मानसून क्या है?
दोस्तों मुख्य तौर पर मानसून एक प्रकार की मौसमी घटना है एवं मानसून शब्द की उत्पत्ति अरबी शब्द मौसिम:-
से हुई है। मुख्य तौर पर मानसून दो प्रकार के होते हैं ग्रीष्मकालीन और शीतकालीन मानसून। भारत में ग्रीष्मकालीन मानसून का प्रभाव अधिक देखा जाता है। जिसके कारण ही बारिश होती है। ग्रीष्मकालीन मानसून को दक्षिण पश्चिम मानसून भी कहते हैं। इसे गर्मियों का मानसून भी कहा जाता है तथा यह जून से लेकर सितंबर के बीच सक्रिय होती है।
ग्रीष्मकालीन मानसून के कारण ही भारत और उसके आसपास के क्षेत्र में बारिश होती है जो की कृषि पर भी एक महत्वपूर्ण प्रभाव डालता है। मानसून क्या है इस बारे में विस्तारपूर्वक समझने के लिए लेख को अंत तक अवश्य पढ़ें।

मानसून का आगमन:-
भारत में ग्रीष्मकालीन मानसून का प्रभाव देखने को मिलता है। जिसे दक्षिणी पश्चिमी मानसून भी कहते हैं। यह ग्रीष्मकालीन मानसून जून से लेकर सितंबर तक होती है जो धीरे-धीरे उत्तर और पश्चिम की ओर बढ़ती है। जब सूर्य की किरणें भूमध्य रेखा पर सीधी पड़ती है तो वहां की आसपास की हवाई गर्म होकर ऊपर उठती है और समुद्र से ठंडी और नम हवाओं को खींचती है यानी ग्रीष्मकालीन मानसून के आने का मुख्य कारण भूमध्य रेखा के पास की गर्मी से उत्पन्न हुआ निम्न दबाव क्षेत्र है।
मानसून की शुरुआत में एक मौसमी वायु गति का निर्माण होता है और इसी कारण से भारत में अधिकांश वर्षा होती है। मानसून भारत के जनजीवन के लिए बेहद ही महत्वपूर्ण है मानसून का महत्व जानने के लिए लेख को आगे पढ़ें।
मानसून का महत्व:-
मानसून भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बेहद ही महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत की 70% जनसंख्या कृषि पर निर्भर है। यानी भारतीय अर्थव्यवस्था का अधिकांश हिस्सा कृषि पर निर्भर करता है एवं कृषि के लिए मानसून का महत्व सबसे अधिक है क्योंकि मानसून के कारण ही वर्षा होती है जिससे खेतों में जल की आपूर्ति पूरी हो पाती है। मानसून के समय जलाशय और नदियां भरती है। जिसके कारण पेयजल और सिंचाई जैसे आवश्यक कार्य पूरे होते हैं।
मानसून का विज्ञान बहुत ही जटिल है मानसून को समझने के लिए कई प्रकार के अध्ययन और अनुसंधान जैसे कि वायुमंडलीय दबाव मापन, तापमान मापन, समुद्र के तापमान को मापना इत्यादि किए जाते हैं। उसके बाद या अनुमान लगाया जाता है कि मानसून की स्थिति भारत में कैसी रहेगी। मानसून के महत्व के साथ-साथ मानसून के कुछ नकारात्मक प्रभाव भी है। इसके बारे में हमने आगे चर्चा की है।
मानसून के नकारात्मक प्रभाव:-
दोस्तों अत्यधिक मानसून के कारण कृषि अच्छी होती है लेकिन कभी-कभी मानसून में अत्यधिक बारिश होने के कारण नदियों का जलस्तर बढ़ जाता है और जिससे बाढ़ की स्थिति उत्पन्न होती है एवं कृषि की सारी फैसले, संपत्ति और मानव जीवन को भी बहुत नुकसान पहुंचता है। इसके अलावा मानसून के मौसम में पानी से संबंधित कई बीमारियों का प्रकोप बढ़ जाता है जैसे कि मलेरिया, डेंगू और हैजा जैसी बीमारियां।
भारी बारिश के कारण सड़के भी पानी से भर जाती है और दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ जाती है लेकिन मानसून के नकारात्मक प्रभाव को कम करने के लिए अगर प्रकृति की सही तरीके से देखभाल यानी कि जंगलों की कटाई को बंद करना, पेड़ लगाना, कूड़े को सही जगह फेंकना जैसी चीज को अपनाया जाए तो मानसून के नकारात्मक प्रभाव से बचा जा सकता है एवं मानसून के महत्व को समझा जा सकता है।

निष्कर्ष:-
आज के आर्टिकल में हमने मानसून क्या है इस बारे में विस्तारपूर्वक चर्चा की है। साथ ही साथ मानसून का आगमन कब होता है एवं मानसून का महत्व तथा मानसून के नकारात्मक प्रभाव के बारे में भी विस्तारपूर्वक समझाया है। सरल शब्दों में कहें तो मानसून एक प्रकार की मौसमी घटना है जिसके कारण ही जुलाई से लेकर सितंबर तक के महीने में बारिश का मौसम होता है एवं इसी मानसून के कारण ही कृषि पर निर्भर पूरे भारत की अर्थव्यवस्था सफलतापूर्वक चल पाती है।

