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Satindra Chauhan

| पोस्ट किया |


क्या खास है इस साल के करवा चौथ में जानिए शुभ संयोग, दिनांक, चंद्र दर्शन का समय और पूजा की विधि?


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इस साल मनाये करवाचौथ कुछ इस खास ?

 

इस बात को तो सभी जानते हैं कि करवा चौथ का व्रत पति की लंबी आयु के लिए रखा जाता है| इस व्रत का हिंदू धर्म में विशेष महत्व माना जाता है| जिन महिलाओं का मानना सिर्फ यह है कि इस व्रत से उनके पति की उम्र लम्बी होती है तो हम उन्हें बताना चाहते हैं कि इस व्रत से सिर्फ उम्र ही लम्बी नहीं होती बल्कि यह आपके पति को हमेशा काम में सफलता भी दिलाती है| साथ ही उनके जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं|

 

क्या खास है इस साल के करवा चौथ में:

 

इस साल आने वाला करवा चौथ काफी शुभ है जो पांच साल के बाद आया है| क्योंकि इस साल करवा चौथ कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी 24 अक्टूबर 2021 दिन रविवार को है| इस दिन की खास बात यह है कि इस साल रोहणी नक्षत्र में पूजन होगा| जो कि काफी शुभ महुर्थ है इसलिए इस साल इस व्रत का महत्व काफी अधिक माना जा रहा है|

 

क्या होती है सरगी:


करवाचौथ में सरगी का बड़ा ही खास महत्व है| इव व्रत में सास अपनी बहू को सरगी देती है, जिसके बाद उनका व्रत शुरू होता है| ऐसी मान्यता है कि सरगी ही व्रत के समय शरीर को ऊर्जा प्रदान करती है| सरगी में आप कुछ चीज़ों को अपने खाने में शामिल कर सकते हैं|

सरगी में आप खीर या दूध से बनी फैनी जरुर खाएं| इसके साथ ही ड्राय फ्रूट्स, रोटी सब्जी, या फिर फल भी खा सकते हैं| और ध्यान रहे आप पानी जरुर पीयें क्योंकि फिर आपको दिन भर पानी नहीं पीना होता|

 

करवा चौथ व्रत रखने के नियम:


- करवा चौथ के व्रत में सरगी खाने की परंपरा है| जो व्रत में सुबह खाई जाती है|


- इस दिन सुहागिन स्त्रियों को सोलह श्रृंगार करना चाहिए, सुंदर और स्वच्छ कपड़े पहनना चाहिए और हाथों में मेहंदी लगानी चाहिए|


- रात में चंद्रमा की पूजा मिटटी के करवे से करनी चाहिए, कथा सुननी चाहिए और चन्द्रमा को अर्ग देकर और उसके पूजन के बाद ही व्रत खोलना चाहिए|

 

करवाचौथ का कथा का महुर्थ:


इस साल करवा चौथ का चंद्रमा रोहिणी नक्षत्र में उदय होता| जो रात को 08:11 पर निकलेगा| करवाचौथ की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त 24 अक्टूबर 2021 को शाम 06:55 से लेकर 08:51 तक रहेगा|

 

करवाचौथ की पूजा विधि:

 

- सबसे पहले करवा चौथ की आवश्यक पूजन सामग्री को एकत्र कर लें…


- व्रत के दिन सुबह स्नानादि करने के पश्चात इस मन्त्र का उच्चारण कर के व्रत कि शुरुआत करें…” मम सुखसौभाग्य पुत्रपौत्रादि सुस्थिर श्री प्राप्तये करक चतुर्थी व्रतमहं करिष्ये”


- पूरे दिन निर्जला रहें न ही कुछ खाएं न कुछ पीयें|


- अपने पूजन वाले स्थान पर दीवार पर गेरू से फलक बनाकर पिसे चावलों के घोल से करवा चित्रित करें|


- इस प्रक्रिया को वर कहते हैं| चित्रित करने की कला को करवा धरना कहा जाता है|


- आठ पूरिया और हलवा बनाएं जिसका आपको पूजन के समय भोग लगाना है|


- पूजा स्थान पर सुपारी से गौरी गणेश विराजमान करें|


- गोरी को सुहाग की सभी सामग्री रखें और कलश स्थापना करें|


- मिटटी का करवा रखें और उसमें गेहूं भरें और ढक्कन में शक्कर का बूरा भर दें|


- रोली से करवा पर स्वस्तिक बनाएं|


- गौरी-गणेश और चित्रित करवा की परंपरानुसार पूजा करें और अपने पति की दीर्घायु की कामना करें|


- कथा सुनने के बाद करवा पर हाथ घुमाकर अपनी सासुजी के पैर छूकर आशीर्वाद लें और करवा उन्हें दे दें|


- रात्रि में चन्द्रमा निकलने के बाद छलनी की ओट से उसे देखें और चन्द्रमा को अर्घ्य दें इसके बाद पति से आशीर्वाद लें|


इसके बाद अपना व्रत पूरा करें|


इस तरह करें इस साल का करवाचौथ व्रत…

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