होता है जिसके द्वारा किसी अर्थ का पता चलता है इसके भी चार प्रकार होते हैं। उपमा अलंकार,रूपक अलंकार, उत्प्रेक्षा अलंकार,अतिशयोक्ति अलंकार।







