वैसे तो प्राणायाम के बारे में आप सभी लोगों को जानकारी तो होगी ही यदि जिन लोगों को इसकी जानकारी नहीं है तो आज मैं उन लोगों को प्राणायाम की जानकारी दूंगी इसलिए आप इसलिए को एक बार पूरा अवश्य पढ़े और प्राणायाम की जानकारी प्राप्त करें।
चलिए जानते हैं कि प्राणायाम किसे कहते हैं:-
मैं आपको बता दूं कि प्राणायाम का अर्थ होता है प्राण को आयाम देना। प्राण शक्ति का हमारे पूरे शरीर में संचार होता है। श्वास को सही प्रकार लेकर हम प्राण शक्ति को आयाम दे सकते हैं। अर्थात श्वास सही तरीके से लेकर हम अपनी प्राण शक्ति को बढ़ा सकते हैं इसे ही हम प्राणायाम कहते हैं।
इसके अलावा प्राणायाम को हम सरल शब्दों में सांस लेने व छोड़ने की गति को कुछ देर रोकना इसे भी प्राणायाम कहते हैं।
चलिए हम आपको प्राणायाम के फायदे बताते हैं:-
मैं आपको बता दूं कि प्राणायाम वायु मार्ग के स्त्राव को साफ कर सकता है। और फेफड़ों के अनुपालन को बढ़ा सकता है। इसके अलावा यह सांस लेने के दौरान स्वस्थ मांसपेशियों की कार्य प्रणाली को बढ़ा सकता है जिससे उन्हें मजबूती की प्राप्ति होती है। आप रोजाना 10 मिनट तक प्राणायाम का अभ्यास सुबह शाम खाली पेट कर सकते हैं।
चलिए जानते हैं कि प्राणायाम के प्रकार कितने हैं:-
बताया जाता है की मूल रूप से 12 प्रकार के प्राणायाम होते हैं जिनके फायदे भी अलग-अलग होते हैं।
- सबसे पहले नंबर पर आता है नाड़ी सोधन।
- दूसरे नंबर पर आती है शीतल प्राणायाम।
- तीसरे नंबर पर आती है उज्जयी प्राणायाम।
- चौथे नंबर पर आती है कपालभाति प्राणायाम।
- पांचवें नंबर पर आता है दीर्गा प्राणायाम।
- छठवें नंबर पर आता है विलोम प्राणायाम।
- सातवें नंबर पर आता है अनुलोम प्राणायाम।
- आठवें नंबर पर आता है भ्रामरी प्राणायाम।
- नौवे नंबर पर आता है भस्त्रिका प्राणायाम।
- दसवे नंबर पर आती है शीतली प्राणायाम।
- 11वीं नंबर पर आता है मूर्छा प्राणायाम।
- और अंतिम 12 नंबर पर आता है पलवनी प्राणायाम।

