komal Solanki
komal Solanki· 3 years ago
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आनुवंशिकता क्या है?

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Answered on09/06/23

अनुवंशिकता -जीव विज्ञान की वह शाखा जिसके अंतर्गत माता -पिता के गुण पीढ़ी -दर -पीढ़ी उनके सन्तानो मे संचरित होते रहते है, तो इस तरह के गुण अनुवंशिकता कहलाता है।

जैसे - माता -पिता की हाईट छोटी होती है, तो उनके संतान की भी हाईट छोटी होती है और ऐसे ही पीढ़ी -दर -पीढ़ी मे गुण संचरित होते जाते है। इसके अलावा माता -पिता का रंग काला, गोरा होने पर उनके सन्तानो मे भी वही गुण संचरित होते जाते है।Letsdiskuss

और पढ़े- आप जीएमओ (आनुवंशिक रूप से संशोधित जीव) सब्जियों के बारे में क्या सोचते हैं?

M
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Answered on09/17/23

अनुवांशिकता :- जींस द्वारा माता-पिता से उनके उनके बच्चों में या एक पीढ़ी से दूसरे पीढ़ी शारीरिक गुणो तथा संगठनों के होने वाले स्थानांतरण को अनुवांशिक कहते हैं।अनुवांशिकता का अध्ययन जनेटिक्स के अंतर्गत किया जाता है। अनुवांशिकता के अध्ययन ग्रेगर जॉन मेंडल की मुलभूत उपलब्धियां अनुवांशिकी के अंतर्गत समाहित किया जाता है।

संचारित होने वाले लक्षण को अनुवांशिक लक्षण कहते हैं

जैसे माता-पिता की हाइट छोटी होती है तो उनके संतान की भीArticle image हाइड छोटी होती है और ऐसे ही पीढ़ी दर पीढ़ी में गुण संचारित होते रहते हैं।

Poonam Patel
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Answered on09/06/23

दोस्तों आज इस पोस्ट में हम आपको बताएंगे कि अनुवांशिकता क्या है जीव विज्ञान के अनुसार माता-पिता के गुण उनके ही बच्चों में दिखाई देना अनुवांशिकता कहलाता है यह कहे की माता-पिता के गुण या लक्षण संतान में ही दिखाई देना अनुवांशिकता होता है एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में
संचारित होने वाले लक्षण को अनुवांशिक लक्षण कहते हैं अनुवांशिकता के जनक के रूप में ग्रेगोर जोहान मेंडल है।

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V
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Answered on09/06/23

अनुवांशिकता की परिभाषा:-

आज हम आपको इस आर्टिकल में बताएंगे कि अनुवांशिकता क्या है तो चलिए दोस्तों बिना देर किए जानते हैं अनुवांशिकता क्या है जीव विज्ञान की वह शाखा जिसके अंतर्गत माता-पिता और अपने पूर्वजों के गुण उनके पीढ़ी दर पीढ़ी पर संचारित होना इस गुण को आनुवंशिकता कहते हैं, जैसे कि यदि किसी माता-पिता के बच्चे गोरे हैं तो वह स्वाभाविक बात होगी कि उनके माता-पिता भी गोरे होंगे, यदि किसी के माता-पिता लंबे हैं तो उनके बच्चे भी लंबे होंगे इसे ही हम अनुवांशिकता कहते हैं यानी की माता-पिता के गुण बच्चों में दिखाई देते हैं।

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Krishna Patel
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Answered on10/20/23

राष्ट्रगान को गाने में लगने वाला समय, इसे गाए जाने की गति, राष्ट्रगान के संस्करण और छंदों को जोड़ने या हटाने जैसे कारकों के आधार पर अलग-अलग हो सकता है। किसी देश के राष्ट्रगान की आमतौर पर एक मानक अवधि होती है, और इसे उचित समय सीमा के भीतर गाना परंपरा और सम्मान का विषय है। राष्ट्रगान गाने के लिए यहां कुछ सामान्य दिशानिर्देश दिए गए हैं:

1.सम्मानजनक अवधि: राष्ट्रगान गाना एक प्रतीकात्मक और गंभीर कार्य है, और इसे सम्मान और गरिमा के साथ किया जाना चाहिए। अधिकांश राष्ट्रगान कुछ ही मिनटों में गाए जा सकते हैं।

2.मानक छंद: कई राष्ट्रगानों का एक मानक संस्करण होता है जिसमें विशिष्ट संख्या में छंद और एक कोरस शामिल होता है। इन छंदों और कोरस को गाने में आम तौर पर कुछ मिनट लगते हैं।

3.आधिकारिक दिशानिर्देश: कुछ देशों में, राष्ट्रगान के उचित गायन के संबंध में आधिकारिक दिशानिर्देश हैं। ये दिशानिर्देश गाए जाने वाले छंदों की संख्या और इसे जिस गति से निष्पादित किया जाना चाहिए उसे निर्दिष्ट कर सकते हैं।

4. प्रथागत गति: स्पष्ट उच्चारण और अभिव्यक्ति की अनुमति देने के लिए राष्ट्रगान आमतौर पर मध्यम गति से गाए जाते हैं। बहुत जल्दी गाने से राष्ट्रगान की गंभीरता से समझौता हो सकता है।

5.विशेष अवसर: राष्ट्रीय छुट्टियों या आधिकारिक कार्यक्रमों जैसे विशेष अवसरों पर, अक्सर राष्ट्रगान का पूरा संस्करण गाया जाता है, जिससे इसकी अवधि बढ़ सकती है। हालाँकि, इसे आमतौर पर एक उचित समय सीमा के भीतर गाया जाता है।

हालाँकि राष्ट्रगान गाने के लिए कोई निश्चित अधिकतम समय नहीं है, लेकिन इस कार्य को श्रद्धा के साथ करना और राष्ट्रगान के गायन के संबंध में सांस्कृतिक और आधिकारिक रीति-रिवाजों का पालन करना महत्वपूर्ण है। अवधि के बजाय देशभक्ति और प्रतीकात्मक महत्व पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए।

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Answered on03/07/26

आनुवंशिकता (Heredity) वह जैविक प्रक्रिया है जिसके द्वारा माता-पिता के शारीरिक और मानसिक गुण उनकी संतानों में पहुँचते हैं। सरल शब्दों में, यह "पीढ़ी-दर-पीढ़ी" गुणों के हस्तांतरण का नाम है।

यह प्रक्रिया जीन्स (Genes) के माध्यम से होती है, जो हमारे डीएनए (DNA) में स्थित होते हैं। यही कारण है कि बच्चों की आँखों का रंग, बालों की बनावट या कद-काठी अक्सर उनके माता-पिता से मिलती-जुलती है। ग्रेगर जॉन मेंडल को 'आनुवंशिकी का जनक' कहा जाता है, जिन्होंने मटर के पौधों पर प्रयोग करके इसके नियमों की खोज की थी।

यह विज्ञान न केवल हमारे रूप-रंग को समझने में मदद करता है, बल्कि आनुवंशिक बीमारियों की पहचान और उपचार में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

Ramesh Kumar
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