सुबह के नाश्ते की टेबल पर कोलेस्ट्रॉल कम करने वाली रोटी, इम्यूनिटी बढ़ाने वाली प्रोबायोटिक दही, स्वस्थ हड्डियों के लिए कैल्शियम युक्त ऑरेंज जूस है। इस मेन्यू को आज "फंक्शनल फूड' के नाम से जाना जाता है। इस तरह के खाद्य पदार्थ बाजार में भरे पड़े हैं, जो न केवल पौष्टिक होते हैं और खुशी प्रदान करते हैं, बल्कि ये स्वास्थ्य को दुरुस्त रखने के साथ ही बीमारियों के जोखिम को भी कम करते हैं।
इस शब्द का प्रयोग पहली बार जापान में 80 के दशक में किया गया था। ये वे प्रोसेस्ड फूड होते थे, जिनमें पोषक तत्व के साथ ही विशेष शारीरिक गतिविधियों के लिए खास चीजें होती थीं।
इनमें "एडिशनल फंक्शन' होता है, किसी खास जोखिम को कम करने के लिए जरूरी होती हैं। जैसे, कोलेस्ट्रॉल, ऑस्टियोपोरोसिस, इम्यूनिटी बढ़ाना, फैट कम करना आदि। उदाहरण के लिए कोलेस्ट्रॉल को कम करने के लिए सोय प्रोटीन, ओट फाइबर का सेवन लाभदायक रहता है।
करीब 2,500 साल पहले ही लिखा गया था, "भोजन को दवा की तरह बनाओ और दवा को भोजन की तरह'। पश्चिमी देशों ने इस तरह के भोजन को रिवॉल्यूशन के तौर पर लिया। हमारे देश में शुरू से ही भूख मिटाने के अलावा दवा के रूप में भोजन का प्रयोग होता आया है, जिसे अब नये रूप में समूचा विश्व अपना रहा है। पूर्वी इलाज के इस पुराने तरीकों के बारे में फूड कंपनियों ने जमीनी स्तर पर रिसर्च करके फंक्शनल फूड को बाजार में लांच किया।
अब लोग अपने स्वास्थ्य के प्रति काफी जागरुक हो गए हैं तो ऐसे में भला इस तरह के उत्पादों में उनकी रुचि कैसे नहीं बढ़ती। उन्हें अब समझ आ गया है कि खुद को फिट एंड फाइन बनाए रखने के लिए इन "डू इट योरसेल्फ' अप्रोच को अपनाना पड़ेगा।
बाजार में उपलब्ध मिक्स आटा इसका बेहतरीन उदाहरण है, जो ओट, बार्ली, फाइबर और सोय प्रोटीन का मिश्रण है और कोलेस्ट्रॉल को कम करता है। इसी तरह प्रोबायोटिक दही इम्यूनिटी को बढ़ाता है। इस तरह के भोजन से हम बीमार नहीं पड़ते, बल्कि अपना ख्याल अधिक बेहतरी से रख पाते हैं। फाइबर युक्त भोजन पेट भरा होने का एहसास देता है तो विटामिन बी ऊर्जा हेतु महत्वपूर्ण है। लो फैट होने के कारण वजन को संतुलित करता है।'



